
अर्धसैनिक बलों में बढ़े आत्महत्या के मामले, 5 साल में 50,155 जवानों ने छोड़ी नौकरी- सरकार
क्या है खबर?
राज्यसभा में पेश संसदीय समिति की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले 5 सालों में अर्द्धसैनिक बलों के कम से कम 50,155 जवानों ने अपनी नौकरी छोड़ दी है। इस दौरान जवानों की आत्महत्या के मामलों में भी बढ़ोतरी हुई है।
संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सरकार को अर्द्धसैनिक बलों में काम करने वाले जवानों की स्थिति में महत्वपूर्ण सुधार करने और कर्मियों को बल से रहने के लिए प्रेरित करने की आवश्यकता है।
रिपोर्ट
5 सालों में सबसे ज्यादा नौकरी छोड़ने वालों में BSF के जवान
बतौर रिपोर्ट, असम राइफल्स और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के मामले में नौकरी छोड़ने की दर में वृद्धि हुई है। सीमा सुरक्षा बल (BSF) के मामले में भी यह समान रही है।
पिछले साल की तुलना में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और भारत तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) की तुलना में सशस्त्र सीमा बल (SSB) मामलों में कमी आई है।
2018 से 2002 के बीच BSF के 23,553, CRPF के 13,640 और CISF के 5,876 जवानों ने नौकरी छोड़ी।
मौत
पिछले 5 सालों में CRPF 230 आत्महत्या के मामले दर्ज- रिपोर्ट
गृह मंत्रालय के दिये आंकड़ों ने अनुसार, साल 2018 से 2022 के बीच पिछले 5 सालों में 6 अर्द्धसैनिकों बलों के 654 कर्मचारियों ने आत्महत्या की है। BSF और SSB के बाद CRPF में आत्महत्या के मामलों में बढ़ोतरी हुई है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि 5 सालों में सबसे ज्यादा 230 मौतें CRPF और उसके बाद 174 मौतें BSF में दर्ज की गईं, जबकि असम राइफल्स में 43 मौतें हुईं है।
जानकारी
छत्तीसगढ़ में आत्महत्या के ज्यादा मामले- अधिकारी
CRPF के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, बल में सबसे अधिक आत्महत्याएं नक्सल प्रभावित राज्य छत्तीसगढ़ में होती हैं। यहां लगभग 39,000 जवान छत्तीसगढ़ पुलिस के साथ मिलकर काम करते हैं। उन्होंने कहा कि पिछले महीने यहां दो जवानों ने आत्महत्या की है।
समिति
समिति ने अपनी रिपोर्ट में की सिफारिश
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में कुछ सिफारिश भी की है, जिसमें कहा गया है कि यह समझने के लिए सर्वेक्षण किया जाए कि कर्मचारी अपनी नौकरी क्यों छोड़ रहे हैं।
समिति ने कहा कि मंत्रालय को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति और इस्तीफा देने वाले कर्मियों का निकास साक्षात्कार या सर्वेक्षण किया जाना चाहिए ताकि कर्मचारियों की चिंताओं को दूर किया जा सके और बल में नौकरी छोड़ने की प्रवृत्ति पर रोक लगाई जा सके।
बयान
टास्क फोर्स का किया गया है गठन- गृह मंत्रालय
रिपोर्ट के मुताबिक, गृह मंत्रालय ने पिछले हफ्ते संसद में एक सवाल का जवाब देते हुए कहा था कि अर्द्धसैनिक बलों में जोखिम के कारणों के पहचान के लिए एक टास्क फोर्स गठित की गई है, जो अन्य कारणों का भी पता लगाएगी।
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद ने कहा, "यह टास्क फोर्स आत्महत्याओं और साथी जवानों के बीच हुई लड़ाई में हुई मौतों को लेकर अपने सुझाव देगी। टास्क फोर्स अपनी रिपोर्ट तैयार कर रही है।"