
जासूसी मामले में व्हाट्सऐप का बयान, कहा- सरकार को मई में दी थी जानकारी
क्या है खबर?
भारतीय पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की जासूसी के मामले में मैसेजिंग ऐप व्हाट्सऐप ने कहा है कि उसने मई में भारत और दुनिया की दूसरी सरकारों को 'सिक्योरिटी इश्यू' के बारे में सूचना दी थी।
कंपनी की तरफ से कहा गया है कि उस वक्त इस मामले को सुलझा लिया गया था और जासूसी का शिकार हुए यूजर्स से भी संपर्क साधा गया था।
इससे पहले गुरुवार को सरकार ने इस मामले में व्हाट्सऐप से जवाब मांगा था।
प्रतिक्रिया
व्हाट्सऐप के जवाब पर सूत्रों ने क्या कहा?
सरकारी सूत्रों ने व्हाट्सऐप की इस बयान पर प्रतिक्रिया देेते हुए कहा कि कंपनी ने भारतीय एजेंसी CERT-IN को इस मामले की जानकारी दी थी, लेकिन यह जानकारी पूरी तरह तकनीकी थी और कंपनी ने यह नहीं बताया था कि भारतीय यूजर्स की प्राइवेसी का उल्लंघन किया जा रहा है।
सूत्रों ने कहा कि इसमें केवल तकनीकी समस्या की जानकारी थी। भारतीय यूजर्स की जासूसी को लेकर इसमें कुछ नहीं कहा गया था।
ट्विटर पोस्ट
मई में व्हाट्सऐप ने दी थी जानकारी
Sources: WhatsApp had given information to CERT-IN, a government agency as seen in the attached image in May. As is seen in the image, it is a communication in pure technical jargon without any mention of Pegasus or the extent of breach. pic.twitter.com/RPIgIntu1X
— ANI (@ANI) November 1, 2019
सवाल
जासूसी के पीछे किसका हाथ?
इस पर व्हाट्सऐप के सूत्रों ने कहा कि मई तक यह केवल एक 'सिक्योरिटी इश्यू' था। बाद में सिटीजन लैब के साथ मिलकर की गई जांच में पता चला कि यह पेगासस से जुड़ा मामला है और इससे यूजर्स की जासूसी की जा रही है।
सरकार और व्हाट्सऐप के विरोधाभासी बयानों के चलते अभी तक जासूसी का मामला उलझा हुआ है और इस बारे में अभी तक कोई सुराग नहीं मिले हैं कि यह जासूसी किसके कहने पर की गई।
नाराजगी
सरकार ने व्हाट्सऐप से जताई नाराजगी
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, जासूसी मामला सामने आने के बाद सरकारी अधिकारियों ने व्हाट्सऐप से नाराजगी जताई है।
उनका कहना है कि सरकार, व्हाट्सऐप और उसकी मालिकाना कंपनी फेसबुक के बीच कई बैठकें हुई हैं, लेकिन किसी भी बैठक में इन कंपनियों की तरफ से भारतीय नागरिकों की जासूसी का मामला नहीं उठाया गया।
अगस्त में केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने व्हाट्सऐप के तत्कालीन CEO और सितंबर में फेसबुक के उप प्रमुख से मुलाकात की थी।
बयान
सरकार ने जासूसी करवाने का आरोपों का किया खंडन
इस पूरे प्रकरण को लेकर जारी विवाद पर गृह मंत्रालय का बयान आया है।
मंत्रालय ने कहा कि सरकार पर लगाए गए निजता के हनन के आरोप पूरी तरह आधारहीन है। ऐसा कर सरकार की छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है।
मंत्रालय ने कहा कि भारत सरकार नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, जिसमें निजता का अधिकार भी शामिल है। ऐसे में निजता का हनन करने के जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।
जासूसी
भारत में लगभग दो दर्जन पत्रकारों और कार्यकर्ताओं को बनाया गया निशाना
गुरुवार सुबह खबरें आई थीं कि पेगासस के जरिए लगभग दो दर्जन पत्रकारों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों और वकीलों की जासूसी की गई है।
यह जासूसी मई महीने तक चली। गौरतलब है कि मई में देश में लोकसभा चुनाव हुए थे। सरकार ने इसे लेकर व्हाट्सऐप से जवाब मांगा है।
इसके लिए उसे 4 नवंबर तक का समय दिया गया है। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सरकार नागरिकों की जासूसी की खबरों को लेकर गंभीर है।
जानकारी
दुनियाभर में 1,400 लोगों को बनाया गया निशाना
व्हाट्सऐप के जरिए जासूसी की खबरें सामने आने के बाद दुनियाभर में विवाद छिड़ा हुआ है। दुनियाभर के लगभग 1,400 लोगों की जासूसी करने की खबरे हैं। इस पूरे मामले के बारे में आप यहां क्लिक कर विस्तार से जान सकते हैं।