
#NewsBytesExplainer: गाड़ियों के लिए क्यों जरूरी है टॉर्क? जानिए इसका क्या है मतलब
क्या है खबर?
एक दमदार इंजन की पहचान उसके टॉर्क से की जाती है। अधिक टॉर्क जनरेट करने वाले इंजन में पावर ज्यादा होती है और उसकी परफॉर्मेंस भी बेहतर होती है।
हालांकि, अभी भी कई लोग कार खरीदते समय इस बात पर ध्यान नहीं देते कि गाड़ी में मौजूद इंजन कितना टॉर्क जनरेट करता है।
ऐसे लोगों के लिए हम कार गाइड में टॉर्क की जानकारी लेकर आये हैं।
आइये जानते हैं यह क्या है और इसे कैसे मापा जाता है।
टॉर्क
टॉर्क क्या है?
किसी भी गाड़ी के इंजन की क्षमता को टॉर्क में मापा जाता है। टॉर्क यह दर्शाता है कि इंजन कितना मजबूत है। यह रोटेशनल फोर्स है, जो एक्सेलरेशन में बदल जाती है। टॉर्क को न्यूटन मीटर (Nm) में मापा जाता है।
जब भी हम गाड़ी स्टार्ट करके इसे चलाना शुरू करते हैं तो टॉर्क ही यह निर्धारित करता है कि गाड़ी का पिकअप कितना होगा या ऊंचाई वाली जगहों पर यह किस स्पीड से चढ़ेगी।
माप
कैसे मापा जाता है टॉर्क?
किसी भी गाड़ी के टॉर्क को मापने के लिए आमतौर पर डायनमोमीटर का उपयोग किया जाता है। इसे डायनो नाम से भी जाना जाता है। इसे इंजन की पावर और टॉर्क आउटपुट को सटीक रूप से मापने के लिए बनाया गया है।
डायनो डिवाइस की मदद से इंजन की रोटेशनल फोर्स को मापा जाता है, जो इंजन की क्रैंकशाफ्ट की स्पीड से पैदा होती है। इससे टॉर्क की भी जानकारी मिलती है।
गाड़ियां
इंजन के हिसाब से अलग-अलग हो सकता है टॉर्क
ईंधन के हिसाब से गाड़ियां अलग-अलग टॉर्क जनरेट करती हैं।
डीजल और पेट्रोल गाड़ियां: डीजल और पेट्रोल वाली गाड़ियों में ईंधन जलने पर पावर और टॉर्क जनरेट होता है। हालांकि, डीजल गाड़ियों में पेट्रोल इंजन की तुलना में अधिक टॉर्क जनरेट होता है।
CNG गाड़ियां: CNG इंजन वाली गाड़ियां ज्यादा पावरफुल नहीं होती। यानी CNG गाड़ियों से पेट्रोल इंजन से भी कम टॉर्क जनरेट होता है। इसलिए इनकी पिकअप भी डीजल और पेट्रोल गाड़ियों से कम होती है।
गाड़ियां
हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक गाड़ियां
इलेक्ट्रिक गाड़ियां: इलेक्ट्रिक गाड़ियों में किसी भी तरह का फ्यूल या गियरबॉक्स नहीं होता। इसमें इलेक्ट्रिक मोटर ही टॉर्क जनरेट करती है, जिससे गाड़ी चलती है। यही वजह है कि इलेक्ट्रिक गाड़ियों का पिकअप भी ज्यादा होता है।
हाइब्रिड गाड़ियां: हाइब्रिड गाड़ियों में पेट्रोल या डीजल इंजन के साथ-साथ इलेक्ट्रिक बैटरी और मोटर भी होती हैं। इस वजह से हाइब्रिड कारें अन्य इलेक्ट्रिक गाड़ियों से कम और पेट्रोल-डीजल गाड़ियों से अधिक टॉर्क जनरेट करती हैं।
अंतर
टॉर्क और BHP में क्या है अंतर
BHP किसी भी कार के इंजन या इलेक्ट्रिक मोटर द्वारा उत्पन्न होने वाली पावर को मापने की एक यूनिट है। जैसे ही आप अपनी गाड़ी के इंजन को स्टार्ट करते हैं तो ईंधन जलता है। इसके बाद पावर जनरेट होती है, जिससे इंजन का क्रैंकशाफ्ट चलने लगती है।
यहां से आगे का काम टॉर्क का होता है। यानी क्रैंकशाफ्ट के चलने से गाड़ी को पिकअप और स्पीड के लिए जो पावर मिलती है, उसे टॉर्क कहा जाता है।
जरूरी
टॉर्क से चुन सकते हैं सही वाहन
टॉर्क आपको एक सही कार चुनने में मदद करता है। अगर आपको अधिक माइलेज वाली गाड़ी की तलाश है तो हम आपको अधिक टॉर्क वाली गाड़ी न खरीदने की सलाह देते हैं।
दूसरी तरफ अगर आप एक पावरफुल गाड़ी की तलाश में हैं, जो तेज रफ्तार से चल सके तो आपको अधिक टॉर्क वाली कार लेनी चाहिए।
इसके अलावा जिन गाड़ियों का टॉर्क कम होता है वो किफायती होती हैं, वहीं अधिक टॉर्क वाली गाड़ियां महंगी होती हैं।
गाड़ियां
भारत में गाड़ियों में क्यों कम होता है टॉर्क?
गौरतलब है कि भारत में ग्राहकों को माइलेज की चिंता अधिक रहती है और इस वजह से अधिकांश लोग अधिक माइलेज देने वाली गाड़ी खरीदते हैं।
इसके अलावा पावरफुल इंजन वाली गाड़ियों पर अधिक टैक्स लगता है। इस वजह से भी भारत में कम टॉर्क वाली गाड़ियों की संख्या अधिक है।
कम टॉर्क वाली गाड़ियों की कीमत भी कम होती है और इस तरह ये आम आदमी के बजट में फिर बैठती हैं।