
#NewsBytesExplainer: तमिलनाडु में फिर भाजपा-AIADMK गठबंधन की क्यों लग रही अटकलें? जानें समीकरण और चुनौतियां
क्या है खबर?
तमिलनाडु में अगले साल विधानसभा चुनाव होना है। इससे पहले सत्तारूढ़ द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (DMK) भाषा विवाद और परिसीमन को मुद्दा बना रही है।
वहीं, ऑल इंडिया द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (AIADMK) के महासचिव के पलानीस्वामी ने दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की है।
इस मुलाकात के बाद अटकलें लग रही हैं कि क्या तमिलनाडु में एक बार फिर AIADMK और भाजपा के बीच गठबंधन हो सकता है।
आइए सारी संभावनाओं को जानते हैं।
बयान
शाह से मुलाकात के बाद पलानीस्वामी ने क्या कहा?
पलानीस्वामी ने कहा कि गठबंधन पर कोई भी फैसला चुनावों के करीब आने पर लिया जाएगा।
उन्होंने कहा, "यह राजनीति है, राजनीतिक स्थिति के अनुसार बदलाव होते रहेंगे। हम अभी कैसे बता सकते हैं? 2019 के चुनाव के समय हमने कब गठबंधन किया था? फरवरी में हमने घोषणा की थी। इसी तरह, हम समान विचारधारा वाले दलों से बात करेंगे और चुनाव नजदीक आने पर गठबंधन पर फैसला लेंगे।"
शर्तें
AIADMK ने गठबंधन के लिए रखी कुछ शर्तें
रिपोर्ट्स के मुताबिक, AIADMK ने भाजपा से गठबंधन के लिए कुछ शर्तें रखी हैं।
कथित तौर पर AIADMK ने कहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव में गठबंधन का नेतृत्व वो करेगी।
इसके अलावा पार्टी ने तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष अन्नामलाई की भूमिका को कम करने की बात भी कही है।
दरअसल, माना जाता है कि अन्नामलाई के प्रयासों से भाजपा ने तमिलनाडु के कई इलाकों में अपना जनाधार बढ़ाया है।
सीटें
गठबंधन हुआ तो किसी मिल सकती हैं कितनी सीटें?
अगर गठबंधन होता है तो NDA को 6 पार्टियों में सीट बंटवारा करना होगा।
बीते विधानसभा चुनाव में NDA में पहले से पट्टाली मक्कल काची (PMK), तमिल मनीला कांग्रेस (मूपनार), अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम (AMMK) और कुछ अन्य पार्टियां शामिल थीं।
2021 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में AIADMK ने 179 और भाजपा ने 20 सीटों पर चुनाव लड़ा था। वहीं, PMK को 23, TMC(M) को 6 और बाकी सहयोगी पार्टियों को एक-एक सीट मिली थी।
भाजपा
AIADMK के बगैर चुनाव लड़ने पर भाजपा को फायदा
2024 में भाजपा ने AIADMK के बगैर चुनाव लड़ा। तब पार्टी को 11.24 प्रतिशत वोट मिले, जबकि 2019 में AIADMK के साथ चुनाव लड़ने पर 3.62 प्रतिशत वोट हासिल हुए थे।
भाजपा ने 9 लोकसभा सीटों पर AIADMK को तीसरे नंबर पर धकेल दिया और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने कुल 13 सीटों पर AIADMK को पीछे छोड़ दिया।
वहीं, पलानीस्वामी के नेतृत्व में AIADMK को 20.46 प्रतिशत वोट मिले, जबकि पिछले चुनाव में 19.39 प्रतिशत वोट मिले थे।
पेंच
गठबंधन को लेकर क्या है पेंच?
खबर है कि पलानीस्वामी ने अन्नामलाई की भूमिका कम करने की मांग की है, लेकिन भाजपा का इस पर सहमत होना मुश्किल है। अगर ऐसा नहीं होता है तो गठबंधन में मुश्किलें आ सकती हैं।
हाल ही में अन्नामलाई ने कहा था कि जो पार्टियां हमें अछूत मानती हैं, अब भाजपा की बढ़ती ताकत के कारण गठबंधन करना चाह रही हैं। अन्नामलाई ने किसी का नाम तो नहीं लिया था, मगर इसे पलानीस्वामी से जोड़कर देखा गया था।
AIADMK
AIADMK क्यों करना चाहती है गठबंधन?
जयललिता के निधन के बाद AIADMK अंदरूनी कलह से जूझ रही है। ऐसे में उसे सहयोगी की तलाश है।
हालांकि, AIADMK के पास केवल भाजपा के साथ ही जाने का विकल्प है। भाजपा के साथ परेशानी है कि उसे तमिलनाडु में उत्तर भारतीय पार्टी माना जाता है। ऐसे में भाजपा से गठबंधन को लेकर AIADMK को आलोचनाओं का सामना करना पड़ता है।
वहीं, भाजपा ने राज्य में अपनी स्थिति सुधारी है, इससे AIADMK की तोल-मोल की ताकत कम हुई है।
इतिहास
कई बार हुआ है भाजपा-AIADMK गठबंधन
AIADMK और भाजपा के बीच कई बार गठबंधन बना और टूटा है।
1998 में AIADMK ने भाजपा के साथ गठबंधन कर 39 में से 30 लोकसभा सीटें जीती थीं। ये गठबंधन अगले साल ही टूट गया।
2004 के लोकसभा चुनावों में फिर दोनों पार्टियां साथ आईं। तब केवल AIADMK ही एक सीट जीत पाई थी।
AIADMK-भाजपा ने 2021 विधानसभा चुनावों में फिर गठबंधन किया, लेकिन दोनों को 75 सीटें ही मिलीं।
2024 लोकसभा चुनाव से पहले यह गठबंधन टूट गया।