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निर्भया गैंगरेप का दोषी पहुंचा कोर्ट, 1 फरवरी को फांसी पर रोक लगाने की मांग

निर्भया गैंगरेप का दोषी पहुंचा कोर्ट, 1 फरवरी को फांसी पर रोक लगाने की मांग

Jan 30, 2020
02:12 pm

क्या है खबर?

निर्भया गैंगरेप और हत्या मामले में दोषियों की फांसी बार-बार टलती नजर आ रही है। दोषियों की ओर से एक-एक कर लगाई जा रही बचाव याचिकाओं में अब दोषी अक्षय सिंह की याचिका भी शामिल हो गई है। दोषी ने दिल्ली की पटियाला कोर्ट में याचिका दायर कर 1 फरवरी को दी जाने वाली फांसी पर रोक लगाने की मांग की है। दोषी ने सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पिटीशन भी दायर की थी, जिसे कोर्ट ने उसे खारिज कर दिया।

याचिका खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की अक्षय की क्यूरेटिव पिटीशन

अक्षय की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई क्यूरेटिव पिटीशन पर न्यायाधीश एनवी रमण की अध्यक्षता वाली पीठ ने बंद बुधवार को चैंबर में सुनवाई की। पीठ याचिका में दी गई दलीलों से संतुष्ट नहीं हुई और उसे खारिज कर दिया। अब अक्षय के पास राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका लगाने का ही विकल्प बचा है। अक्षय के वकील ने यचिका में दिल्ली के प्रदूषण से उसकी जिंदगी पहले ही कम होने का दावा किया था।

रणनीति

फांसी से बचने के लिए अपराधी एक-एक कर लगा रहे याचिका

इस महीने पटियाला हाउस कोर्ट ने डैथ वारंट जारी करते हुए चारों अपराधियों को 22 जनवरी को फांसी पर लटकाने का आदेश दिया था। इसके बाद मुकेश की ओर से राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका भेजने के कारण फांसी को टालकर 1 फरवरी का दिन निर्धारित कर दिया गया था। हालांकि, मुकेश की याचिका को राष्ट्रपति ने खारिज कर दिया। इसके बाद विनय ने राष्ट्रपति को याचिका भेज दी और अक्षय ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।

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दया याचिका में दलील

विनय ने राष्ट्रपति कोविंद को बताया कि वह उसका आखिरी अपराध था

सुप्रीम कोर्ट से क्यूरेटिव पिटीशन खारिज होने के बाद यदि अक्षय भी राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका लगाता है तो वह ऐसा करने वाला तीसरा अपराधी होगा। इधर, विनय के वकील की ओर से भेजी गई दया याचिका में कहा गया है कि वह पहले ही जेल में कई बार मर चुका है। उसने राष्ट्रपति से कहा कि वह उसका आखिरी अपराध था। ऐसे में वही तय करें कि क्या मौत ही उसके लिए सजा का आखिरी प्रावधान है।

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बयान

वारदात के बाद बदल गई मेरी पूरी जिंदगी: विनय

विनय ने याचिका में कहा, "मैं याचिका इस उम्मीद से भेज रहा हूं कि आप मेरी वह अपील सुनेंगे, जो किसी ने नहीं सुनी। यह मेरा आखिरी मौका है और बताना चाहता हूं कि 2012 की खौफनाक वारदात के बाद उसकी पूरी जिंदगी बदल गई।"

दलील

अपराधियों की चालबाजी देख केन्द्र ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की याचिका

अपराधियों की ओर से अपने बचाव के लिए कानूनी दावपेचों का दुरुपयोग किए जाने को लेकर गत दिनों केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर फांसी प्राप्त अपराधी के याचिका दायर करने के नियम को बदलने की दलील दी थी। याचिका में सरकार ने कहा कि फांसी प्राप्त अपराधियों की याचिका संबंधी नियमों में आवश्यक बदलाव लाए जाने चाहिए ताकि मौत की सजा पाने वाले कानूनी विकल्पों का दुरुपयोग नहीं कर सकें।

मामला

हैवानियत वाले अपराध के लिए चार अपराधियों को मिली हैं फांसी

16 दिसंबर, 2012 को छह अपराधियों ने निर्भया के साथ एक निजी बस में गैंगरेप कर हैवानियत की थी। इसके बाद निर्भया ने सिंगापुर में दम तोड़ दिया था। देशभर में इसको लेकर विरोध हुआ था। मामले में एक नाबालिग सजा काटकर बाहर आ चुका है और एक ने तिहाड़ जेल में आत्महत्या कर ली थी। शेष चार अपराधी अक्षय, विनय, मुकेश और पवन को अदालत ने फांसी की सजा का ऐलान करते हुए डैथ वारंट जारी किया है।

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