
कोरोना: ऑस्ट्रेलिया में 'कोविशील्ड' के बाद अब 'कोवैक्सिन' को मंजूरी, बिना रोक-टोक यात्रा कर सकेंगे भारतीय
क्या है खबर?
कोरोना वायरस के खिलाफ हैदराबाद स्थित भारत बायोटक द्वारा तैयार की गई वैक्सीन 'कोवैक्सिन' की दोनों खुराक लेने के बाद विदेश जाने की योजना बना रहे लोगों और छात्रों के लिए राहत की खबर है।
ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने देश में अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को प्रवेश देने के लिए बनाई जा रही योजना के तहत सोमवार को कोवैक्सिन को 'मान्यता प्राप्त वैक्सीन' के रूप में घोषित किया है।
ऐसे में अब कोवैक्सिन के साथ ऑस्ट्रेलिया जाने का रास्ता खुल गया है।
मंजूरी
ऑस्ट्रेलिया के कोवैक्सिन के साथ BBIBP-CorV को भी दी मंजूरी
NDTV के अनुसार, ऑस्ट्रेलियाई सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने सोमवार को बताया कि थैरेप्यूटिक गुड्स एडमिनिस्ट्रेशन (TGA) ने सोमवार को अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए भारत की कोवैक्सीन और चीन की सिनोफार्म कंपनी की BBIBP-CorV वैक्सीन को मान्यता देने का फैसला लिया है।
इससे अब कौवेक्सीन ले चुके भारतीय यात्रियों को अंतरराष्ट्रीय उड़ान भरने में आसानी होगी।
इसके अलावा वहां यात्रियों को किसी भी तरह की पाबंदी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
शर्त
TGA ने यात्रा को लेकर यह रखी है शर्त
TGA ने कोवैक्सिन की दोनों खुराक लेने वाले 12 साल या उससे अधिक उम्र के लोगों को ही ऑस्ट्रेलिया में प्रवेश की अनुमति दी है।
इसी तरह चीन की BBIBP-CorV वैक्सीन की दोनों खुराक ले चुके 18 से 60 साल की उम्र के लोगों को प्रवेश की अनुमति दी है।
बता दें TGA ने दोनों वैक्सीनों को मान्यता देने से पहले वैक्सीन से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी हासिल कर उसका अध्ययन किया था। उसके बाद अनुमति देने का निर्णय किया है।
मान्यता
ऑस्ट्रेलिया ने पिछले महीने दी थी कोविशील्ड को मान्यता
बता दें कि ऑस्ट्रेलिया ने गत 1 अक्टूबर को सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) द्वारा तैयार की गई वैक्सीन 'कोविशील्ड' को मान्यता दी थी।
उस दौरान ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने कहा था कि अंतरराष्ट्रीय यात्रा को सुगम बनाने के लिए कोविशील्ड को मान्यता दी गई है।
ऑस्ट्रेलिया में अब तक कॉर्मिनेटी (फाइजर), वैक्स्जैव्रिया (एस्ट्राजेनेका), कोविशील्ड (एस्ट्राजेनेका), स्पाइकवैक्स (मॉडर्ना), जैनसेन (जॉनसन एंड जॉनसन), कोरोनावैक (सिनोवैक) को मान्यता मिली हुई थी।
दबाव
भारत ने छात्रों को प्रवेश देने के लिए ऑस्ट्रेलिया पर बनाया है दबाव
बता दें कि भारत पिछले काफी समय से ऑस्ट्रेलिया की सरकार पर भारतीय यात्रियों, विशेष रूप से विभिन्न यूनिवर्सिटी और शैक्षणिक संस्थानों में पाठ्यक्रमों में शामिल होने के इच्छुक छात्रों के लिए यात्रा की अनुमति देने के लिए दबाव बनाता रहा है।
ऑस्ट्रेलिया में विदेशी छात्रों के लिए भारत, चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा स्रोत है। 2019-20 के दौरान भारतीय छात्रों ने ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था में 6.6 बिलियन डॉलर का योगदान दिया था।
जानकारी
कोवैक्सिन को ओमान में भी मिल चुकी है अनुमति
बता दें कि कोवैक्सिन को गत बुधवार को ओमान में भी स्वीकृत कोरोना वैक्सीनों की सूची में शामिल किया चुका है। ऐसे में अब कोवैक्सिन की खुराक के साथ ओमान जाने वाले भारतीयों को अनिवार्य क्वारंटाइन में नहीं रहना पड़ेगा।
मंजूरी
कोवैक्सिन को अभी तक नहीं मिली है WHO से मंजूरी
बता दें कि कोवैक्सिन को अभी तक भी विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने वैश्विक स्तर पर आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी नहीं दी है।
गत 27 अक्टूबर को वैक्सीन पर निर्णय लेने के लिए हुई WHO के तकनीकी सलाहकार समूह (TAG) की बैठक में इस पर निर्णय नहीं हो पाया था। TAG ने कंपनी से अतिरिक्त स्पष्टीकरण मांगे हैं।
अब 3 नवंबर को फिर से होने वाली TAG की बैठक में वैक्सीन की मंजूरी को लेकर निर्णय किया जाएगा।
प्रभावी
गंभीर लक्षणों के खिलाफ 93.4 प्रतिशत प्रभावी है कोवैक्सिन
भारत बायोटेक ने 3 जुलाई को वैक्सीन के तीसरे चरण के ट्रायल के परिणाम जारी किए थे।
इसमें कहा गया था कि कोवैक्सिन महामारी के गंभीर लक्षणों के खिलाफ 93.4 प्रतिशत, हल्के और मध्यम लक्षणों के खिलाफ 78 प्रतिशत, डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ 65 प्रतिशत और बिना लक्षणों वाले मरीजों पर 63 प्रतिशत प्रभावी है।
कंपनी ने देशभर के 25 अस्पतालों में 18-98 साल के 25,800 वॉलेंटियर्स पर वैक्सीन का तीसरे चरण का ट्रायल किया था।