
अब सीधे परिजनों को सौंपा जाएगा कोरोना संदिग्ध शव, रिपोर्ट का नहीं करना होगा इंतजार
क्या है खबर?
अब देश में किसी भी कोरोना संदिग्ध की मौत के बाद उसके परिजनों को शव लेने के लिए अस्पताल के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। इसके अलावा शव मिलने में देरी के कारण शव बदलने की समस्या से भी छुटकाना मिल जाएगा।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना संदिग्ध मरीजों की मौत के बाद उनके शवों को अंतिम संस्कार के लिए उनके परिजनों को सौंपने के नियमों में बदलाव कर दिया है। अब शव सीधे परिजनों को सौंपा जा सकेगा।
जानकारी
देरी के कारण अस्पतालों में शवों की होने लगी थी अदला-बदली
बता दें कि कोरोना रिपोर्ट आने तक शव नहीं देने के नियम के कारण शव कई दिनों तक अस्पताल में पड़े रहते थे। इसके कारण शवों की अदला-बदली होना भी शुरू हो गया था। इसको लेकर परिजनों द्वारा कई बार विरोध भी जताया गया था।
आदेश
अंतिम संस्कार में करना होगा नियमों का पालन
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने ट्वीट कर लोगों को मंत्रालय की ओर से नियमों में किए गए बदलाव की जानकारी दी है।
मंत्रालय के संशोधित नियम के अनुसार अब किसी भी कोरोना संदिग्ध की मौत होने पर उसकी कोरोना की रिपोर्ट आने का इंतजार नहीं किया जाएगा और शव सीधे परिजनों को सौंप दिया जाएगा।
हालांकि, इस स्थिति में परिजनों को अंतिम संस्कार में सरकार की ओर से तय दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा।
नियम
यह है कोरोना संक्रमित के अंतिम संस्कार के नियम
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार यदि किसी कोरोना संक्रमित की मौत होती है तो अस्पताल के दक्ष कर्मचारी शव को सैनिटाइज करने के बाद पैक करेंगे।
अस्पताल की एंबुलेंस से शव को श्मशान या कब्रिस्तान पुहंचाया जाएगा और परिजनों की मौजूदगी में निगम या नगर निकाय के कर्मचारी बड़ी सुरक्षा के साथ उसका अंतिम संस्कार करेंगे।
शव को छूने, नहलाने की इजाजत नहीं होगी। अंतिम संस्कार में मौजूद लोगों को PPE किट पहननी होगी।
जानकारी
पहले रिपोर्ट आने तक नहीं दिया जाता था कोरोना संदिग्ध का शव
महामारी के प्रोटोकॉल के तहत अस्पताल में मृत मरीज का पहले कोरोना टेस्ट किया जाए, फिर शव परिजन को सौंपा जाए। बिना रिपोर्ट के परिजनों को शव सौंपने पर पाबंदी थी। ऐसे में लोगों को शव के लिए कई दिन इंतजार करना पड़ रहा था।
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दिल्ली में रिपोर्ट आने में देरी होने पर बदले शव
गत 7 जून को दिल्ली के लोक नायक अस्पताल में पटपड़गंज निवासी कलामुद्दीन को उसके पिता की जगह एजाजुद्दीन के भाई का शव दे दिया गया था।
दोनों शवों का नाम मोइनुद्दीन था और उनकी कोरोना की रिपोर्ट नहीं आने के कारण शव नहीं दिया गया था।
दो दिन बाद जब कलामुद्दीन शव लेने गया तो उसे दूसरा शव दे दिया गया और उसने उसे दफना भी दिया। बाद में एजाजुद्दीन के शव लेने जाने पर घटना का पता चला।
#2
आगरा में हुई शवों की अदला-बदली
आगरा के SN मेडिकल कॉलेज में 12 मई को शवों की अदला-बदली हो गई थी। इसमें हिंदू शख्स का शव मुस्लिम को और मुस्लिम शख्स का शव हिंदू परिवार को सौंप दिया गया था।
दरअसल, मुस्लिम शख्स की मौत 10 मई को और हिंदू शख्स की मौत 9 मई को हुई थी। कोरोना की रिपोर्ट के इंतजार में दोनों ही परिवारों को शव नहीं दिए गए। दो दिन बाद हिंदू परिवार को मुस्लिम शख्स का शव दे दिया गया।
#3
राजस्थान में भी हुई शवों की अदला-बदली
राजस्थान के अलवर जिले में भी रिपोर्ट में देरी के कारण शवों की अदला-बदली हुई थी।
गत पांच मई को पप्पूराम प्रजापत की सांस की तकलीफ के कारण मौत हो गई थी, लेकिन कोरोना की जांच रिपोर्ट के कारण शव परिजनों को नहीं सौंपा गया।
छह मई को जब परिजन शव लेने गए तो उन्हें किसी अन्य का शव थमा दिया। बाद में पता चला कि अस्पताल ने पप्पूराम का शव देहरादून निवासी किस अन्य परिवार को सौंप दिया है।
#4
रिपोर्ट के इंतजार में 18 दिन बाद मिला शव
कोरोना की रिपोर्ट के कारण लोगों को अपनो का शव लेने के लिए कई दिनों तक अस्पताल के चक्कर भी काटने पड़ रहे हैं।
दिल्ली के रोहिणी के खेरा खुर्द निवासी सूबे सिंह (65) की 25 अप्रैल को डॉ. बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर अस्पताल में मौत हो गई थी, लेकिन रिपोर्ट के इंतजार में करीब 18 दिन पर परिजनों को शव दिया गया था।
इसी तरह गुड़गांव में एक परिवार को नौ दिन बाद शव दिया गया था।
संक्रमण
भारत में यह है कोरोना संक्रमण की वर्तमान स्थिति
भारत में पिछले 24 घंटों में कोरोना वायरस के 11,502 नए मामले सामने आए और 325 मरीजों ने इसकी वजह से दम तोड़ा। ये एक दिन में मिले दूसरे सबसे अधिक नए मामले हैं।
इससे पहले कल रिकॉर्ड 11,929 नए मामले सामने आए थे। देश में तीन दिन से 11,000 से अधिक नए मामले आ रहे हैं।
इसी के साथ कुल मामलों की संख्या 3,32,424 हो गई है, वहीं 9,520 की मौत हुई है। सक्रिय मामलों की संख्या 1,53,106 है।