
कई देशों में दर्ज हुए मंकीपॉक्स के मामले, ब्रिटेन ने समलैंगिकों को चेताया
क्या है खबर?
कोरोना वायरस महामारी के प्रभाव से बाहर निकल रही दुनिया के सामने एक और बीमारी चुनौती पैदा कर रही है।
दरअसल, पिछले कुछ दिनों में यूरोप और उत्तरी अमेरिकी के कई देशों में मंकीपॉक्स के दर्जनों मामले दर्ज किए गए हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का कहना है कि वह इस नई बीमारी को लेकर स्वास्थ्य अधिकारियों के संपर्क में है।
वहीं ब्रिटेन ने गे और बाइसेक्सुअल लोगों को खासतौर पर इस वायरस से सावधान रहने को कहा है।
जानकारी
क्या है मंकीपॉक्स?
मंकीपॉक्स एक जूनोटिक (एक प्रजाति से दूसरी प्रजाति में फैलने वाली) बीमारी है। ये बीमारी मंकीपॉक्स वायरस से संक्रमण के कारण होती है जो पॉक्सविरिडाइ फैमिली के ऑर्थोपॉक्सवायरस जीनस से आता है।
ऑर्थोपॉक्सवायरस जीनस में चेचक (स्मालपॉक्स) और काउपॉक्स बीमारी फैलाने वाले वायरस भी आते हैं।
मंकीपॉक्स वायरस का सबसे पहले 1958 में पता चला था। तब रिसर्च के लिए तैयार की गईं बंदरों की बस्तियों में इस वायरस के कारण पॉक्स जैसी बीमारी देखी गई थी।
संक्रमण का प्रसार
किन-किन देशों में सामने आए मंकीपॉक्स के मामले?
यूरोप के कई हिस्सों में यह बीमारी तेजी से फैल रही है। स्पेन की राजधानी मैड्रिड में सात लोगों में इस बीमारी की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 22 लोग संदिग्ध मरीज माने जा रहे हैं।
पुर्तगाल में इसके 14 और स्वीडन में एक मामले की पुष्टि हो चुकी है। इसी तरह इटली में गुरुवार को इस बीमारी का पहला मामला सामने आया।
ब्रिटेन ने अभी तक मंकीपॉक्स के नौ मामले दर्ज हो चुके हैं।
मंकीपॉक्स
कनाडा में मिले एक दर्जन से ज्यादा संदिग्ध मरीज
गुरुवार को कनाडा ने बताया कि मंकीपॉक्स के एक दर्जन से अधिक संदिग्ध मरीजों की जांच कर रहा है। इससे पहले अमेरिका में भी एक व्यक्ति को मंकीपॉक्स से संक्रमित पाया गया था।
अमेरिकी रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (CDC) के अनुसार, 2017 में नाइजीरिया में मंकीपॉक्स का मामला सामने आने से 40 साल पहले तक इसका कोई मामला दर्ज नहीं हुआ था। यानी 2017 में 40 साल बाद इसका मामला सामने आया था।
चेतावनी
ब्रिटेन ने गे और बाइसेक्सुअल लोगों को चेताया
ब्रिटेन की स्वास्थ्य सुरक्षा एजेंसी ने गे और बाइसेक्सुअल लोगों को इस वायरस के प्रति खासतौर पर सचेत रहने और किसी भी असाधारण लक्षण दिखने की सूरत में डॉक्टर से संपर्क करने को कहा है।
एजेंसी ने कहा है कि हालिया समय में मंकीपॉक्स के जो मामले सामने आए हैं, उनमें से अधिकतर गे और बाइसेक्सुअल लोगों में दर्ज किए गए हैं।
बता दें कि यह वायरस करीबी संपर्क में रहे लोगों के बीच तेजी से फैलता है।
प्रसार
कैसे फैलता है मंकीपॉक्स वायरस?
मंकीपॉक्स वायरस से संक्रमित किसी जानवर या इंसान के संपर्क में आने पर कोई भी व्यक्ति इस वायरस से संक्रमित हो सकता है। ये वायरस टूटी त्वचा, सांस और मुंह के जरिए शरीर में प्रवेश करता है।
ये वायरस एक इंसान से दूसरे इंसान में भी फैल सकता है। छींक या खांसी के दौरान निकलने वाली बड़ी श्वसन बूंदों से ये प्रसार होता है। संक्रमित व्यक्ति की किसी चीज से संपर्क में आने पर भी ये वायरस फैल सकता है।
लक्षण
क्या हैं मंकीपॉक्स से संक्रमण के लक्षण?
इंसानों में मंकीपॉक्स से संक्रमण के लक्षण चेचक जैसे ही हैं, हालांकि ये थोड़े हल्के होते हैं।
बीमारी की शुरूआत बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों और पीठ में दर्द, थकावट और ठंड लगने से होती है। लक्षण दिखने के एक से तीन दिन के अंदर पीड़ित के दाने होने लगते हैं।
सबसे पहले उसके चेहरे पर दाने होते हैं और फिर वो पूरे शरीर पर फैल जाते हैं। दो से चार हफ्ते बाद ये बीमारी ठीक हो जाती है।
ऐहतियात और इलाज
क्या है मंकीपॉक्स का इलाज और इससे कैसे बचें?
अभी तक मंकीपॉक्स का कोई भी प्रमाणित उपचार नहीं है। हालांकि, CDC के अनुसार, चेचक की वैक्सीन, एंटीवायरल दवाओं और चेचक की एंटीबॉडीज (वैक्सिनिया इम्यून ग्लोबुलिन) की मदद से इसे रोका जा सकता है।
स्टडीज में पाया गया है कि चेचक की वैक्सिनिया वैक्सीन मंकीपॉक्स को रोकने में 85 प्रतिशत तक प्रभावी है।
बचाव की बात करें तो संक्रमित व्यक्ति या जानवर से दूर रहकर इस बीमारी से बचा जा सकता है।