
डोनाल्ड ट्रंप की 2 अप्रैल की टैरिफ धमकी से निपटने के लिए भारत कितना तैयार?
क्या है खबर?
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 अप्रैल से भारत समेत अन्य देशों पर पारस्परिक टैरिफ लगाने की बात कही थी, जिसे लागू होने में 2 दिन बचे हैं।
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने मामले में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल से कई दौर की वार्ता की है। हालांकि, अभी कोई नतीजा नहीं दिख रहा है।
इस बीच भारत अमेरिका की टैरिफ धमकी से निपटने के लिए अन्य योजना पर भी काम कर रहा है।
आइए, जानते हैं पूरा मामला।
झटका
भारत पारस्परिक टैरिफ के झटके का सामना नहीं करना चाहता
न्यूज18 के मुताबिक, भारत अमेरिकी टैरिफ के रूप में किसी भी तरह के झटके का सामना नहीं करना चाहता है और चाहता है कि अधिक से अधिक समावेश हो।
मौजूदा समय में भारत अमेरिका को सालना करीब 39 करोड़ डॉलर की कॉफी, चाय और अन्य पेय पदार्थ का निर्यात करता है। साथ ही 2 अरब डॉलर का झींगा और मछली का निर्यात भी होता है।
अगर अमेरिका भारतीय आयात पर भारी शुल्क लगाता है तो यह बड़ी समस्या पैदा करेगा।
तैयारी
इससे निपटने की क्या है योजना?
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत इस समस्या से निपटने के लिए सबसे पहले निर्यात बाजार में संभावित वृद्धि चाहेगा, जो मैक्सिको और कनाडा जैसे अन्य देशों में हो सकती है।
इन देशों पर भी अमेरिका का दबाव है, जिससे इनके संबंध बिगड़े हुए हैं और इनके बाजार पर भी प्रभाव पड़ना संभव है।
हालांकि, भारतीय विशेषज्ञ करते हैं कि टैरिफ युद्ध कोई अंत नहीं है, बल्कि यह नए बाजार और प्रतिस्पर्धी उत्पादों के साथ नए अवसर खोल सकता है।
योजना
कृषि क्षेत्र में रियायत देकर कुछ फायदा पा सकता है भारत?
भारत में कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है और राजनीतिक मुद्दा भी है, इसलिए टैरिफ से कृषि समस्या वाला क्षेत्र हो सकता है।
कृषि मंत्रालय ने टैरिफ को लेकर अभी नुकसान का कोई आकलन नहीं किया है, जबकि हमारे झींगा, चाय, कॉफी, मछली अमेरिका में निर्यात का बड़ा हिस्सा है।
योजना है कि भारत काजू, पिस्ता, क्रैनबेरी जैसे कुछ आयात पर अमेरिका को रियायत दे और बदले में कुछ पाए क्योंकि इससे भारत को कोई नुकसान भी नहीं होगा।
योजना
कृषि निर्यात अन्य देशों में बढ़ाए जाने की संभावना, अमेरिका को झटका
इसके अलावा कृषि निर्यात को नए बाजारों में बढ़ाने की भी योजना बन सकती है, जिसमें मॉरीशस, अरब देश, कनाडा और मैक्सिको शामिल हैं।
इससे भारत को कुछ हद तक नुकसान कम होगा। हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि कृषि आयात में अगर कमी हुई तो अमेरिका को नुकसान हो सकता है क्योंकि उनकी उपज सीमित है और वह कई चीजों पर भारत पर निर्भर हैं।
इसके अलावा उनके यहां कुछ चीजों की गुणवत्ता भी भारत से मेल नहीं खाती है।
निर्यात
भारत का बढ़ा है निर्यात
केंद्र सरकार के आंकड़ों देखें तो पिछले कुछ सालों में भारतीय निर्यात में ऐतिहासिक बढ़ोतरी हुई है और यह 2023-2024 में 778.21 अरब डॉलर तक पहुंच गई।
इससे पहले 2013-14 में यह 466.22 अरब डॉलर थी। यानी पिछले 10 वर्षों में यह 67 प्रतिशत बढ़ोतरी को दर्शा रहा है।
भारत का निर्यात भी उत्तर और दक्षिण अमेरिका, मध्य पूर्व और पूर्वी एशिया में भी बढ़ा है, जो नए बाजार को लक्षित करने की सरकार की योजना में से एक है।
जानकारी
ऑटोमोबाइल और कृषि में नुकसान ज्यादा
अमेरिकी टैरिफ से सबसे अधिक नुकसान भारत की ऑटोमोबाइल और कृषि क्षेत्र को होगा। ऑटोमोबाइल का नुकसान भारत रियायत और इलेक्ट्रिक वाहनों से संभाल सकता है, लेकिन कृषि में समस्या बढ़ सकती है। इसके लिए कृषि और वाणिज्य मंत्रालय 2 अप्रैल को पुनर्मूल्यांकन करेंगे।