
अशोका विश्वविद्यालय के संस्थापकों के यहां ED का छापा, 1,600 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े का मामला
क्या है खबर?
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आज अशोका विश्वविद्यालय के संस्थापकों के यहां छापा मारा है। दिल्ली, चंडीगढ़, मुंबई, पंचकूला और अंबाला में कुल 17 जगहों पर ED की छापेमार कार्रवाई जारी है। सुबह 6 बजे से ही ED की टीम कार्रवाई को अंजाम दे रही है।
ये मामला पैराबोलिक ड्रग्स लिमिटेड कंपनी से जुड़ा हुआ है। कंपनी के निदेशक प्रणव गुप्ता और विनीत गुप्ता पर 16,000 करोड़ रुपये के बैंक फर्जीवाड़े का आरोप है।
मामला
क्या है मामला?
2021 में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अशोका विश्वविद्यालय के सह-संस्थापक विनीत गुप्ता और प्रणव गुप्ता की दवा कंपनी पैराबोलिक ड्रग्स के कई ठिकानों पर छापा मारा था।
तब एजेंसी ने कहा था कि आरोपियों ने आपराधिक साजिश, जालसाजी और जाली दस्तावेजों का उपयोग कर बैंकों के एक संघ को धोखा दिया है। बाद में गंभीरता को देखते हुए CBI ने मामला ED को सौंप दिया था।
अब ED मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों को लेकर जांच कर रही है।
इस्तीफा
संस्थापकों ने विश्वविद्यालय में सभी पदों से दे दिया है इस्तीफा
CBI की जांच के बाद जनवरी, 2022 में गुप्ता बंधुओं ने विश्वविद्यालय के सभी बोर्ड और समितियों से इस्तीफा दे दिया था।
विश्वविद्यालय ने भी कहा था कि पैराबोलिक ड्रग्स लिमिटेड और उसके निदेशकों की जांच से उसका कोई लेना-देना नहीं है।
विश्वविद्यालय के बयान के मुताबिक, "विश्वविद्यालय के 200 से अधिक संस्थापक और दानदाता हैं, जिन्होंने व्यक्तिगत परोपकारी योगदान दिया है। उनके व्यक्तिगत व्यावसायिक व्यवहार और संचालन का विश्वविद्यालय से कोई संबंध नहीं है।"
विवाद
विवादों में रहा है अशोका विश्वविद्यालय
इससे पहले 2021 में अशोका विश्वविद्यालय जाने-माने राजनीतिक वैज्ञानिक और टिप्पणीकार प्रताप भानु मेहता और प्रसिद्ध अर्थशास्त्री अरविंद सुब्रमण्यन के इस्तीफे के बाद चर्चा में आया था।
इसी साल अगस्त में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर सब्यासाची दास के एक रिसर्च पेपर को लेकर भी खूब विवाद हुआ था। दास ने इस पेपर में 2019 के लोकसभा चुनावों में हेरफेर का आरोप लगाया था। दास ने बाद में संस्थान से इस्तीफा दे दिया था।
प्लस
न्यूजबाइट्स प्लस
अशोका विश्वविद्यालय हरियाणा के सोनीपत में स्थित है। करीब 25 एकड़ में फैला हुआ ये विश्वविद्यालय इतिहास, लेखन, समाज शास्त्र और तर्क शास्त्र की पढ़ाई के लिए जाना जाता है।
ये निजी विश्वविद्यालय है, जिसका पूरा कामकाज दान के पैसों से चलता है। भारतीय प्रोद्यौगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली से पढ़े कुछ युवाओं और शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय लोगों ने 2014 इसकी शुरुआत की थी। देश के जाने-माने अर्थशास्त्री, समाज शास्त्री और लेखक-आलोचक यहां पढ़ाने आते हैं।