
मथुरा पुलिस का अजीबोगरीब दावा, कहा- चूहों ने खाया 581 किलो गांजा; कोर्ट ने मांगा सबूत
क्या है खबर?
उत्तर प्रदेश के मथुरा से पुलिस की एक बेहद हैरान करने वाली रिपोर्ट सामने आई है।
रिपोर्ट में यह दावा किया गया कि शेरगढ़ और हाईवे थाना पुलिस द्वारा पकड़ी गई 581 गांजे की खेप को पुलिस के गोदामों में रखवाया गया था, जो चूहों ने खा लिया है।
इससे कोर्ट भी हैरान हुआ और उसने चूहों की समस्या से निपटने के लिए आदेश देते हुए पुलिस को 26 नवंबर तक कोर्ट में सबूत पेश करने के लिए कहा।
पृष्ठभूमि
साल 2020 में जब्त किया गया था गांजा
मई, 2020 में शेरगढ़ और हाईवे पुलिस ने मिलकर गांजा की तस्करी कर रहे तीन लोगों को गिरफ्तार करते हुए 581 किलोग्राम गांजा जब्त किया था।
इसके बाद तीनों आरोपियों पर नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सबस्टेंस (NDPC) एक्ट के तहत मामला दर्ज कर हिरासत में भेज दिया गया।
18 नवंबर, 2022 को जब कोर्ट ने पुलिस को बरामद गांजा पेश करने के लिए आदेश दिया तो बताया गया कि थाने के गोदामों में मौजूद चूहों ने गांजा खा लिया।
आदेश
मामले में कोर्ट ने क्या कहा?
मथुरा पुलिस द्वारा गांजा नहीं पेश करने के पीछे के कारण से खुद अतिरिक्त जिला न्यायाधीश हैरान रह गए।
कोर्ट ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) अभिषेक यादव को चूहों के खतरे से छुटकारा पाने का आदेश दिया।
इसके अलावा कोर्ट ने दोनों थाना प्रभारियों को अगली सुनवाई यानी 26 नवंबर को चूहों द्वारा 581 किलोग्राम गांजा खाने के लिए सबूत पेश करने के आदेश भी दिए हैं।
बता दें कि 581 किलोग्राम गांजे की कीमत करीब 60 लाख रुपये है।
बयान
पुलिस ने कोर्ट के आदेशों का पालन करने का दिया आश्वासन
TOI के मुताबिक, मामले में विशेष लोक अभियोजक रणवीर सिंह ने कहा, "शेरगढ़ और हाईवे पुलिस स्टेशनों के SHO ने दावा किया कि गोदामों में रखे 581 किलोग्राम गांजा को चूहों ने नष्ट कर दिया। गोदामों में रखे गए पदार्थों की रक्षा करना मुमकिन नहीं है।"
वहीं मथुरा के कार्यकारी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) मार्तंड पी सिंह ने कहा कि कोर्ट के आदेशों के अनुपालन में समयबद्ध कार्रवाई की जाएगी।
NDPS एक्ट
न्यूजबाइट्स प्लस
देश की संसद ने 1985 में NDPS एक्ट पारित किया था। हिंदी में इसका नाम स्वापक औषधि और मन:प्रभावी अधिनियम, 1985 है।
इसका मुख्य उद्देश्य किसी भी नशीले पदार्थ की गैर कानूनी तरीके से खेती, उत्पादन, निर्माण, भंडारण, बिक्री, परिवहन या उपयोग को प्रतिबंधित करना है। इसमें जमानत मुश्किल होती है और इसका उल्लंघन करने पर कठोर कारावास और जुर्माने का प्रावधान है।
इसमें साल 1988, 2001 और 2014 में संशोधन भी किया जा चुका है।