
भारत-म्यांमार की सीमाओं के बीच स्थित है भारत का यह अनोखा गांव, जानिए इसकी खासियत
क्या है खबर?
भारत में ऐसे बहुत से गांव हैं जो खूबसूरत और शांतिपूर्ण वातावरण के लिए जाने जाते हैं। हालांकि, कुछ गांव ऐसे भी हैं जो विचित्र बातों के लिए मशहूर हैं।
ऐसा ही एक गांव नागालैंड के मोन जिले में भी स्थित है। इस गांव का नाम लोंगवा है और यह भारत और म्यांमार देशों की बीच बंटा हुआ है।
आइए आपको इस अनोखे गांव के बारे में विस्तार से बताते हैं।
अनोखा गांव
दोनों देशों में स्थित हैं निवासियों के घर और खेत
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मोन जिले में म्यांमार देश की सीमा पर बसा लोंगवा गांव जिले के सबसे बड़े गांवों में से एक है।
यह अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा में आधा भारत और आधा म्यांमार के हिस्से में आता है। इस वजह से यहां के लोगों के घर और खेत दोनों देशों में हैं।
यहां के मुखिया का घर तो दोनों देशों के बीच ऐसे बंटा है कि खाना तो म्यांमार में बनता है, लेकिन खाते भारत में बैठकर हैं।
नागरिकता
निवासियों को प्राप्त है दोहरी नागरिकता
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, इस अनोखे गांव की कुल आबादी 6,703 है और इन सभी को भारत के साथ-साथ म्यांमार देश की भी नागरिकता प्राप्त है।
यहां के निवासियों को बिना किसी प्रतिबंध के भारत और म्यांमार के बीच आने-जाने की आजादी होती है।
यहां के निवासी कोन्याक नागा जनजाति के हैं, जो भारत की आखिरी हेड हंटर्स हैं। साल 1960 में यह प्रथा समाप्त हो गई थी।
पर्यटक
जनजाति की संस्कृति और परंपरा को जानने के लिए आते हैं पर्यटक
कई पर्यटक मोन जिले में कोन्याक नागाओं की संस्कृति और परंपरा के बारे में जानने के लिए आते हैं।
इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बसने और भारत का सबसे आखिरी गांव होने के नाते भारी संख्या में पर्यटक लोंगवा गांव का भी दौरा करते हैं।
बता दें कि लोंगवा का अंघ हाउस वहां स्थित 7 अंघ हाउसों में से एक है। यह अंघ भारत की तरफ के 3 गांवों और म्यांमार की तरफ के 5 गांवों को नियंत्रित करते हैं।
अन्य मामला
महाराष्ट्र-तेलंगाना सीमा के बीच बसा है पवार परिवार का घर
इसी तरह एक अनोखा घर भारत के महाराष्ट्र और तेलंगाना की सीमाओं के बीच भी बसा हुआ है। इस घर में 13 सदस्यीय पवार परिवार रहता है।
इसमें कुल 8 कमरे हैं, जिसमें से 4 कमरे और रसोई तेलंगाना में हैं, वहीं 4 अन्य कमरे और हॉल महाराष्ट्र में स्थित हैं।
यह घर दोनों राज्यों की सीमा के बीच है। ऐसे में पवार परिवार को दोनों राज्यों को संपत्ति टैक्स भी देना पड़ता है।