
#NewsBytesExplainer: कौन हैं माइक पेंस, जो राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी के लिए ट्रंप को चुनौती देंगे?
क्या है खबर?
अमेरिका के पूर्व उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने आज आधिकारिक तौर पर 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में उतरने का ऐलान किया। इससे पहले वे 5 मई को चुनाव से जुड़ी सारी कागजी कार्यवाही पूरी कर चुके हैं।
वे रिपब्लिकन पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद के लिए दावेदारी कर रहे हैं और उनकी टक्कर पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से होना तय है। ट्रंप के कार्यकाल में ही पेंस उपराष्ट्रपति रहे थे।
आइए पेंस के बारे में विस्तार से जानते हैं।
कौन
माइक पेंस ने की है कानून की पढ़ाई
7 जून, 1959 को जन्मे पेंस आज अपना 64वां जन्मदिन मना रहे हैं। वे 2016 से 2020 तक अमेरिका के 48वें उपराष्ट्रपति रहे।
इससे पहले 2013 से 2017 तक वे इंडियाना राज्य के गवर्नर रहे थे। उन्होंने कानून की पढ़ाई की है और कुछ साल प्रैक्टिस के बाद राजनीति में उतरने का फैसला किया।
1988 और 1990 में हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव (अमेरिकी संसद के निचले सदन) के चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
होस्ट
रेडियो और टीवी शो के होस्ट रहे हैं पेंस
चुनावों में हार के बाद पेंस ने रेडियो और टीवी होस्ट के तौर पर काम करना शुरू किया।
साल 2000 में आखिरकार उन्हें राजनीतिक करियर की पहली जीत मिली और वे अमेरिकी कांग्रेस के सदस्य बन गए। 2013 तक वे इसके सदस्य रहे।
इस दौरान उन्होंने 2005 से 2007 तक रिपब्लिकन स्टडी समिति की अध्यक्षता की। वे हाउस रिपब्लिकन कॉन्फ्रेंस के भी अध्यक्ष रहे।
2013 में उन्होंने इंडियाना के गवर्नर पद का चुनाव जीता।
रुढ़ीवादी
कट्टर रूढ़िवादी माने जाते हैं पेंस
पेंस की छवि मुख्य तौर पर कट्टर रिपब्लिकन नेता की है। उन्होंने लंबे समय तक गर्भपात के अधिकार का विरोध किया था।
धार्मिक स्वतंत्रता, LGBTQ अधिकार और पर्यावरण जैसे मुद्दों पर भी उनका नजरिया रूढ़िवादी रहा है। पेंस कोयला उद्योग के हिमायती रहे हैं। उनके गवर्नर रहते हुए इंडियाना ने कार्बन उत्सर्जन कम करने के क्लीन पावर प्लान को मानने से इनकार कर दिया था।
वे गर्भपात और LGBTQ के खिलाफ कानून भी लेकर आए थे।
मजबूती
क्या है पेंस का मजबूत पक्ष?
पेंस को ईसाई रुढ़िवादियों का बड़े पैमाने पर समर्थन प्राप्त है। पिछले राष्ट्रपति चुनावों के दौरान किए गए सर्वे में लोगों ने पेंस को सबसे धार्मिक नेता माना था और चुनावों में ये पेंस का मजबूत पक्ष भी है।
पेंस के पास अनुभव की कमी नहीं है। वे उपराष्ट्रपति से लेकर कई बड़ी प्रशासनिक भूमिकाएं निभा चुके हैं। बतौर रेडियो होस्ट उनके पास डिबेट करने का अच्छा खासा अनुभव भी है, जो राष्ट्रपति की रेस में काम आ सकता है।
कमजोरी
क्या हैं पेंस का कमजोर पक्ष?
पेंस को जिन ईसाई रूढ़िवादियों का समर्थन प्राप्त है, उनके वोटों के लिए कई और दावेदार भी लाइन में हैं। इनमें रॉन डिसांटिस भी शामिल हैं, जिनकी छवि भी रूढ़िवादियों के बीच पेंस जैसी ही है।
डिसांटिस का गर्वनर रहते हुए परमिट के बिना हथियार खरीदने की अनुमति देना और राज्य में गर्भपात पर प्रतिबंध लगाना उनकी उपलब्धि रहा है। इस वजह से भी पेंस को मिलने वाले वोट बंट सकते हैं।
दूरी
ट्रंप और पेंस के बीच क्यों आई दूरी?
पेंस को ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान उनका सबसे वफादार माना जाता था, लेकिन जनवरी, 2021 में अमेरिकी संसद पर ट्रंप समर्थकों के हमले के बाद दोनों में दूरी आ गई थी।
दरअसल, ट्रंप ने पेंस पर चुनाव परिणामों को पलटने का भारी दबाव बनाया था। हालांकि, पेंस ने ऐसा करने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद ट्रंप समर्थकों ने पेंस को जान से मारने की धमकी दी थी।
पार्टी
रिपब्लिकन पार्टी की ओर से कौन-कौन मैदान में?
रिपब्लिकन पार्टी की ओर से अब तक ट्रंप समेत 4 नेताओं ने 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के लिए दावेदारी पेश की है।
इनमें पेंस के अलावा फ्लोरिडा के गवर्नर रॉन डिसेंटिस और दक्षिण कैरौलिना की 2 बार गवर्नर रहीं भारतीय मूल की निक्की हेली शामिल हैं। हेली संयुक्त राष्ट्र (UN) में अमेरिका की पूर्व राजदूत भी रह चुकी हैं।
ट्रंप को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनने के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार से पहले इन नेताओं से जीतना होगा।