
चीन की काट के लिए भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच हवाई अड्डों के प्रयोग का समझौता
क्या है खबर?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन के साथ शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया। प्रधानमंत्री मोदी का ये पहला वर्चुअल शिखर सम्मेलन था।
इसमें दोनों देशों के बीच सात समझौते पर हस्ताक्षर हुए जिनमें एक-दूसरे के सैन्य अड्डों का इस्तेमाल करने से संबंधित समझौता भी शामिल है।
दोनों देशों के इस समझौते को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को नाकाम करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
समझौता
ईंधन भरने और रखरखाव के लिए एक-दूसरे के अड्डों का इस्तेमाल कर सकेंगे दोनों देश
दोनों देशों के बीच हुए इस 'म्युचल लॉजिस्टिक्स सपोर्ट एग्रीमेंट' समझौते के तहत भारत और ऑस्ट्रेलिया के जंगी जहाज और लड़ाकू विमान एक-दूसरे के सैन्य अड्डों का इस्तेमाल ईंधन भरने और रखरखाव संबंधी सुविधाओं के लिए कर सकेंगे।
इससे पहले भारत अमेरिका के साथ भी ऐसा ही एक समझौता कर चुका है।
इन समझौतों को हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के इलाके में चीन के बढ़ते सैन्य और आर्थिक दबदबे की काट के तौर पर देखा जा रहा है।
महत्व
इसलिए महत्वपूर्ण है समझौता
इस समझौते की बदौलत ऑस्ट्रेलिया अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में स्थित भारत के नौसैनिक अड्डे और भारत इंडोनेशिया के पास स्थित ऑस्ट्रेलिया के नौसैनिक अड्डे का इस्तेमाल कर सकेगा।
इससे दोनों देश हिंद महासागर स्थित मलक्का स्ट्रेट और आसपास के इलाके पर कड़ी नजर रख सकेंगे। अफ्रीका और एशिया के देशों के लिए चीन का माल इसी रास्ते से जाता है। चीन आर्थिक और सैन्य लाभ के लिए इस पूरे इलाके पर अपना दबदबा चाहता है।
विवाद
दोनों देशों की चल रही चीन से खटपट
मौजूदा समय की बात करें तो भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों के ही संबंध चीन से खराब चल रहे हैं।
भारत और चीन की सेनाएं लद्दाख पर चार जगहों पर आमने-सामने हैं और सीमा विवाद को लेकर दोनों देशों के सैनिकों के बीच झड़पें भी हुई हैं।
वहीं चीन और ऑस्ट्रेलिया कई वजहों से आमने-सामने हैं। हिंद महासागर में चीन ऑस्ट्रेलिया के पास एक नौसैनिक अड्डा बनाने की सोच रहा है। इसके अलावा दोनों देशों के आर्थिक रिश्ते भी खराब हैं।
जानकारी
ऑस्ट्रेलिया को अमेरिका का कुत्ता कह चुका है चीन
ऑस्ट्रेलिया और चीन के बीच विवाद इतना बढ़ गया है कि जब ऑस्ट्रेलिया ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की बैठक में कोरोना वायरस की उत्पत्ति की जांच की मांग का समर्थन किया तो चीन ने उसे अमेरिका का कुत्ता करार दे दिया।
रिश्ते
ऑस्ट्रेलिया के नौसैनिक अभ्यास में हिस्सा ले सकता है भारत
कोरोना वायरस संकट के बीच इलाके में अपना प्रभुत्व बढ़ाने की चीन की इन्हीं कोशिशों को देखते हुए भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच हुआ ये समझौता बेहद अहम है।
इसके अलावा भारत ऑस्ट्रेलिया के वार्षिक नौसैनिक अभ्यास में शामिल होने पर भी विचार कर रहा है। इस अभ्यास में अमेरिका और जापान भी शामिल होते हैं।
चीन ने 2007 में ऐसे ही एक अभ्यास का विरोध किया था और इस बार भी उसकी ओर से विरोध किया जा सकता है।
जानकारी
इन समझौतों पर भी हुए हस्ताक्षर
सम्मेलन में दोनों देशों के बीच स्वास्थ्य, व्यापार और रक्षा के क्षेत्र में अन्य छह समझौते भी हुए। इनमें रणनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण खनिजों की खुदाई, रक्षा संबंधी विज्ञान और तकनीक में सहयोग और साइबर और साइबर संबंधी तकनीक में सहयोग के समझौते शामिल हैं।
बयान
प्रधानमंत्री मोदी बोले- दोनों देशों के संबंध विश्व के लिए अहम
बैठक में मोदी ने कहा, "भारत ऑस्ट्रेलिया के साथ अपने संबंधों को व्यापक तौर पर और तेज गति से बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। यह न सिर्फ दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र और विश्व के लिए भी आवश्यक है।" उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के इस दौर में दोनों देशों के संबंधों की अहमियत और बढ़ जाती है।
वहीं मॉरिसन ने कहा कि व्यापक रणनीतिक साझेदारी दोनों देशों के संबंधों को नए स्तर पर ले जाएगी।