
महाराष्ट्र: पति ने पत्नी को व्हाट्सऐप पर मैसेज भेजकर दिया तीन तलाक, मामला दर्ज
क्या है खबर?
मुस्लिम समाज में व्याप्त तत्काल तीन तलाक एक विवादित मुद्दा है और इसे महिला विरोधी माना जाता है।
हमें तीन तलाक के ऐसे मामले भी देखने को मिलते हैं, जब पति अपनी पत्नी को फोन या मैसेज के द्वारा तलाक दे देते हैं।
महाराष्ट्र के ठाणे में एक बार फिर से तीन तलाक का ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें पति ने पत्नी को व्हाट्सऐप मैसेज के जरिए ही तीन तलाक दे दिया।
पूरा मामला क्या है, आइए जानते हैं।
महिला की शिकायत
पैसे के लिए किया गया महिला को प्रताड़ित
25 वर्षीय पीड़ित महिला की शिकायत के अनुसार, उसकी और शेख की शादी मई 2014 में हुई थी और उनका एक 4 साल का बेटा भी है।
पिछले कुछ सालों में उसके पति और ससुरालवालों ने उसे पैसे के लिए प्रताड़ित किया और घर से बाहर निकल जाने को कहा।
उसके बाद से महिला एक संबंधी के घर रह रही थी।
12 मई को व्हाट्सऐप पर बहस के दौरान उसके पति ने उसे तीन तलाक के मैसेज भेज दिए।
पुलिस जांच
शिकायत के बाद पति फरार
इसके बाद महिला ने ठाणे पुलिस के पास अपनी शिकायत दर्ज कराई।
भोईवाडा पुलिस थाने के सीनियर इंस्पेक्टर कल्याण करपे ने बताया, "शिकायत के आधार पर हमने IPC के साथ-साथ मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारों का संरक्षण) कानून की धारा 4 के तहत महिला के पति नदीम शेख और उसकी माता-पिता के खिलाफ मामला दर्ज किया है।"
उन्होंने बताया कि मामला दर्ज किए जाने के बाद से ही शेख फरार है और उसकी तलाश की जा रही है।
तीन तलाक कानून
क्या है मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारों का संरक्षण) कानून?
बता दें कि मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारों का संरक्षण) कानून केंद्र की मोदी सरकार का एक महत्वाकांक्षी बिल है और इसे आमतौर पर 'तीन तलाक बिल' के तौर पर जाना जाता है।
अगस्त 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में तत्काल तीन तलाक को अवैध घोषित करते हुए सरकार को इस पर कानून लाने को कहा था। लेकिन सरकार अपने बिल को संसद में पारित नहीं करा पाई और अध्यादेश पर अध्यादेश लाती रही।
तीन तलाक अध्यादेश
एक साल में 3 बार तीन तलाक अध्यादेश लाई सरकार
तीन तलाक पर सबसे पहला अध्यादेश सितंबर 2018 में लाया गया, जिसके बाद इसे दो बार और लाया गया।
संसद के बजट सत्र में बिल को राज्यसभा में पारित कराने में नाकाम रहने पर यह रद्द हो गया था, जिसके बाद 21 मई को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने फिर से एक बार तीन तलाक पर अध्यादेश जारी किया था।
यह अध्यादेश 3 जून को इस सरकार का कार्यकाल समाप्त होने के साथ ही रद्द हो जाएगा।
कानून
क्या है अध्यादेश में?
तीन तलाक अध्यादेश के तहत तलाक-ए-बिद्दत यानी मुस्लिम महिलाओं को एक साथ तीन बार तलाक कहकर शादी तोड़ना गैरकानूनी होगा।
ऐसा करने वाले मुस्लिम पुरुष को तीन साल तक की सजा हो सकती है।
इस अपराध की सूचना पीड़ित मुस्लिम महिला या उसके किसी करीबी रिश्तेदार को देनी होगी, तभी यह अपराध संज्ञेय होगा।
कांग्रेस ने सत्ता में आने पर तीन तलाक कानून को रद्द करने की घोषणा की है।