
#NewsBytesExplainer: क्या है इजरायल की गाजावासियों को मिस्र भगाने की योजना, जिसका विकिलीक्स में हुआ खुलासा?
क्या है खबर?
इजरायल-हमास युद्ध के बीच एक लीक दस्तावेज ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है।
इस दस्तावेज के अनुसार, इजरायल की गाजावासियों को मिस्र के सिनाई इलाके में भेजने की योजना है।
विकिलीक्स ने सोशल मीडिया वेबसाइट एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि हमास के हमले के बाद इजरायल के खुफिया मंत्रालय ने 10 पन्नों का ये गुप्त दस्तावेज तैयार किया था।
आइए जानते हैं कि गुप्त दस्तावेज का ये पूरा मामला क्या है।
रिपोर्ट्स
क्या है इजरायल की योजना?
NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल के लीक दस्तावेज में गाजा पट्टी में रह रहे फिलिस्तीनियों को मिस्र के सिनाई इलाके में भेजने की बात कही गई है।
दस्तावेज में लिखा है कि गाजा पर जमीनी अभियान शुरू करने से पहले उत्तरी गाजावासियों को दक्षिणी गाजा जाने का निर्देश दिया जाना चाहिए। इजरायल ने ऐसा किया भी है।
रिपोर्ट के अनुसार, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सहमति के बिना ऐसी गुप्त योजना नहीं बनाई जा सकती।
दस्तावेज
गाजावासियों को मिस्र कैसे भेजेगा इजरायल?
दस्तावेज में आगे कहा गया है कि इजरायली सैन्य अभियान उत्तरी गाजा से शुरू होकर दक्षिणी गाजा की ओर बढ़ेगा और इस दौरान मिस्र की राफा क्रॉसिंग को खाली रखा जाएगा, ताकि लोग वहां जा सकें।
ऐसा करके मिस्र के सिनाई क्षेत्र में विस्थापित फिलिस्तीनियों के राहत कैंप और बस्तियां स्थापित की जाएंगी।
ये गुप्त दस्तावेज पहली बार एक हिब्रू वेबसाइट मेकोमिट पर दिखाई दिया। इसमें दावा किया गया है कि इसे इजरायल के खुफिया मंत्रालय ने सत्यापित किया है।
जमीनी हालत
जमीना हालत दस्तावेज में बताई गई योजना पर क्या कहते हैं?
अभी तक के युद्ध से लगता है कि इजरायल उत्तरी और दक्षिणी गाजा को विभाजित करके पूरी फिलिस्तीनी आबादी को दक्षिणी गाजा तक सीमित करना चाहती है क्योंकि उत्तरी क्षेत्र वह जगह है, जहां हमास के प्रमुख केंद्र हैं।
इजरायली बलों ने उत्तरी गाजा की 11 लाख आबादी में से लगभग 8 लाख लोगों को दक्षिणी गाजा में जाने के लिए मजबूर कर दिया है, जिससे लगता है कि नेतन्याहू की 'सिनाई योजना' धीरे-धीरे लागू हो रही है।
बयान
इजरायल और मिस्र ने दस्तावेज पर क्या कहा?
इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू के कार्यालय ने कहा कि ये गुप्त दस्तावेज एक काल्पनिक अभ्यास और एक अवधारणा पत्र है।
हालांकि, ये दस्तावेज सामने आने के बाद फिलिस्तीन और मिस्र की सरकारों ने इजरायल की कड़ी आलोचना की है।
मिस्र को लगता है कि इजरायल गाजा की समस्या को मिस्र की समस्या बनाने की योजना बना रहा है और इतनी बड़ी विस्थापित आबादी के मिस्र में प्रवेश के बाद उसके यहां समस्याएं पैदा जरूर होंगी।
फिलीस्तीन
फिलिस्तीन ने दस्तावेज को लेकर क्या प्रतिक्रिया दी?
रिपोर्ट के अनुसार, फिलिस्तीन की सरकार को लगता है कि इस तरह की योजना के जरिए इजरायल पूरी गाजा पट्टी पर कब्जा कर फिलिस्तीनियों को वहां से खदेड़ना चाहता है।
फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास के प्रवक्ता नबील अबू रुदैनेह ने कहा, "हम फिलिस्तीनियों को इस तरह कहीं भी भेजने के खिलाफ हैं। अगर ऐसी कोशिश की गई तो ऐसा नहीं होने दिया जाएगा।"
उन्होंने कहा, "जो 1948 में हुआ, उसे नहीं दोहराने दिया जाएगा।"
इतिहास
1948 में क्या हुआ था?
1948 में इजरायल के गठन के बाद पहले युद्ध के दौरान लगभग 7 लाख फिलिस्तीनियों को अपने घरों को छोड़कर भागना पड़ा था। फिलिस्तीन में इसे 'नकबा' अर्थात तबाही के नाम से जाना जाता है।
तब फिलिस्तीनियों ने इस उम्मीद में युद्ध के दौरान अपने घरों को छोड़ दिया कि जब शांति होगी तो वे वापस लौट आएंगे, लेकिन आज तक वे वापस नहीं लौट पाए हैं।
इजरायल ने उन्हें कभी भी वापस लौटने की इजाजत नहीं दी।
जानकारी
60 लाख फिलिस्तानी शरणार्थी शिविरों में रहने को मजबूर
इसके बाद से करीब 60 लाख फिलस्तीनी वेस्ट बैंक के अलावा लेबनान, सीरिया और जॉर्डन में शरणार्थी शिविरों में रह रहे हैं। गाजा के अधिकांश निवासी भी फिलिस्तीनी शरणार्थी हैं, जो वर्तमान इजरायल के सीमावर्ती क्षेत्रों से भागकर गाजा पहुंचे थे।
प्लस
न्यूजबाइट्स प्लस
7 अक्टूबर को शुरू हुए इजरायल और हमास के युद्ध में अब तक 10,063 लोगों की मौत हो चुकी है।
इजरायल के 1,538 लोग मारे गए हैं और 5,431 घायल हुए हैं। दूसरी ओर इजरायल के हमलों में गाजा पट्टी के 8,525 लोग मारे गए हैं और 21,543 से अधिक घायल हुए हैं।
हमास ने इजरायल के 224 नागरिकों को अभी भी बंधक बना रखा है, जिन्हें छुड़ाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है।