
मध्य प्रदेश: पहली से 5वीं तक के छात्रों के लिए अब नहीं लगेंगी ऑनलाइन क्लासेस
क्या है खबर?
मध्य प्रदेश में पहली से 5वीं तक के छात्रों के लिए ऑनलाइन क्लासेस पर प्रतिबंध लग गया है। इसके साथ ही 6वीं से 8वीं तक के लिए होने वाली क्लासेस का समय तय कर दिया गया है और प्रत्येक सेशन के लिए अवधि निर्धारित कर दी गई है।
सरकार की तरफ से जारी की गई आधिकारिक अधिसूचना के माध्यम से यह जानकारी दी गई है।
कोरोना वायरस के कारण लागू लॉकडाउन की वजह से ऑनलाइन क्लासेस लग रही हैं।
कारण
सुविधा न होने के कारण छात्रों की पढ़ाई का हो रहा नुकसान
अधिसूचना में कहा गया है कि कई छात्रों के पास आनलाइन क्लासेस के लिए सुविधाएं जैसे डिजिटल डिवाइस और इंटरनेट आदि न होने के कारण वे इन क्लासेस का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं और उनकी पढ़ाई की नुकसान हो रहा है।
शिक्षा विभाग को कई अभिभावकों और छात्रों से इस प्रकार की शिकायतें मिली हैं। उसके बाद ही प्राइमरी क्लास के छात्रों के लिए ऑनलाइन क्लासेस बंद करने का निर्णय लिया गया है।
असर
छात्रों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा असर
इसके अलावा घंटो तक मोबाइल और लैपटॉप से ऑनलाइन क्लासेस लेने के कारण बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव पड़ रहा है।
प्रदेश की सरकार के अनुसार विशेषज्ञों ने बताया है कि मोबाइल फोन के जरिए लगातार कई घंटो तक ऑनलाइन पढ़ाई करना उनके स्वास्थ्य के साथ-साथ उनके सीखने की प्रक्रिया के लिए भी नुकसानदायक है।
इन सभी बातों को देखते हुए सरकार ने यह फैसला लिया है।
सेशन
इतने मिनट से ज्यादा का नहीं होना चाहिए सेशन
सरकार ने स्कूलों को ऑनलाइन शिक्षा के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) द्वारा बनाए गए दिशा-निर्देश सेफ 'ऑनलाइन लर्निंग इन टाइम्स ऑफ कोविड-19' का पालन करने के लिए भी कहा है।
इसके साथ ही सभी स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि प्रत्येक सेशन की अवधि 40-45 मिनट से ज्यादा की नहीं होनी चाहिए।
बता दें कि कोरोना वायरस संक्रमण के कारण मध्य मार्च से सभी स्कूल बंद है।
कर्नाटक
कर्नाटक में भी लगी रोक
मध्य प्रदेश के अलावा कर्नाटक में भी केजी से 5वीं तक के लिए होने वाली ऑनलाइन क्लासेस पर रोक लग गई है।
खबरों के अनुसार राज्य के प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग को अभिभावकों द्वारा शिकायतें मिलीं थी कि कुछ स्कूल प्राथमिक क्लासेस के छात्रों को ऑनलाइन पढ़ा रहे हैं।
इसके साथ ही अभिभावकों ने ऑनलाइन शिक्षा के नाम पर हो रही फीस वसूली को भी बंद करने की मांग की है।