
ऑफलाइन ही होंगे CBSE और CISCE बोर्ड एग्जाम, सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की याचिका
क्या है खबर?
शैक्षणिक वर्ष 2022 में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) तथा काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (CISCE) टर्म-1 परीक्षाएं हाइब्रिड मोड में कराने की छात्रों की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को खरिज कर दी।
जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस सीटी रविकुमार की बेंच ने अधिवक्ता संजय हेगड़े के माध्यम से दायर याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि इस तरह के विलंबित स्तर पर इस पर विचार नहीं किया जा सकता है।
याचिकाकर्ता
याचिकाकर्ताओं को कोर्ट ने आखिरी मिनट में रुकावट के खिलाफ चेतावनी दी
कोर्ट ने कहा कि CBSE टर्म-1 की परीक्षाएं शुरू हो चुकी हैं और CISCE की परीक्षाएं अगले सप्ताह होंगी। ऐसे में परीक्षाओं के आयोजन में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप परीक्षाओं के आयोजन की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं को आखिरी मिनट में रुकावट के खिलाफ चेतावनी दी और कहा कि शिक्षा प्रणाली के साथ खिलवाड़ मत करो। अधिकारी अपना काम अच्छे से करें। अब बहुत देर हो चुकी है।
जानकारी
CBSE 10वीं, 12वीं बोर्ड परीक्षाएं शुरू
बता दें कि CBSE की 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाएं 16 नवंबर से और 10वीं कक्षा की परीक्षाएं 17 नवंबर से शुरू हो चुकी हैं। वहीं, CISCE की 10वीं बोर्ड परीक्षा 29 नवंबर से शुरू होंगी और 12वीं बोर्ड परीक्षाएं 22 नवंबर से शुरू होंगी।
सुनवाई
सुनवाई के दौरान CBSE ने क्या पक्ष रखा?
CBSE की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायमूर्ति एएम खानविल्कर और न्यायमूर्ति सीटी रविकुमार की पीठ को बताया कि ऑफलाइन माध्यम से बोर्ड परीक्षाएं कराने के लिए सभी एहतियात बरते गए हैं और परीक्षा केंद्रों की संख्या 6,500 से बढ़ाकर 15,000 तक कर दी गयी है।
पीठ ने कहा कि वह उम्मीद और विश्वास करती है कि प्राधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि परीक्षा के दौरान कुछ अप्रिय नहीं हो।
फायदा
याचिका में हाइब्रिड मोड में परीक्षा कराने का क्या फायदा बताया था?
याचिका में कहा गया था कि परीक्षाएं हाइब्रिड मोड में आयोजित की जाएं जिसमें ऑफलाइन और ऑनलाइन परीक्षा के बीच चयन करने का विकल्प हो।
याचिका में कहा गया, "सहमति महत्वपूर्ण है क्योंकि परीक्षा सीधे याचिकाकर्ताओं के मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित है। निष्पक्ष मूल्यांकन सुनिश्चित करने के लिए अनुकूल और स्वैच्छिक माहौल की आवश्यकता होती है। यह सामान्य ज्ञान है कि कोविड महामारी की तीसरी लहर की भविष्यवाणी की गई है।''
तर्क
याचिकाकर्ताओं ने क्या तर्क दिये थे?
याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया था कि ऑफ़लाइन परीक्षा ने उन्हें कोविड-19 संक्रमण के जोखिम में डाल दिया है।
याचिका में कहा गया है, "ऑफ़लाइन परीक्षाओं के माध्यम से लगातार संपर्क में आने से कोविड-19 में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है, जो मनमाना और स्वास्थ्य के अधिकार का उल्लंघन है।"
उन्होंने कहा कि परीक्षा का हाइब्रिड मोड समय की जरूरत है, क्योंकि यह सामाजिक दूरी को बेहतर बनाता है, लॉजिस्टिक बाधाओं पर तनाव कम करता है।