
उद्धव सरकार गिरने में राज्यपाल की भूमिका पर सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी, जानें क्या कहा
क्या है खबर?
सुप्रीम कोर्ट ने आज महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार के तख्तापलट मामले की सुनवाई करते हुए तल्ख टिप्पणी की।
कोर्ट ने कहा, "एक राज्यपाल को शक्ति का सावधानी से इस्तेमाल करना चाहिए और इस बात से अवगत होना चाहिए कि विश्वास मत के लिए बुलाने से सरकार गिर सकती है।"
शिवसेना बनाम शिवसेना मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पिछले साल महाराष्ट्र में सरकार गिराने को लेकर राज्यपाल कोश्यारी की भूमिका पर यह कड़ी टिप्पणी की।
बेंच
कोर्ट ने क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने कहा, "राज्यपाल को सचेत रहना चाहिए कि विश्वास मत बुलाने से सरकार गिर सकती है। राज्यपाल को किसी भी ऐसे क्षेत्र में प्रवेश नहीं करना चाहिए, जो सरकार के गिरने का कारण बनता है।"
कोर्ट ने कहा कि 3 साल तक शिवसेना, कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) ने गठबंधन की सरकार चलाई और अचानक रातों-रात ऐसा क्या हो गया, जो राज्यपाल ने विधायकों को विश्वास मत के लिए बुला लिया।
कोर्ट
कोर्ट ने पूछा- राज्यपाल का विश्वास मत बुलाने के पीछे क्या था आधार?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "अगर यह चुनाव होने के एक महीने बाद होता और वे अचानक भाजपा को दरकिनार कर कांग्रेस में शामिल हो जाते तो यह अलग बात है। तीन साल साथ रहने के बाद 34 विधायकों का समूह कहता है कि उनमें असंतोष है।"
कोर्ट ने कहा, "जिन विधायकों में असंतोष था, वह शिवसेना का हिस्सा थे तो फिर राज्यपाल के विश्वास मत बुलाने के पीछे क्या आधार था? उन्हें इसका ठोस कारण बताना चाहिए।"
राज्यपाल
राज्यपाल की ओर से सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट में क्या कहा?
राज्यपाल की ओर से सॉलिसिटर तुषार मेहता ने कोर्ट में कहा कि उद्धव ठाकरे की सरकार पर विद्रोही गुट के विधायकों को विश्वास नहीं रह गया था और वह पार्टी से अलग नहीं हो रहे थे, बस अपना समर्थन वापस ले रहे थे।
उन्होंने कहा कि ऐसे में राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी का यह राय बनाना उचित था कि वास्तव में सरकार ने बहुमत खो दिया है और राज्यपाल को संवैधानिक रूप से विश्वास मत बुलाने का अधिकार था।
मामला?
क्या था मामला?
शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे ने जून, 2022 में लगभग 40 विधायकों के साथ तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के खिलाफ बगावत कर दी थी। इसके बाद राज्यपाल कोश्यारी ने ठाकरे को बहुमत साबित करने को कहा और उनकी सरकार गिर गई।
ठाकरे गुट का आरोप है कि शिंदे गुट ने दल-बदल कानून की धज्जियां उड़ाई और बगावत के बावजूद बागी विधायकों की सदस्यता रद्द नहीं की गई।
इसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपाल पर तल्ख टिप्पणी की है।