
यमुना एक्सप्रेस-वे: पिछले 7 साल में हुए 5,000 से अधिक हादसे, 883 लोगों की गई जान
क्या है खबर?
सोमवार को आगरा और ग्रेटर नोएडा को जोड़ने वाले यमुना एक्सप्रेस-वे पर हुए हादसे में 29 यात्रियों की मौत ने सड़क सुरक्षा की और एक बार फिर से ध्यान खींचा है।
अगर यमुना एक्सप्रेस-वे की ही बात करें तो ये इकलौता हादसा नहीं है और इससे पहले भी एक्सप्रेस-वे पर बड़े हादसे हो चुके हैं।
एक रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2012 से मई 2019 के बीच यमुना एक्सप्रेस-वे पर हुए सड़क हादसों में 883 लोगों की मौत हो चुकी है।
सड़क दुर्घटनाएं
दस हजार से ऊपर है हताहतों की संख्या
'न्यूज 18' के अनुसार, सेव लाइफ फाउंडेशन द्वारा डाली गई RTI के जवाब से ये जानकारी सामने आती है।
जवाब के अनुसार, अगस्त 2012 से मई 2019 के बीच 165 किलोमीटर लंबे यमुना एक्सप्रेस-वे पर कुल 5,738 दुर्घटनाएं हुईं।
इन दुर्घटनाओं में मरने और घायल होने वाले लोगों की संख्या 10,253 रही।
एक्सप्रेस-वे पर सबसे ज्यादा 1,658 दुर्घटनाएं 2016 में हुईं, जिसके बाद अप्रिय घटनाओं और हताहतों की संख्या में धीरे-धीरे कमी आई है।
कारण
ये रहे दुर्घटनाओं के सबसे बड़े कारण
केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (CRRI) के ट्रैफिक इंजीनियरिंग और सुरक्षा (TES) विभाग के अध्यक्ष सुभाष चंद के अनुसार, तेज रफ्तार में गाड़ी चलाना यमुना एक्सप्रेस-वे पर दुर्घटनाओं का सबसे बड़ा कारण है।
एक्सप्रेस-वे की डिजाइन और इसे लेकर बनाई गई छवि भी तेज रफ्तार से गाड़ी चलाने की मानसिकता को बढ़ाने में कारक साबित हुए हैं।
इसके अलावा ड्राइवरों का झपकी लेना और गाड़ी का टायर फटने के कारण भी कई दुर्घटनाएं हुईं हैं।
एत्मादपुर सड़क दुर्घटना
ड्राइवर के झपकी लेने के कारण हुई सोमवार को दुर्घटना
सोमवार को हुई सड़क दुर्घटना का कारण भी ड्राइवर के झपकी लेने और बस का नियंत्रण खोने को माना जा रहा है।
घटना सुबह 4 बजे के करीब एत्मादपुर थाना क्षेत्र में हुई।
आगरा से दिल्ली की तरफ आ रही ये बस अनियंत्रित होकर पुल से 50 फीट नीचे झरना नाले में गिर गई थी।
घटना में बस में सवार में 50 यात्रियों में 29 की मौत हो गई थी, जबकि कई यात्री गंभीर रूप से घायल हुए थे।
खामियां
स्पीड कैमरे की नहीं होती लगातार मॉनिटरिंग
चंद ने न्यूज 18 को बताया, "स्पीड कैमरे तो लगे हुए हैं, लेकिन मैं इसे लेकर आश्वस्त नहीं हूं कि कोई तेज रफ्तार गाड़ियों को नियमित तौर पर मॉनीटर करता है और लोगों में नजर रखे जाने का डर है।"
उन्होंने कहा कि ड्राइवरों में ये जागरूकता होनी चाहिए कि पुराने टायर वाले तेज रफ्तार वाहन इस एक्सप्रेस-वे के लिए उपयुक्त नहीं है।
उन्होंने पूरे एक्सप्रेस-वे पर केवल दो आराम बिंदु होने पर भी सवाल उठाए।
अध्ययन
दुर्घटनाएं रोकने के लिए IIT दिल्ली ने दी थी ये सलाहें
बता दें कि 2018 में IIT दिल्ली को भी यमुना एक्सप्रेस-वे पर दुर्घटनाओं के कारणों का अध्ययन करने को कहा गया था।
पिछले 5 सालों में हुई दुर्घटनाओं के अध्ययन के आधार पर IIT दिल्ली ने 'सेफ्टी ऑडिट ऑफ यमुना एक्सप्रेस-वे' नामक अपनी ये रिपोर्ट तैयार की थी।
इसमें डिवाइडरों में बदलाव, स्पीड कैमरे दोगुने करने, स्पीड ब्रेकर बढ़ाने, साइड लेन से साइन बोर्ड हटाने और अंडरपास को अनियमित स्टॉप बनने से रोकने का सुझाव दिया गया था।