
केंद्र सरकार ने जस्टिस यशवंत वर्मा के इलाहाबाद हाई कोर्ट में तबादले को दी मंजूरी
क्या है खबर?
केंद्र सरकार ने घर पर बेहिसाब नकदी मिलने के मामले में विवादों में आए दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के इलाहाबाद हाई कोर्ट में किए गए तबादले को शुक्रवार को मंजूरी दे दी है।
अब वर्मा को इलाहाबाद जाना होगा, जो उनका मूल कार्य क्षेत्र रहा है। इसी के साथ दिल्ली हाई कोर्ट के एक अन्य न्यायाधीश जस्टिस चंद्रधारी सिंह का भी इलाहाबाद हाई कोर्ट में तबादला किया गया है।
आइए इस पूरी खबर पर नजर डालते हैं।
अधिसूचना
केंद्रीय विधि मंत्रालय ने जारी की अधिसूचना
केंद्रीय विधि मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना में कहा है, 'भारत के संविधान के अनुच्छेद 222 के खंड (1) द्वारा प्रदत्त शक्ति का प्रयोग करते हुए, राष्ट्रपति भारत के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श के बाद, दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायाधीश यशवंत वर्मा को इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में स्थानांतरित करते हैं तथा उन्हें कार्यभार संभालने का निर्देश देते हैं।'
इस मामले में मुख्य न्यायाधीश (CJI) संजीव खन्ना ने गुरुवार को विभिन्न बार एसोसिएशन अध्यक्षों से मुलाकात की थी।
सिफारिश
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने की थी तबादले की सिफारिश
सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम ने गत सोमवार को जस्टिस वर्मा को इलाहाबाद हाई कोर्ट में वापस भेजने की सिफारिश की थी।
कॉलेजियम ने अपने फैसले को औपचारिक रूप देते हुए इस प्रस्ताव को मंजूरी के लिए सरकार के पास भेजा था।
हालांकि, उससे पहले भी कॉलेजियम ने एक बैठक में जस्टिस वर्मा के तबादले पर सहमति जता दी थी, लेकिन इलाहाबाद बार एसोसिएशन के विरोध करने के बाद कॉलेजियम को प्रस्ताव बनाकर सरकार को भेजना पड़ा था।
विरोध
इलाहाबाद बार एसोसिएशन कर रही है तबादले का विरोध
इलाहाबाद हाई कोर्ट की बार एसोसिएशन जस्टिस वर्मा के तबादले का कड़ा विरोध कर रही है।
एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना था कि इलाहाबाद हाई कोर्ट कोई कचरे का डिब्बा नहीं है, अगर जस्टिस वर्मा इलाहाबाद आते हैं तो उनका स्वागत नहीं किया जाएगा और इसके विरोध में संवैधानिक अधिकारों के तहत कदम उठाए जाएंगे।
एसोसिएशन का कहना है कि दागी न्यायाधीशों के लिए उनके हाई कोर्ट में कोई जगह नहीं है।
विवाद
क्या है मामला?
न्यायमूर्ति वर्मा के दिल्ली स्थित सरकारी आवास के स्टोर रूम में 14 मार्च आग लग गई थी। उस समय न्यायमूर्ति वर्मा शहर में नहीं थे। उनके परिवार ने अग्निशमन और पुलिस को बुलाया।
आग बुझाने के बाद टीम को घर से भारी मात्रा में नकदी मिली। इसकी जानकारी CJI संजीव खन्ना को हुई तो उन्होंने कॉलेजियम बैठक बुलाकर न्यायमूर्ति वर्मा का स्थानांतरण इलाहाबाद कर दिया।
न्यायमूर्ति वर्मा ने अपनी सफाई दी है कि यह उनको बदनाम करने की साजिश है।
जांच
चल रही है बड़ी जांच
नकदी मिलने के मामले में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय को जांच के आदेश दिए थे।
उन्होंने अपनी रिपोर्ट 21 मार्च को सौंपी है, जिसमें राय दी गई है कि मामले को गहन जांच की आवश्यकता है।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने आंतरिक जांच के लिए 3 सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी। समिति मामले की बारीकी से जांच करते हुए सभी के बयान दर्ज कर रही है।