
दिल्ली, आगरा और जयपुर में मौजूद हैं ये यूनेस्को वैश्विक धरोहर स्थल, एक बार जरूर जाएं
क्या है खबर?
अगर आप भारत में आकर्षण के अनूठे मिश्रण की तलाश कर रहे हैं तो दिल्ली, जयपुर और आगरा का रुख करें।
ये तीनों कोई सामान्य जगहें नहीं हैं, बल्कि यहां की ऐतिहासिक इमारतें प्राचीन वास्तुकला का उदाहरण हैं और यूनेस्को ने इन शहरों में कई स्मारकों को विश्व विरासत स्थल घोषित किया हुआ है।
आइए जानते हैं कि इन जगहों पर कौन-कौन से यूनेस्को विरासत स्थल हैं।
#1
लाल किला
पुरानी दिल्ली के मुख्य आकर्षणों में से एक लाल किला शुरुआती शताब्दियों में मुगलों का प्रमुख किला रहा।
लाल बलुआ पत्थर से बने इस किले का निर्माण 1638 में शाहजहां की देखरेख में शुरू हुआ था और 1648 में पूरा हुआ था।
साल 2007 में इसे यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल घोषित किया था। यह किला फारसी, इस्लामिक और तैमूर शैली की वास्तुकला में बनाया गया है।
#2
हुमायूं का मकबरा
दिल्ली में स्थित यह मकबरा मुगल सम्राट हुमायूं की याद में उनकी पहली पत्नी हाजी बेगम द्वारा निर्मित करवाया गया था।
लाल बलुआ पत्थर और सफेद संगमरमर पत्थरों से बने इस मकबरे को 1569-70 में लगभग 15 लाख रुपये की लागत में बनवाया गया था और इसकी संरचना इस्लामिक और फारसी वास्तुकला का मिश्रण है।
हुमायूं के मकबरे की शोभा तब बढ़ी, जब 1993 में यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में इसे शामिल किया गया।
#3
कुतुब मीनार
दिल्ली में स्थित कुतुब मीनार 12वीं शताब्दी में कुतुब-उद-दीन ऐबक द्वारा निर्मित करवाई गई अफगान-भारतीय शैली की विजय मीनार है। यह विजय मीनार अन्य शासकों पर उनकी जीत का प्रतीक है।
12वीं शताब्दी में सुल्तान ऐबक ने केवल एक ही मंजिल का निर्माण कराया था, लेकिन बाद में उनके उत्तराधिकारियों ने शेष संरचना को पूरा किया।
कुतुब मीनार को 1993 में यूनेस्को की विश्व धरोहर की सूची में जगह मिली।
#4
ताजमहल
भारत के 5वें मुगल बादशाह शाहजहां ने आगरा में 1631 के दौरान यमुना नदी के किनारे अपनी पत्नी मुमताज की याद में ताजमहल का निर्माण करवाना शुरू किया, जो 1653 में बनकर तैयार हुआ।
लाल और सफेद संगमरमर से बना ताजमहल दुनिया के 7 अजूबों में एक है।
यह मुगल वास्तुकला का एक उत्कृष्ट नमूना होने के कारण लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचता है।
यूनेस्को ने ताजमहल को साल 1983 में विश्व धरोहरों में शामिल किया था।
#5
एम्बर किला
राजस्थान की राजधानी जयपुर में स्थित एम्बर किले का निर्माण राजा मान सिंह ने 1592 में करवाया गया था।
राजस्थानी वास्तुकला को दर्शाने के लिए इस किले को लाल बलुआ पत्थर और सफेद संगमरमर का इस्तेमाल करके बनाया गया था और इसमें कुछ रहस्यमयी भूमिगत सुरंगें भी हैं।
इस किले को 4 अलग-अलग भागों में बांटा गया है और साल 2013 में इसे यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल घोषित किया था।