
पायरिया: जानिए मसूड़ों की इस समस्या के कारण, लक्षण और बचाव के उपाय
क्या है खबर?
पायरिया को चिकित्सक भाषा में पेरियोडोंटाइटिस कहा जाता है और इससे ग्रस्त व्यक्ति के मसूड़ों और दांतों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
पायरिया दांतों को सहारा देने वाले टिश्यूज को प्रभावित करता है, जिस कारण मसूड़ों की दांतों पर पकड़ कमजोर हो सकती है और यह टूटकर गिर भी सकते हैं।
आइए आज आपको इस समस्या के कारण, लक्षण, इलाज और बचाव के उपाय के बारे में विस्तार से बताते हैं।
प्रकार
तीन प्रकार का होता है पेरियोडोंटाइटिस
जिंजिवाइटिस: इसमें मसूड़ों पर सूजन आती है और दांतों की सफाई के दौरान खून भी निकल सकता है।
माइल्ड पेरियोडोंटाइटिस: इस स्थिति में मसूड़ों की पकड़ कमजोर होने लगती है, जिस वजह से दांतों के आसपास की हड्डी को जल्दी नुकसान होने लगता है।
एडवांस पेरियोडोंटाइटिस: यह पायरिया की गंभीर स्थिति है, जिसमें दांत ढीले होने लगते हैं और उनके टूटने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
कारण
पेरियोडोंटाइटिस किस कारण होता है?
दांतों पर प्लाक का जमाव और मसूड़ों में सूजन पायरिया का कारण बना सकता है।
धूम्रपान करना भी पायरिया के सबसे बड़े जोखिम कारकों में से एक है।
मधुमेह टाइप 2, मोटापा और हार्मोनल परिवर्तन भी मसूड़ों को अधिक संवेदनशील बना सकते हैं।
HIV या ल्यूकेमिया की दवाएं मुंह में लार के प्रवाह को कम करती हैं, जिससे पायरिया होने की संभावना बढ़ सकती है।
आनुवंशिकी और पोषण में कमी भी इस समस्या का कारण बन सकती हैं।
लक्षण
पेरियोडोंटाइटिस के लक्षण
मसूड़ों का लाल या बैंगनी रंग का होना, मसूड़ों पर सूजन आना और इनसे खून निकलना पायरिया के सबसे प्रमुख लक्षण हैं।
मुंह से बदबू आना, दांतों में ढीलापन आना, मसूड़ों से दांतों का दूर होना, कुछ भी चबाते समय दर्द होना भी पायरिया के लक्षण हैं।
ध्यान रखें कि पायरिया होने पर मसूड़ों से दर्द रहित खून निकलता है, इसलिए अधिकतर लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं। हालांकि, आप ऐसा करने से बचें और दंत चिकित्सक से संपर्क करें।
इलाज
पेरियोडोंटाइटिस का इलाज
रूट प्लानिंग: इस ट्रीटमेंट में दंत चिकित्सक दांतों पर मौजूद प्लाक और टार्टर को साफ करते हैं, जिससे पायरिया का खतरा काफी हद तक कम हो सकता है।
दवा: रूट प्लानिंग के साथ-साथ दंत चिकित्सक कुछ एंटीबायोटिक्स दवाओं का सेवन करने की भी सलाह दे सकते हैं।
सर्जरी: गंभीर मामलों में दंत चिकित्सक सर्जरी कराने को भी कह सकते हैं। इसमें दांतों के चारों ओर मसूड़ों पर टांके लगाए जाते हैं ताकि दांत न निकलें।
बचाव
पेरियोडोंटाइटिस से बचाव के उपाय
रोजाना दो बार फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट से हल्के हाथों से ब्रश करें।
ब्रश के बाद हल्के हाथों से दांतों पर फ्लॉसिंग करें क्योंकि यह दांतों के बीच मौजूद भोजन के कणों और प्लॉक को निकालने में मदद करता है।
हर तीन से चार महीने में अपना टूथब्रश बदलें क्योंकि पुराने टूथब्रश मसूड़ों को खराब कर सकता है।
स्वस्थ आहार पर ध्यान दें और धूम्रपान के साथ-साथ नशीले पदार्थों से दूरी बनाएं।
समय-समय पर दांतों की जांच करवाएं।