
विधानसभा चुनावों से पहले चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के पुलिस प्रमुख को हटाया
क्या है खबर?
चुनाव आयोग ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (DGP) वीरेंद्र को उनके पद से हटा दिया है। बताया जा रहा है कि पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट मिलने के बाद आयोग ने यह कार्रवाई की है।
आयोग ने बंगाल के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर वीरेंद्र की जगह 1987 बैच के IPS अधिकारी पी नीरजनयन को DGP बनाने को कहा है।
बता दें कि पश्चिम बंगाल में इसी महीने 27 तारीख से विधानसभा चुनाव शुरू होने जा रहे हैं।
जानकारी
आज सुबह 10 बजे तक देनी होगी आदेश पर अमल की रिपोर्ट
आदेश में कहा गया है कि कि वीरेंद्र को ऐसे किसी पद पर तैनात नहीं किया जा सकता, जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से विधानसभा चुनावों से जुड़ा होगा। आयोग ने बुधवार सुबह 10 बजे तक इस आदेश पर अमल की रिपोर्ट मांगी है।
विधानसभा चुनाव
कौन हैं पश्चिम बंगाल में भेजे गए विशेष पर्यवेक्षक?
इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि विशेष पर्यवेक्षक अजय वी नायक और पुलिस पर्यवेक्षक विवेक दुबे की रिपोर्ट मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई है।
1984 बैच के IAS अधिकारी नायक बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी रह चुके हैं। उनके साथ 1981 बैच के आंध्र प्रदेश कैडर के IPS अधिकारी दुबे को पश्चिम बंगाल का पुलिस पर्यवेक्षक बनाया गया है। उन्हें 2019 लोकसभा चुनावों के दौरान भी यह जिम्मेदारी देकर पश्चिम बंगाल भेजा गया था।
पश्चिम बंगाल
इस तरह की दूसरी कार्रवाई
पश्चिम बंगाल में हालिया दिनों में चुनाव आयोग की यह ऐसी दूसरी कार्रवाई है।
DGP बदलने से पहले आयोग ने बीती 27 फरवरी को पश्चिम बंगाल के ADG (कानून व्यवस्था) जावेद शमीम को उनके पद से हटाकर अग्निशमन सेवाओं का महानिदेशक बनाया था। उनकी जगह जगमोहन को ADG (कानून व्यवस्था) बनाया गया था, जो पहले अग्निशमन सेवाओं के महानिदेशक थे।
DGP को हटाने पर तृणमूल कांग्रेस समेत सभी राजनीतिक दलों ने प्रतिक्रियाएं दी हैं।
प्रतिक्रियाएं
TMC और भाजपा ने क्या कहा?
तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद सौगत रॉय ने कहा, "DGP अच्छे अधिकारी थे। उनको हटाया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। हमें ऐसा लग रहा है कि चुनाव आयोग वही कर रहा है, जो भाजपा इससे करवाना चाहती है। इससे फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि हम चुनाव जीत रहे हैं।"
वहीं भाजपा नेता समिक भट्टाचार्य ने कहा, "यह कार्रवाई जरूरी थी क्योंकि पश्चिम बंगाल पुलिस राजनीति के प्रभाव में है। पश्चिम बंगाल पुलिस हमारी FIR दर्ज नहीं कर रही थी।"
सवाल
पुलिस के DG को चुनाव आयोग ने क्यों हटाया?
कुछ लोगों के मन में यह सवाल आ सकता है कि जब पुलिस राज्य सरकार के अधीन होती है तो चुनाव आयोग DGP को कैसे हटा सकता है? इसका जवाब आचार संहिता है।
दरअसल, राज्य में चुनावों की घोषणा होते ही आचार संहिता लागू हो जाती है। इसके बाद राज्य सरकार के अधीन काम करने वाले कर्मचारी आचार संहिता हटने तक चुनाव आयोग के तहत काम करते हैं। ऐसा चुनावों की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए किया जाता है।
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पश्चिम बंगाल में कब है चुनाव?
पश्चिम बंगाल में 27 मार्च से आठ चरणों के विधानसभा चुनावों की शुरुआत हो जाएगी।
राज्य में 27 मार्च को पहले चरण, 1 अप्रैल को दूसरे चरण, 6 अप्रैल को तीसरे, 10 अप्रैल को चौथे, 17 अप्रैल को पांचवें, 22 अप्रैल को छठे, 26 अप्रैल को सातवें और 29 अप्रैल को आठवें और आखिरी चरण की वोटिंग होगी। कुछ जिलों में भी कई चरणों में वोटिंग होगी।
2 मई को पता चलेगा कि पश्चिम बंगाल में अगली सरकार किसकी होगी।