
जामिया: प्रोफेसर ने किया "गैर-मुस्लिम छात्रों को फेल" करने संंबंधी ट्वीट, यूनिवर्सिटी ने किया निलंबित
क्या है खबर?
दिल्ली की जामिया मिलिया इस्लामिया के एक सहायक प्रोफेसर की सोशल मीडिया पोस्ट पर विवाद हो गया है।
अबरार अहमद ने अपने ट्वीट में 15 गैर-मुस्लिम छात्रों को फेल करने का उदाहरण देते हुए नागरिकता कानून (CAA) और इसके खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों पर अपनी राय रखी थी।
उनके इस ट्वीट पर विवाद होने के बाद यूनिवर्सिटी ने उन्हें निलंबित कर दिया।
वहीं अहमद ने अपनी सफाई में कहा है कि उनका ट्वीट महज एक व्यंग्य था।
विवादित ट्वीट
क्या लिखा था अहमद ने?
जामिया यूनिवर्सिटी के इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग विभाग में सहायक प्रोफेसर के पद पर तैनात अबरार अहमद ने बुधवार सुबह ट्वीट करते हुए कहा था, 'मैंने 15 गैर-मुस्लिम छात्रों को छोड़कर अपने बाकी सभी छात्रों को पास कर दिया और अब इन्हें दोबारा परीक्षा देनी होगी। अगर आप प्रदर्शन करेंगे तो 55 छात्र मेरे समर्थन में हैं। अगर प्रदर्शनों का अंत नहीं होगा तो बहुसंख्यक आपको सबक सिखाएंगे। कोरोना के कारण आपके प्रदर्शनों के प्रतीकों को मिटा दिया जाएगा।"
जानकारी
ट्वीट के बाद सोशल मीडिया पर देखने को मिला गुस्सा
अपने इस ट्वीट में अहमद ने जगह-जगह #CAA और #CAAProtests जैसे हैशटैग का प्रयोग किया था। देखते ही देखते अहमद का ट्वीट वायरल हो गया और उनके CAA का समर्थन करने वाले गैर-मुस्लिम छात्रों को फेल करने की बात कही जाने लगी।
कार्रवाई
जामिया यूनिवर्सिटी ने कहा- ट्वीट सांप्रदायिक तनाव पैदा करने वाला
वहीं अहमद के इस ट्वीट की जानकारी मिलते ही जामिया यूनिवर्सिटी ने उन्हें निलंबित कर दिया।
यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रार एपी सिद्दिकी द्वारा जारी इस आदेश में कहा गया है, 'जामिया के सहायक प्रोफेसर डॉ अबरार अहमद ने 15 गैर-मुस्लिम छात्रों को परीक्षा में फेल करने के बारे में ट्वीट किया था। CCS आचार नियमों के तहत ये सांप्रदायिक तनाव पैदा करने वाला गंभीर दुराचार है। यूनिवर्सिटी उन्हें जांच होने तक निलंबित करती है।'
सफाई
अहमद की सफाई, कहा- मुझे गलत समझा गया
इस बीच अहमद ने अपनी सफाई में कहा है कि उनका ट्वीट महज व्यंग्य था।
बुधवार देर रात जामिया शिक्षक संघ को भेजी अपनी सफाई में उन्होंने लिखा है, 'ये सरासर गलतफहमी और गलत व्याख्या है। ये एक व्यंग्य, पैरोडी और ये समझाने तारीका था कि कैसे CAA के जरिए अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जा रहा है और ये उतना ही बुरा है जितना किसी शिक्षक का ये कहना कि सभी अल्पसंख्यक छात्रों को फेल किया जाता है।'
सफाई
"12 साल से पढ़ा रहा हूं, भेदभाव की शिकायत करने वाला एक छात्र नहीं मिलेगा"
अहमद ने ये भी कहा कि वे M.Tech की दो कक्षाओं को पढ़ाते हैं और उनके सभी छात्र पास हो गए हैं। उन्होंने कहा कि गैर-मुस्लिम छात्रों को फेल करने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता।
उन्होंने कहा, "मैं 12 साल से अधिक समय से पढ़ा रहा हूं और आपको एक ऐसा छात्र नहीं मिलेगा जो भेदभाव की शिकायत करें।"
अहमद ने यूनवर्सिटी की जांच में सारी सच्चाई सामने आने की बात कही है।
नागरिकता कानून
क्या है CAA और क्यों हो रहा है इसका विरोध?
पिछले साल दिसंबर में संसद से पारित हुए CAA में पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्म के लोगों को आसानी से भारत की नागरिकता देने का प्रावधान किया गया है।
मुस्लिमों को इस कानून के दायरे से बाहर रखने के कारण इसका विरोध हो रहा है।
इसके खिलाफ जामिया यूनिवर्सिटी समेत देशभर में जबरदस्त प्रदर्शन हुए थे जिन्हें अब कोरोना वायरस के कारण स्थगित कर दिया गया है।