
अब 'नमो ऐप' पर दे सकते हैं प्रधानमंत्री मोदी को फीडबैक
क्या है खबर?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर उनके कार्यकाल में एक भी प्रेस कॉन्फ्रेस न करने का आरोप बार-बार लगता रहता है। उनके विरोधी लगातार कहते रहे हैं कि प्रधानमंत्री सवालों से भागते हैं।
लेकिन इन सभी दावों के बीच मोदी अलग-अलग माध्यमों के जरिए जनता से सीधे जुड़ने का कोई मौका नहीं छोड़ते। उनका कार्यक्रम 'मन की बात' इसी की एक बानगी है।
अब प्रधानमंत्री ने एक ऐसा तरीका निकाला है जिससे वह जनता से सीधे फीडबैक ले सकेंगे।
सर्वे
नमो ऐप पर हो रहा सर्वे
प्रधानमंत्री मोदी ने 'नमो ऐप' पर लॉन्च एक सर्वेक्षण के जरिए विभिन्न मुद्दों पर जनता का फीडबैक मांगा है।
इस सर्वे में भाजपा सरकार के काम से लेकर स्थानीय नेताओं तक के बारे में लोगों का मूल्यांकन पूछा गया है।
सर्वे में लोगों से यह भी पूछा गया है कि क्या उनको लगता है महागठबंधन उनके क्षेत्र में काम कर पाएगा।
मोदी और भाजपा की यह कवायद आने वाले लोकसभा चुनाव को देखते हुए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
आपकी राय
कैसा लगा मोदी सरकार का काम?
सर्वे की शुरुआत में यूजर्स से सबसे पहले उनके राज्य और चुनावी क्षेत्र का नाम पूछा जाता है।
इसके बाद स्वास्थ्य, कृषि, भ्रष्टाचार मुक्त सरकार, स्वच्छ भारत, राष्ट्रीय सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, गरीब और शोषितों का उत्थान, रोजगार समेत कई अन्य मुद्दों पर मोदी सरकार के काम के बारे में उनकी राय ली जाती है।
यूजर्स को सवालों के जबाव 1 से 5 तक के स्केल पर देने हैं, जो 'बहुत बुरा' से 'अति उत्तम' तक जाता है।
फीडबैक
कौन सा मुद्दा है अहम?
सर्वे में यूजर्स से यह भी पूछा गया है कि वह वोट देते वक्त किस मुद्दे को ध्यान में रखते हैं।
विकल्प के तौर पर सफाई, रोजगार, शिक्षा, कानून व्यवस्था, मूल्य वृद्धि, भ्रष्टाचार और किसान कल्याण आदि मुद्दे दिए गए हैं।
आगे यूजर्स से उनके चुनावी क्षेत्र और राज्य में तीन सबसे लोकप्रिय भाजपा नेताओं ने नाम पूछे जाते हैं।
इसी तरह से क्षेत्र के सांसद और उसके कार्यों के बारे में भी लोगों का मूल्यांकन मांगा गया है।
अहम सर्वे
महागठबंधन पर भी सवाल
सर्वे के अंत में यूजर्स से यह पूछा गया है कि क्या महागठबंधन का उनके क्षेत्र में कोई प्रभाव पड़ेगा।
ये सवाल साबित करता है कि भाजपा हाईकमान क्षेत्रीय नेताओं के गठबंधन से चिंतित है।
भाजपा नेताओं की मानें तो यह सर्वे लोकसभा चुनाव के लिए मुद्दे तय करने में पार्टी के लिए बेहद सहायक सिद्ध होगा।
सर्वे का असर उम्मीदवारों के चयन पर भी पड़ सकता है। जिन नेताओं की रेटिंग अच्छी नहीं रहेगी, उनकी टिकट कट सकती है।