
झारखंड: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने साबित किया बहुमत, बोले- गृह युद्ध जैसी स्थिति बना रही भाजपा
क्या है खबर?
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विधानसभा में अपना बहुमत साबित कर दिया है। विश्वास प्रस्ताव पर हुई वोटिंग में उनके समर्थन में कुल 48 विधायकों ने वोट डाला।
81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए उन्हें मात्र 42 विधायकों की जरूरत थी।
भाजपा ने पूरी कार्यवाही के दौरान प्रदर्शन किया और वोटिंग से ठीक पहले उसके विधायक सदन से बाहर चले गए।
सोरेन ने विश्वास प्रस्ताव पर बोलते हुए भाजपा पर जमकर निशाना साधा।
भाषण
विधायकों की खरीद-फरोख्त कर रही भाजपा- सोरेन
सोरेन ने अपने भाषण में कहा कि लोकतंत्र को बचाने के लिए विधानसभा का ये विशेष सत्र बुलाया गया है और सरकार को अस्थिर करने के लिए भाजपा हर रोज विधायकों की खरीद-फरोख्त कर रही है।
उन्होंने कहा, "भाजपा ने लोकतंत्र को तबाह कर दिया है। वह विधायकों की खरीद-फरोख्त में लिप्त है... हमने लोगों के कपड़ा, राशन और ग्रोसरी खरीदने के बारे में सुना है, लेकिन भाजपा विधायक ही खरीद ले रही है।"
बयान
सोरेन बोले- दंगे कराकर गृह युद्ध जैसी स्थिति पैदा कर रही भाजपा
सोरेन ने कहा कि चुनाव जीतने के लिए दंगे कराकर भाजपा देश में गृह युद्ध जैसी स्थिति पैदा करने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा पर भी गठबंधन के विधायकों की खरीद-फरोख्त में लिप्त होने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा, "हमारे तीन विधायक बंगाल में हैं। इन विधायकों की खरीद-फरोख्त करने की जिम्मेदारी असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा की है। जांच के लिए पहुंचने वाली पुलिस के साथ वो सहयोग नहीं करते हैं।"
आशंका
झारखंड में सरकार नहीं हेमंत सोरेन की कुर्सी पर है खतरा
बता दें कि झारखंड में फिलहाल सरकार पर कोई संकट नहीं है, हालांकि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की कुर्सी पर खतरा बना हुआ है।
खुद के नाम पर ही खनन का पट्टा जारी करने के मामले में उन पर पद का दुरुपयोग करने का आरोप है और उनकी विधानसभा की सदस्यता रद्द करने को लेकर चुनाव आयोग ने राज्यपाल रमेश बैस को रिपोर्ट भेजी है।
राज्यपाल किसी भी दिन इस रिपोर्ट को सार्वजनिक कर सकते हैं।
आशंका
JMM को आशंका- संकट का फायदा उठा विधायकों को तोड़ सकती है भाजपा
सोरेन और उनकी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) को आशंका है कि भाजपा इस संकट का फायदा उठा उसके और सहयोगी पार्टियों के विधायकों को तोड़ने की कोशिश कर रही है।
इसी कारण सोरेन पहले विधायकों को एक झील की सैर कराने गए थे और फिर गठबंधन के लगभग तीन दर्जन विधायकों को कांग्रेस शासित छत्तीसगढ़ के रायपुर भेज दिया।
अब उन्होंने शक्ति प्रदर्शन के लिए विधानसभा में अपना बहुमत साबित किया।
फैसला
आज ही सोरेन की सदस्यता पर फैसला सुना सकते हैं राज्यपाल
संभावना जताई जा रही है कि राज्यपाल आज ही सोरेन की सदस्यता रद्द करने पर चुनाव आयोग की रिपोर्ट को सार्वजनिक कर सकते हैं।
गठबंधन सरकार कह चुकी है कि अगर उन्हें अयोग्य घोषित किया जाता है तो सोरेन मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे और दोबारा मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। इसके बाद उनके पास दोबारा विधानसभा चुनकर आने के लिए छह महीने का समय होगा और वो उपचुनाव लड़ेंगे।