
कृषि कानून बनाने से पहले ली गई थी हरियाणा, पंजाब आदि राज्यों की राय- केंद्र
क्या है खबर?
केंद्र सरकार ने मंगलवार को संसद में बताया कि पिछले साल कृषि कानून पारित किए जाने से पहले हरियाणा, पंजाब, बिहार और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्रियों की राय ली गई थी।
सरकार ने यह भी कहा कि 10 राज्यों के मंत्री 2010 में बनी उस समिति के सदस्य थे, जिसने यह सिफारिश की थी कि कृषि उपज विपणन समितियों (APMC) और कॉर्पोरेट लाइसेंस धारकों को एकाधिकार की छूट नहीं होनी चाहिए।
आइये, पूरी खबर जानते हैं।
जानकारी
हरसिमरत कौर बादल ने पूछा था सवाल
हरसिमरत कौर बादल ने सवाल किया था कि 2017-20 के बीच जब कृषि कानूनों के लिए राय-मशविरा किया जा रहा था, तब क्या पंजाब सरकार ने आपत्ति जताई थी और क्या इन कानूनों के लिए अपनी सहमति दी थी?
HT के अनुसार, इसके जवाब में कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि अंतरराज्यीय और राज्य के भीतर कृषि उत्पादों के व्यापार पर कानूनी ढांचे के लिए मई, 2020 में पंजाब समेत कई राज्यों से राय ली गई थी।
जवाब
कृषि सुधार के लिए बनाई गईं कई समितियां- तोमर
तोमर ने कहा कि कृषि विपणन क्षेत्र में सुधार के लिए कई समितियों का गठन किया गया था। इनमें एक अधिकार प्राप्त समिति थी, जिसका गठन 2010 में किया गया और इसमें 10 राज्यों के मंत्री शामिल थे।
उन्होंने कहा कि इसके अलावा विपणन में सुधार के सुझाव देने के लिए भी एक वर्किंग ग्रुप बनाया गया। इसने सिफारिश दी कि कृषि उत्पादों के विपणन की आवाजाही, व्यापार, भंडारण, वित्त और निर्यात से सारी पाबंदियां हटाई जानी चाहिए।
कृषि कानून
पिछले साल मई में हुई थी अहम बैठक
तोमर ने अपने जवाब में आगे कहा कि समिति ने सिफारिश दी कि APMC या किसी कॉर्पोरेट लाइसेंस धारक का एकाधिकार नहीं होना चाहिए। कृषि उत्पादों के निर्बाध अंतरराज्यीय और राज्य के भीतर व्यापार पर कानूनी ढांचे पर प्रतिक्रिया मांगने के लिए मई, 2020 में केंद्र ने राज्यों के साथ बैठक की थी।
उन्होंने बताया कि पंजाब समेत कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने इस बैठक में भाग लिया था।
कृषि कानून
कृषि कानूनों का हो रहा है भारी विरोध
मोदी सरकार द्वारा बीते साल लाए गए कृषि कानूनों का भारी विरोध हो रहा है।
कानूनों पर तकरार के चलते हरसिमरत कौर बादल ने मोदी सरकार में मिला मंत्री पद छोड़ दिया था और उनकी पार्टी शिरोमणि अकाली दल भी भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से बाहर हो गई थी।
अकाली दल के अलावा कांग्रेस समेत लगभग सभी विपक्षी पार्टियां कृषि कानूनों का विरोध करते हुए इन्हें वापस लेने की मांग कर रही हैं।
कृषि कानून
किसान कर रहे हैं आंदोलन
मोदी सरकार कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए पिछले साल सितंबर में जो तीन कानून लाई थी, उनमें सरकारी मंडियों के बाहर खरीद के लिए व्यापारिक इलाके बनाने, अनुबंध खेती को मंजूरी देने और कई अनाजों और दालों की भंडारण सीमा खत्म करने समेत कई प्रावधान किए गए हैं।
पंजाब और हरियाणा समेत कई राज्यों के किसान इन कानूनों का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इनके जरिये सरकार मंडियों और MSP से छुटकारा पाना चाहती है।