
निर्भया मामला: मुख्य गवाह पर झूठ बोलने का आरोप, एक दोषी के पिता ने दी शिकायत
क्या है खबर?
निर्भया मामले में दोषी अजय कुमार गुप्ता के पिता ने इस केस के गवाह के खिलाफ शिकायत की है।
अजय के पिता हीरा लाल गुप्ता ने साउथवेस्ट DCP और आरकेपुरम पुलिस स्टेशन में शिकायत देकर कहा है कि इस मामले का गवाह झूठ बोल रहा है और उसने पैसे देकर मीडिया को बयान दिए थे।
दोषी अजय इस समय दिल्ली की मंडोली जेल में अपनी सजा काट रहा है।
आइये, इस मामले में विस्तार से जानकारी लेते हैं।
शिकायत
शिकायत में पुलिस की जांच पर उठाया गया सवाल
हीरा लाल ने 2 नवंबर को दी अपनी शिकायत में कहा, "मुझे सोशल मीडिया के जरिए 12 अक्टूबर को पता चला कि निर्भया का दोस्त, जिसे इस मामले में गवाह बनाया गया है वह पैसे लेकर बयान देता था।"
अपनी शिकायत में गुप्ता ने इस गवाह के आधार पर की गई पुलिस की जांच पर सवाल उठाए हैं।
गुप्ता ने अपनी शिकायत में एक समाचार चैनल के दो वरिष्ठ पत्रकारों का गवाहों के तौर पर जिक्र किया है।
दावा
वरिष्ठ पत्रकार ने किया था सनसनीखेज दावा
एक समाचार चैनल के पूर्व मैनेजिंग एडिटर ने दावा किया था कि निर्भया का दोस्त और इस मामले में एकमात्र गवाह मीडिया को बयान देने के बदले पैसे लेता था।
उन्होंने लिखा था कि उन्होंने उसका स्टिंग ऑपरेशन भी किया था, लेकिन इसका प्रसारण नहीं किया।
गुप्ता के वकील ने कहा कि अगर इसका प्रसारण किया जाता तो दोषी बच सकते थे।
उन्होंने कहा कि वो मैनेजिंग एडिटर से स्टिंग ऑपरेशन के साथ अदालत में पेश होने के कहेंगे।
जानकारी
शिकायत के साथ सौंपी गई सोशल मीडिया पोस्ट की क्लिप
गुप्ता ने कहा कि उन्होंने अपनी शिकायत के साथ सोशल मीडिया पोस्ट की क्लिप भी शेयर की है, जिससे पुलिस को जांच में मदद मिल सकेगी। उन्होंने अपनी शिकायत में मैनेजिंग एडिटर का नाम भी दिया है।
प्रतिक्रिया
दोषियों के वकील ने उठाए सवाल
इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील और इस मामले में तीन दोषियों की पैरवी करने वाले एपी सिंह ने कहा, "अगर यह बात सच है कि एकमात्र गवाह ने पैसे लेकर इंटरव्यू दिए थे तो हमारे पास हमारे क्लाइंट को बचाने का हर कानूनी हक है। हमारे क्लाइंट खामियों का खामियाजा क्यों भुगते? कोर्ट उस गवाह की बात पर कैसे विश्वास कर सकता है जिसके इरादे संदेहपूर्ण हो।"
घटना
फिल्म देखकर लौट रही निर्भया के साथ किया गया था गैंगरेप
16 दिसंबर, 2012 की रात अपने दोस्त के साथ फिल्म देखकर लौट रही 23 वर्षीय छात्रा के साथ छह लोगों ने दिल्ली में चलती बस में गैंगरेप किया था।
आरोपियों ने इस दौरान हैवानियत की सारे हदें पार कर दी थीं और बुरी तरह से घायल छात्रा और उसके दोस्त को सड़क किनारे फेंक कर भाग गए थे।
छात्रा का पहले सफदरजंग अस्पताल में इलाज चला, लेकिन कुछ दिन बाद सिंगापुर शिफ्ट कर दिया जहां उसकी मौत हो गई।
जानकारी
दिल्ली में हुआ था बड़ा आंदोलन
निर्भया के साथ हुई हैवानियत सामने आने के बाद दिल्ली में लोगों ने राष्ट्रपति भवन के सामने बड़ा प्रदर्शन किया, जिसने जल्द ही आंदोलन का रूप ले लिया। देश के बाकी हिस्सों में भी दोषियों को फांसी की सजा देने के लिए प्रदर्शन हुए थे।
सजा
एक दोषी ने लगाई फांसी, एक नाबालिग होने के कारण कठोर सजा से बचा
मामले में दिल्ली पुलिस ने कुछ दिनों के अंदर ही बस ड्राइवर राम सिंह, उसके भाई मुकेश सिंह, विनय शर्मा, पवन गुप्ता, बस के हेल्पर अक्षय सिंह और एक 17 वर्षीय नाबालिग को गिरफ्तार कर लिया था।
राम सिंह ने मार्च 2013 में तिहाड़ जेल में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी, वहीं नाबालिग आरोपी को किशोर न्याय अधिनियम के तहत तीन साल के लिए बाल सुधार गृह भेजा गया था। अब यह आरोपी सुधार गृह से बाहर है।
सजा
चार दोषियों को कोर्ट ने सुनाई फांसी की सजा
बाकी चारों आरोपियों पर दिल्ली स्थित ट्रायल कोर्ट में फास्ट ट्रैक सुनवाई की गई और 13 सितंबर, 2013 को चारों को फांसी की सजा सुनाई गई।
इसके बाद दोषियों ने पहले दिल्ली हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट में फांसी के फैसले को चुनौती दी, लेकिन दोनों ने उनकी फांसी की सजा को बरकरार रखा।
अब इन दोषियों में से दोषी ने अपनी फांसी की सजा टालने के लिए राष्ट्रपति के पास याचिका भेजी है।
जानकारी
एक की याचिका से टली सबकी फांसी
एक दोषी की ओर से दायर दया याचिका के बाद तीन अन्य दोषियों की फांसी टल गई है। इन दोषियों की फांसी तब तक टली रहेगी जब तक राष्ट्रपति की ओर से इस दया याचिका पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया जाता