
महाराष्ट्र: एकनाथ शिंदे को गृह मंत्रालय देने पर राजी नहीं भाजपा, दिए ये 3 विकल्प
क्या है खबर?
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव जीतने के बाद महायुति गठबंधन में पहले मुख्यमंत्री पद को लेकर कई दिनों तक विवाद चला था और अब मंत्रालयों पर खूब खींचतान हो रही है।
शिवसेना के एकनाथ शिंदे गृह मंत्रालय की मांग कर रहे हैं, लेकिन भाजपा इसे देने को तैयार नहीं है।
अब खबर है कि भाजपा ने शिंदे को गृह मंत्रालय की जगह 3 अन्य मंत्रालयों में से चुनने का विकल्प दिया है।
3 मंत्रालय
भाजपा ने शिंदे को इन 3 मंत्रालयों का विकल्प दिया
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, भाजपा शिंदे की मांग के आगे झुकने को तैयार नहीं है और शिंदे को राजस्व, शहरी विकास और सार्वजनिक निर्माण मंत्रालय का विकल्प दिया है।
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, "भाजपा ने अपने गठबंधन सहयोगी शिवसेना को साफ कर दिया है कि वह गृह मंत्रालय नहीं दे सकती।"
भाजपा ने पहले ही राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) नेता अजीत पवार को वित्त और योजना विभाग देने का वादा किया है।
मंत्रिमंडल
कैसा हो सकता है मंत्रिमंडल?
रिपोर्ट के मुताबिक, महायुति में मंत्रिमंडल को लेकर 6 विधायक पर एक मंत्री पद का फार्मूला तय हुआ है। इसके तहत भाजपा को 20 से 22, शिंदे गुट को 12 और अजित गुट को 9 से 10 मंत्री पद मिल सकते हैं।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि 16 दिसंबर से शुरू होने वाले शीतकालीन सत्र से पहले मंत्रिमंडल का विस्तार होगा।
9 दिसंबर को विधानसभा का विशेष सत्र खत्म होने के बाद मंत्रिमंडल विस्तार हो सकता है।
मंत्रालय
किन मंत्रालयों पर फंसा है पेंच?
महायुति में गृह मंत्रालय को लेकर सबसे ज्यादा विवाद है। भाजपा और शिंदे सेना इस पर दावेदारी कर रहे हैं।
इसके अलावा वित्त, शहरी विकास, राजस्व, आवास, सिंचाई और सामान्य प्रशासन जैसे मंत्रालयों को लेकर भी मतभेद है। पिछले मंत्रिमंडल के सभी मंत्रियों ने जीत दर्ज की थी, इस वजह से सहमति बनाना और मुश्किल हो गया है।
बता दें कि महाराष्ट्र में विधानसभा की 288 सीटें हैं। इस लिहाज से मुख्यमंत्री सहित अधिकतम 43 मंत्री बनाए जा सकते हैं।
परिणाम
क्या रहे थे विधानसभा चुनावों के परिणाम?
महाराष्ट्र के चुनावी नतीजों में महायुति में शामिल भाजपा को 132, शिवसेना (शिंदे) को 57 और NCP को 41 सीट मिली है।
वहीं, विपक्षी महाविकास अघाड़ी (MVA) में शिवसेना (UBT) को 20, कांग्रेस को 16 और शरद पवार की NCP को 10 सीटें मिली हैं।
नियमों के मुताबिक, नेता विपक्ष के लिए पार्टी के पास 10 प्रतिशत सीटें होना जरूरी है। कोई भी विपक्षी पार्टी इस शर्त को पूरा नहीं कर रही, इसलिए विधानसभा में नेता विपक्ष नहीं होगा।