
यूजर्स डाटा से कमाई करते हैं व्हाट्सऐप और फेसबुक, सरकार ने हाई कोर्ट में दी दलील
क्या है खबर?
भारत सरकार ने बीते दिनों लागू किए गए IT रूल्स से जुड़ी सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट में अपना पक्ष रखा।
दरअसल, IT गाइडलाइन्स में मांग की गई है कि जरूरी होने पर व्हाट्सऐप सबसे पहले कोई मेसेज भेजने वाले यूजर्स की जानकारी दे।
हालांकि, व्हाट्सऐप इसे यूजर्स की प्राइवेसी का उल्लंघन मान रही है और एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन से समझौता करने को तैयार नहीं है।
सरकार साइबर स्पेस को सुरक्षित रखने के लिए नई गाइडलाइन्स को जरूरी बता रही है।
जरूरत
सरकार ने सेक्शन 87 को बताया जरूरी
केंद्र सरकार ने कहा कि इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी ऐक्ट का सेक्शन 87 नई गाइडलाइन्स का रूल 4(2) तय करता है, जिसके साथ सोशल मीडिया कंपनियों को किसी मेसेज का फर्स्ट ओरिजनेटर बताना होता है।
सरकार का कहना है कि इस नियम के साथ जरूरत पड़ने पर फेक न्यूज रोकने या राष्ट्रीय सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने वाले मेसेजेस का पता लगाने जैसे काम किए जा सकेंगे और नागरिकों की सुरक्षा तय की जा सकेगी।
व्हाट्सऐप
क्या है व्हाट्सऐप का पक्ष?
प्लेटफॉर्म का कहना है कि मेसेज ट्रेसिंग करने के लिए कंपनी को एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन खत्म करना होगा, जो प्राइवेसी के लिए खतरा हो सकता है।
व्हाट्सऐप का कहना है कि करोड़ों यूजर्स इसका इस्तेमाल प्राइवेट और सुरक्षित तरीके से अपने फ्री स्पीच और निजता के अधिकार के तहत मेसेजिंग के लिए करते हैं।
याचिका के मुताबिक, व्हाट्सऐप का इस्तेमाल सरकारी अधिकारी, पत्रकार, धार्मिक संस्थान और अलग-अलग सेक्टर्स से जुड़े ऐसे यूजर्स करते हैं, जिनके लिए उनकी प्राइवेसी महत्वपूर्ण है।
प्राइवेसी
यूजर्स प्राइवेसी पर सरकार को भरोसा नहीं
व्हाट्सऐप का कहना है कि वह यूजर्स प्राइवेसी बनाए रखने के लिए किसी मेसेज के ओरिजनेटर की जानकारी नहीं दे सकता और नए नियमों का पालन करने के लिए उसे एंड-टू-एंड एनक्रिप्शम खत्म करना होगा।
इसके जवाब में सरकार ने कहा कि प्लेटफॉर्म यूजर्स की जानकारी मॉनिटाइज करता है और बिजनेस या कॉमर्शियल फायदे के लिए इस्तेमाल करता है, ऐसे में उसे यूजर्स को प्राइवेसी देने का दावा नहीं करना चाहिए।
डाटा
एफिडेविट में कही डाटा इस्तेमाल करने की बात
मिनिस्ट्री ऑफ इन्फॉर्मेशन एंड टेक्नोलॉजी की ओर से फाइल किए गए एफिडेविट में कहा गया है, "याचिकाकर्ता (व्हाट्सऐप और फेसबुक) की कमाई का इकलौता जरिया यूजर्स के डाटा की माइनिंग और स्टोरिंग है, जिसे दुनियाभर से जुटाने के बाद उसका मॉनिटाइजेशन किया जाता है। इस तरह ये कंपनियां प्लेटफॉर्म इस्तेमाल कर रहे यूजर्स के डाटा का प्रोटेक्टर होने का दावा नहीं पेश कर सकतीं।"
इसमें कहा गया है कि व्हाट्सऐप यूजर्स डाटा फेसबुक के साथ शेयर करता है।
बहाना
केंद्र ने व्हाट्सऐप पर लगाया बहाना करने का आरोप
केंद्र सरकार का कहना है कि व्हाट्सऐप तकनीकी दिक्कतों का बहाना करते हुए मेसेज के फर्स्ट ओरिजनेटर की जानकारी देने से बचना चाहता है।
सरकार का सुझाव है कि अगर व्हाट्सऐप को एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन खत्म किए बिना मेसेज के फर्स्ट ओरिजनेटर का पता लगाना है तो इसके लिए खास मैकेनिज्म तैयार करना चाहिए।
वहीं, व्हाट्सऐप की मानें तो ऐसा संभव नहीं है और एनक्रिप्शन से कोई समझौता नहीं किया जा सकता है।
ओपीनियन
क्या खत्म किया जा सकता है एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन?
केंद्र सरकार को भेजे गए नोटिस को लेकर पॉलिसी थिंक टैंक 'द डायलॉग' के फाउंडर काजिम रिजवी ने प्रतिक्रिया दी और मामले से जुड़े पहलुओं का जिक्र किया।
काजिम ने कहा, "नियम 4(2) के मुताबिक, पुलिस से वारंट मिलने की स्थिति में ऐप को ओरिजनल मेसेज भेजने वाले का नाम बताना होगा, जबकि एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन के चलते ऐसा संभव नहीं है। नए नियमों से जुड़े बदलाव नागरिकों की निजता के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी परेशानी बन सकते हैं।"