
फारूक अब्दुल्ला के बाद अब उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती पर भी लगाया गया PSA
क्या है खबर?
गुरुवार को जम्मू-कश्मीर के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती, पर जन सुरक्षा कानून (PSA) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
इन कानून के तहत किसी भी आरोपी को बिना सुनवाई के दो साल तक हिरासत में रखा जा सकता है।
दोनों नेता पिछले साल अगस्त में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से ही हिरासत में हैं।
इससे पहले सितंबर में एक और पूर्व मुख्मयंत्री फारूक अब्दुल्ला पर PSA लगाया गया था।
पृष्ठभूमि
अनुच्छेद 370 पर फैसले से पहले हिरासत में लिए गए थे जम्मू-कश्मीर के नेता
पिछले साल 5 अगस्त को अनुच्छेद 370 में बदलाव करते हुए जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म करने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने के फैसले से पहले जम्मू-कश्मीर के कई नेताओं को हिरासत में लिया गया था।
फैसले के खिलाफ हिंसा और प्रदर्शन की संभावना को देखते हुए इन नेताओं को हिरासत में लिया गया था।
इन नेताओं में उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती भी शामिल थे। उन्हें छह महीने की ऐहतियातन हिरासत में रखा गया था।
जानकारी
बुधवार को खत्म हो गई थी ऐहतियातन हिरासत की अवधि
ये छह महीने की ऐहतियातन हिरासत बुधवार को खत्म हो गई जिसके बाद उमर और महबूबा पर PSA लगा दिया गया। उनके अलावा नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता अली मोहम्मद सागर और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) के सरताज मदनी पर भी PSA लगाया गया है।
आधार
पुराने बयानों के आधार पर लगाया गया PSA
समाचार एजेंसी PTI के अनुसार, एक मजिस्ट्रेट और एक पुलिस अधिकारी ने श्रीनगर के हरि निवास पहुंच कर उमर अब्दुल्ला को उन पर PSA लगाए जाने की जानकारी दी।
उन्हें बताया गया कि पूर्व में दिए गए उनके कुछ बयान "विनाशक" थे और इसलिए उन पर PSA लगाया गया है।
इसी तरह चश्माशाही में पर्यटन विभाग की सरकारी इमारत में बंद महबूबा मुफ्ती को भी 2010 में उनके आपत्तिजनक बयानों के आधार पर PSA लगाए जाने की जानकारी दी गई।
प्रतिक्रिया
महबूबा की बेटी बोलीं- सत्ता के लिए मूल्यों को त्यागने के लिए तैयार सरकार
महबूबा मुफ्ती को गुरूवार को PSA का आदेश मिलने की जानकारी देते हुए उनकी बेटी इल्तिजा ने कहा, "उनकी 'देशविरोधी टिप्पणियों' के लिए 9 साल के बच्चों पर केस करने वाली निरंकुश सरकार से जम्मू-कश्मीर के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों पर बेहद कठोर PSA लगाए जाने की उम्मीद ही की जा सकती है।"
उन्होंने कहा, "ये सरकार हमारे संविधान की घोर अपेक्षा करती है और सत्ता के लिए समानता, भाईचारे और सामाजिक न्याय के मूल्यों को त्यागने के लिए तैयार है।"
मकसद
सरकार की निगाहें लंबे समय तक हिरासत में रखने पर
बता दें कि सरकार ने पिछले कुछ समय में कश्मीर के कई नेताओं को एक-एक करके रिहा किया है।
उम्मीद की जा रही थी कि उमर और महबूबा को भी रिहा किया जा सकता है, लेकिन अब उन पर PSA लगने से स्पष्ट है कि सरकार बिना कानूनी अड़चन के उन्हें लंबे समय तक हिरासत में रखना चाहती है।
राज्यसभा में केंद्र सरकार के जवाब के मुताबिक, कश्मीर में इन दोनों समेत 437 लोग अभी भी हिरासत में हैं।
कानून
क्या है PSA?
PSA जम्मू-कश्मीर का एक विशेष कानून है और ये भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) से मिलता-जुलता है।
उमर अब्दुल्ला के दादा शेख अब्दुल्ला 1978 में ये कानून लेकर आए थे।
इसके तहत किसी भी ऐसे व्यक्ति को, जिसे प्रशासन राज्य की सुरक्षा के लिए खतरा मानता हो, दो साल तक हिरासत में रखा जा सकता है।
एक डिविजनल कमिश्नर या जिलाधिकारी ही PSA लगाए जाने का आदेश जारी कर सकता है।