
सरकारी प्रक्रिया: भारत में रोजगार की तुलना में ज्यादा आसान है अपराध की राह
क्या है खबर?
देश में सरकार बेरोजगारों को रोजगार मुहैया कराने के लिए कई बड़े कदम उठाने और लाखों बेरोजगारों को रोजगार मुहैया कराने का दावा कर रही है।
युवाओं को अधिक से अधिक स्वरोजगार करने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है, लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि देश में रेस्टोरेंट खोलने जैसा स्वरोजगार करना भी बहुत आसान नहीं है।
आपको इतनी सरकारी प्रक्रियाओं से गुजरना होगा कि उसके आगे आप हार मानकर स्वरोजगार करने का सपना छोड़ सकते हैं।
मुश्किल
दिल्ली सहित इन महानगरों में रेस्टोरेंट खोलना है मुश्किल
देश के महानगरों की बात करें तो एक रेस्टोरेंट खोलने के लिए बेंगलुरू में सबसे ज्यादा 36, दिल्ली में 26 और मुंबई में 22 दस्तावेज जमा कराने होते हैं।
हालांकि, आपको जानकर हैरानी होगी कि दिल्ली और कोलकाता में रेस्टोरेंट संचालन के लिए आवेदनकर्ता को एक पुलिस ईटिंग हाउस लाइसेंस भी लेना होता है। इसके लिए कुल 45 दस्तावेज जमा कराने होते हैं। इन्हें जमा कराने के बाद ही आवेदनकर्ता को लाइसेंस जारी किया जाता है।
परिभाषा
क्या है ईटिंग हाउस लाइसेंस?
ईटिंग हाउस लाइसेंस का अर्थ यह है कि यदि किसी व्यक्ति को दिल्ली या कोलकाता में खाने-पीने के सामान की बिक्री और लोगों को बैठाकर खिलाने के लिए कोई प्रतिष्ठान संचालित करना है तो उसे नेशनल रेस्टॉरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया के साथ पुलिस से भी उसकी स्वीकृति लेनी होती है।
इसमें पुलिस, रेस्टोरेंट संचालक की पृष्ठभूमि के साथ प्रतिष्ठान मालिक और उससे जुड़े लोगों का भी सत्यापन करती है। सभी चीजें साफ होने के बाद लाइसेंस जारी किया जाता है।
दस्तावेज
ईटिंग हाउस लाइसेंस के लिए जरूरी हैं ये दस्तावेज
ईटिंग हाउस लाइसेंस के लिए आवेदक को पहचान पत्र, पता, स्वामित्व, निदेशक और बोर्ड सदस्य की जानकारी, दुकान पट्टा, पानी और बिजली बिल, बिजली सुरक्षा, लिफ्ट सुरक्षा, भवन कर, रूपांतरण शुल्क, पार्किंग शुल्क, जल आपूर्ति सुविधा, जनरेटर सेट, अपशिष्ट प्रबंधन, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, श्रम विभाग का पंजीकरण, FSSAI प्रमाण पत्र, जीएसटी पंजीकरण, पैन, कीट नियंत्रण उपाय, धूम्रपान संबंधी विवरण, बैठक क्षमता, स्मोकिंग क्षेत्र सहित कुल 45 दस्तावेज जमा कराने होते हैं।
विडंबना
रेस्टोरेंट की जगह आसानी से मिल सकता है बंदूक का लाइसेंस
इसे विडंबना कहा जाए या सरकार की अनदेखी, लेकिन देश में रेस्टोरेंट खोलने की तुलना में बंदूक का लाइसेंस लेना ज्यादा आसान है।
देश में यदि कोई बेरोजगार युवा रेस्टोरेंट खोलना चाहे तो सरकार की ओर से उससे 36 तरह के अलग-अलग दस्तावेज मांगे जाते हैं, जबकि यदि कोई व्यक्ति बंदूक का लाइसेंस लेना चाहे तो उसे महज 19 दस्तावेज ही जमा कराने होते हैं।
ऐसे में कोई भी बेरोजगार युवा बंदूक थामकर अपराध के रास्ते पर भटक सकता है।
दस्तावेज
बंदूक के लाइसेंस के लिए आवश्यक दस्तावेज
ईटिंग हाउस लाइसेंस के उलट यदि किसी को बंदूक का लाइसेंस लेना हो तो उसे दो फोटो, जन्म प्रमाण पत्र, पहचान पत्र, घर का पता, शूटिंग दक्षता, हथियार सुरक्षा व रख-रखाव प्रमाण पत्र, शैक्षणिक योग्यता प्रमाण पत्र, मानसिक स्वास्थ्य प्रमाण पत्र, जंगली व खूंखार जानवरों पर हमले के लिए वन विभाग स्वीकृति, आयकर रिटर्न, पुलिस सत्यापन, लाइसेंस स्थानांतरण के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र, मनोनीत व्यक्ति का सत्यापन सहित महज 19 दस्तावेज जमा कराने होते हैं।
मुद्दा
आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में सामने आई अड़चनें
दिल्ली सहित देश के अन्य महानगरों में रेस्टोरेंट संचालन के लिए इतनी भारी संख्या में मांगे जाने वाले दस्तावेजों को लेकर गत शुक्रवार को संसद में प्रस्तुत की गई आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में यह मुद्दा उठाया गया था।
रिपोर्ट में कहा गया था कि सर्विस सेक्टर को कई नियामकीय अड़चनों का सामना करना पड़ रहा है। रेस्टोरेंट रोजगार का एक प्रमुख स्रोत है और पूरी दुनिया में इसमें ग्रोथ देखी जा रही है, लेकिन भारत में इसमें काफी अड़चने हैं।
दिक्कतें
रेस्टोरेंट खोलने के मामले में भारत में सबसे ज्यादा अड़चनें
आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार रेस्टोरेंट और बार खोलने के मामले में पूरी दुनिया के मुकाबले भारत में सबसे ज्यादा अड़चनें हैं। यहां रेस्टोरेंट खोलना किसी के लिए भी आसान काम नहीं है, जबकि चीन और सिंगापुर में महज चार दस्तावेज जमा कराकर ही रेस्टोरेंट खोला जा सकता है।
इसके उलट भारत में कई अनिवार्य लाइसेंस लेने होते हैं। भारत में लाइसेंस केवल सरकारी पोर्टल पर ही दिया जाता है, जबकि न्यूजीलैंड में निजी संस्थाओं को काम सौंपा गया है।