
यूक्रेन से लौटे छात्रों ने दिल्ली में किया प्रदर्शन, भारतीय कॉलेजों में एडमिशन की मांग
क्या है खबर?
यूक्रेन में चल रहे युद्ध के कारण अपनी पढ़ाई बीच में छोड़कर भारत वापस लौटे छात्रों ने आज यानि रविवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया।
यूक्रेन में पड़ रहे इन छात्रों के भविष्य पर खतरा मंडरा रहा है और इस कारण ये छात्र आंदोलन करने के लिए सड़कों पर उतर आएं हैं।
छात्रों और उनके अभिभावकों ने केंद्र सरकार से देश के विश्वविद्यालयों में उनकी पढ़ाई पूरी करने की व्यवस्था करने का आग्रह किया।
करियर
'जैसे जान बचाई, वैसे ही करियर बचाए मोदी सरकार'
यूक्रेन से लौटे छात्रों के अभिभावकों का कहना है कि सरकार को उनके बच्चों के करियर को उसी तरह बचाना चाहिए जैसे उन्होंने बच्चों की जान बचाई और उन्हें यूक्रेन से वापस लाए।
हिंदुस्तान टाइम्स से बात करते हुए खारकीव नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में MBBS के चौथे वर्ष की पढ़ाई कर रहे छात्र अर्जुन बातिश के पिता हरीश कुमार ने कहा, "हम केंद्र से हमारे बच्चों के शैक्षणिक भविष्य पर आगे निर्णय लेने का आग्रह करते हैं।"
पृष्ठभूमि
छात्रों को करना पड़ रहा अनिश्चित भविष्य का सामना
बता दें कि 20,000 से अधिक भारतीय छात्र, जो स्नातक चिकित्सा पाठ्यक्रम यानि MBBS करने के लिए यूक्रेन गए थे, अब वे अनिश्चित भविष्य का सामना कर रहे हैं।
24 फरवरी को यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद कीव, खारकीव और सूमी जैसे अलग-अलग शहरों में फंसे हुए भारतीय छात्रों को देश वापस लाया गया था।
मोदी सरकार ऑपरेशन गंगा के तहत उन छात्रों को भारत वापस लाई थी।
इजाजत
यूक्रेन से लौटे MBBS छात्रों को भारत में इंटर्नशिप करने की इजाजत मिली
बता दें कि 4 मार्च को नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने एक परिपत्र जारी कर विदेशों में MBBS की पढ़ाई करने वाले छात्रों को भारत में ही अपनी एक साल की इंटर्नशिप पूरी करने की इजाजत दी थी। इसका सबसे बड़ा लाभ यूक्रेन से लौटे छात्रों को मिलेगा।
हालांकि, ऐसे छात्र जो अभी MBBS के पहले, दूसरे, तीसरे या चौथे साल की पढ़ाई कर रहे हैं, उन्हें ऐसा कोई विकल्प नहीं मिलेगा।
भविष्य
छात्रों के भविष्य को लेकर भारत चिंतित- जयशंकर
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने लोकसभा में यूक्रेन की स्थिति पर हुई चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए कहा था कि भारत सरकार यूक्रेन से पढ़ाई बीच में छोड़कर लौटे छात्रों के भविष्य को लेकर चिंतित है।
उन्होंने कहा, "उनका कोर्स पूरा हो सके, इस लिहाज से हंगरी, पोलैंड, रुमानिया, चेक गणराज्य और कजाकिस्तान जैसे देशों के साथ संपर्क में हैं। यूक्रेन सरकार ने फैसला लिया है कि छात्रों के लिए मेडिकल पढ़ाई पूरी करने के संदर्भ में छूट दी जाएगी।"
न्यूजबाइट्स प्लस
MBBS की पढ़ाई के लिए यूक्रेन क्यों जाते हैं भारतीय छात्र?
भारत के निजी संस्थानों में MBBS की पढ़ाई के लिए सालाना 10 से 12 लाख रुपये फीस ली जाती है। इस हिसाब से पांच साल में पढ़ाई पूरी होने तक एक छात्र को 50 से 60 लाख रुपए तक फीस चुकानी पड़ती है।
वहीं यूक्रेन में MBBS की पढ़ाई के लिए सालाना चार से पांच लाख रुपए की जरूरत होती है, यानी पांच साल की पढ़ाई पूरी करने का कुल खर्च 25 से 30 लाख ही होता है।