
#NewsBytesExplainer: गांधी, गोडसे और मुगल, NCERT की किताबों से क्या-क्या हटाया गया है?
क्या है खबर?
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने अपनी किताबों से मुगल साम्राज्य, महात्मा गांधी, नाथूराम गोडसे, औद्योगिक क्रांति, कांग्रेस, भारतीय जनसंघ और कम्युनिस्ट पार्टी समेत कई विषयों से जुड़े हिस्सों को हटा दिया है।
ये बदलाव इसी सत्र से लागू हो जाएंगे और बाजार में नए बदलाव वाली किताबें आ भी गई हैं। पाठ्यक्रम में हुए इस बदलाव पर खूब राजनीति हो रही है।
आइए जानते हैं कि NCERT ने किताबों में क्या-क्या बदलाव किए हैं।
कांग्रेस और मुगल
मुगल दरबार, कांग्रेस और जनसंघ के अध्याय हटाए
कक्षा 12वीं की इतिहास की किताबों से थीम्स ऑफ इंडियन हिस्ट्री-पार्ट II से मुगल दरबार और उसके इतिहास से संबंधित अध्यायों को हटाया गया है।
नागरिक शास्त्र की किताब से 'US हेजेमनी इन वर्ल्ड पॉलिटिक्स' और 'द कोल्ड वॉर एरा' जैसे चैप्टर हटाए गए हैं।
स्वतंत्र भारत में राजनीति की किताब से 'जन आंदोलन का उदय' और 'एक दल के प्रभुत्व का दौर' हटाया गया है। इनमें कांग्रेस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और भारतीय जनसंघ को पढ़ाया जाता था।
गोडसे
नाथूराम गोडसे की जाति बताने वाला हिस्सा भी हटाया गया
अखबार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, कक्षा 12 की इतिहास की किताब से महात्मा गांधी की हत्या से जुड़ा वो हिस्सा भी हटा दिया गया है, जिसमें उन्हें मारने वाले को ब्राह्मण और कट्टरपंथी हिंदू अखबार का संपादक बताया गया था।
नई किताब में लिखा गया है, '30 जनवरी को एक प्रार्थना सभा में एक युवा व्यक्ति ने गांधी पर गोली चलाई। हत्यारे ने बाद में आत्मसमर्पण कर दिया। व्यक्ति की पहचान नाथूराम गोडसे के तौर पर की गई।'
गुजरात दंगे
गुजरात दंगों को लेकर भी हुआ किताबों में बदलाव
किताबों से 2002 में हुए गुजरात दंगों से संबंधित एक पूरा पैराग्राफ हटाया गया है। हटाए गए पैराग्राफ में बताया गया था कि कैसे रिहायशी इलाके धर्म, जाति और नस्ल के आधार पर बंटे होते हैं और 2002 के गुजरात दंगों के बाद ये बंटवारा कैसे और बढ़ा।
इस पैराग्राफ को हटाने के साथ ही अब कक्षा 6 से लेकर कक्षा 12 तक के सामाजिक विज्ञान के पाठ्यक्रम से गुजरात दंगों से जुड़ी जानकारियां खत्म हो गई हैं।
जानकारी
RSS पर प्रतिबंध वाला हिस्सा भी हटाया गया
किताबों से वो हिस्सा भी हटा दिया गया है, जिसमें कहा गया था कि गांधी जी की हत्या के बाद सरकार ने सांप्रदायिकता फैलाने वाले संगठनों के खिलाफ कार्रवाई की और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) जैसे संगठनों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।
आपातकाल
आपातकाल और महमूद गजनी से जुड़े अध्यायों में भी बदलाव
12वीं की किताब में आपातकाल के पाठ्यक्रम को कम कर पांच पन्नों का किया गया है। कक्षा 6 की किताब में वर्ण व्यवस्था वाले हिस्से को आधा कर दिया गया है।
कक्षा 6 से लेकर 12वीं तक की किताबों से सामाजिक आंदोलन के तीन अध्याय भी हटाए गए हैं।
7वीं की किताब से महमूद गजनी के आक्रमण और सोमनाथ मंदिर पर हमले की बात को बदला गया है और गजनी के नाम के आगे से 'सुल्तान' हटा दिया गया है।
गजल
हिन्दी किताब से गजल और गीत भी हटाए गए
NCERT ने हिन्दी विषय के पाठ्यक्रम में भी कुछ बदलाव किए हैं। हिन्दी आरोह भाग-2 किताब से फिराक गोरखपुरी की गजल और अंतरा भाग-2 किताब से सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की 'गीत गाने दो मुझे' कविता को हटा दिया गया है।
इसके अलावा विष्णु खरे की 'एक काम और सत्य' को भी हटाया गया है। 11वीं की किताब 'थीम्स इन वर्ल्ड हिस्ट्री' से 'सेंट्रल इस्लामिक लैंड्स', 'संस्कृतियों का टकराव' और 'औद्योगिक क्रांति' जैसे पाठ हटा दिए गए हैं।
बयान
बदलावों पर NCERT का क्या कहना है?
NCERT के निदेशक दिनेश प्रसाद सकलानी ने कहा, "कोरोना वायरस महामारी के कारण छात्रों की पढ़ाई का बहुत नुकसान हुआ है। तनावग्रस्त छात्रों की मदद करने के लिए और समाज और राष्ट्र के प्रति एक जिम्मेदारी के रूप में यह महसूस किया गया कि पाठ्यपुस्तकों का भार कम किया जाना चाहिए, इसलिए ही यह फैसला लिया गया है।"
NCERT ने खास विचारधारा के अनुरूप किए गए बदलावों के आरोपों को खारिज किया है।
पहले वाले बदलाव
क्या पहले भी हुए हैं पाठ्यक्रम में बदलाव?
इससे पहले भी NCERT ने कई बार पाठ्यक्रम में बदलाव किए हैं।
2017 में NCERT ने 182 किताबों और विषयों को वर्तमान सरकार की नीतियों के मद्देनजर अपडेट किया था। इसके तहत स्वच्छ भारत, डिजिटल इंडिया, GST, 'बेटी बचाओ, बेटी पढाओ' और नोटबंदी जैसे कई विषयों को किताबों में जोड़ा गया था, ताकि छात्रों को इन मुद्दों की जानकारी मिल सके।
इसके अलावा सुभाष चंद्र बोस, महाराणा प्रताप, स्वामी विवेकानंद आदि को इतिहास की पाठ्यपुस्तकों में शामिल किया गया था।
जानकारी
बदलावों पर सरकार का क्या कहना है?
शिक्षा राज्यमंत्री अन्नपूर्णा देवी ने राज्यसभा में कहा था कि महामारी के कारण स्कूली शिक्षा के नुकसान को ध्यान में रखते हुए छात्रों के तनाव और भार को कम करने के लिए पुस्तकों के पाठ्यक्रम को तर्कसंगत किया गया है।
राजनीति
राजनीतिक पार्टियों का क्या कहना है?
भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने इस फैसले की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि इतिहास की किताबों में चोरों को मुगल सल्तनत और भारत का बादशाह बताया जाता था और किताबों से झूठा इतिहास हटाना शानदार निर्णय है।
कांग्रेस ने फैसले की आलोचना करते हुए इसे इतिहास को बदलने की मोदी सरकार की कोशिश करार दिया है।
सपा सांसद कपिल सिब्बल ने भी ट्वीट कर लिखा, 'मोदीजी के भारत के अनुरूप आधुनिक भारत का इतिहास 2014 से शुरू होना चाहिए!'