
पॉलिटिकल हफ्ता: कांग्रेस पर लगातार हमले क्यों कर रही हैं ममता बनर्जी?
क्या है खबर?
यूं तो बीते एक हफ्ते में राजनीति से जुड़ी कई खबरें आईं, लेकिन एक खबर ऐसी थी जिसका देश की राजनीति पर दूरगामी असर हो सकता है।
ये खबर थी मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के तीखे हमलों की।
पूरे विपक्ष को एकजुट करने की कोशिश कर रही ममता ने आखिर कांग्रेस पर ये हमले क्यों किए और देश की राजनीति के लिए इसके क्या मायने हैं, आइए समझने की कोशिश करते है।
पृष्ठभूमि
सबसे पहले जानें ममता ने क्या कहा था?
सबसे पहले तो ममता बनर्जी अपने हाल ही के दिल्ली दौरे पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से नहीं मिलीं और इसके बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि हर बार सोनिया से मिलना अनिवार्य नहीं है।
इसके बाद अपने मुंबई के दौरे पर उन्होंने कहा कि देश में अब UPA (संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन) नहीं बचा है। UPA कांग्रेस के नेतृत्व वाला गठबंधन है।
उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस के कारण प्रधानमंत्री मोदी और ताकतवर होते जा रहे हैं।
जानकारी
ममता के सहयोगी प्रशांत किशोर ने भी राहुल गांधी पर साधा निशाना
इस बीच ममता बनर्जी के सहयोगी पूर्व राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा था। राहुल गांधी की तरफ इशारा करते हुए उन्होंने कहा था कि कांग्रेस का नेतृत्व करना किसी एक व्यक्ति का दैवीय अधिकार नहीं है।
रणनीति
क्या करना चाहती हैं ममता?
अप्रैल-मई के बंगाल चुनाव में भाजपा को बुरी तरह हराने के बाद ममता की राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाएं बढ़ गई हैं और वह राष्ट्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाना चाहती हैं।
उनकी योजना एक गैर-कांग्रेस गठबंधन खड़ा करने की है और इसके लिए वह विभिन्न पार्टियों से संपर्क भी कर रही हैं।
इसमें उन्हें ऐसी पार्टियों के साथ सफलता भी मिल रही है जो खुद कांग्रेस के नजदीक नहीं जाना चाहतीं। इनमें उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी भी शामिल है।
कारण
कांग्रेस पर ही क्यों निशाना साध रही हैं ममता?
अगर ममता को गैर-कांग्रेसी गठबंधन खड़ा करना है और खुद को इसके चेहरे के तौर पर पेश करना है तो उनके लिए जरूरी है कि वे बंगाल से बाहर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी उपस्थिति बढा़एं।
वो ऐसा कर भी रही हैं और ऐसा उन्होंने कांग्रेस की कीमत पर किया है। त्रिपुरा, गोवा, बिहार और उत्तर प्रदेश आदि में वो कांग्रेसी नेताओं को अपनी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) में शामिल कर चुकी हैं।
गोवा और त्रिपुरा में पार्टी चुनाव भी लड़ेगी।
सवाल
क्या अपने प्रयासों में सफल होंगी ममता?
TMC राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस की जगह ले पाएगी, इसकी संभावना कम है। इसके लिए क्षेत्रीय पार्टी से लेकर ममता के हिंदी की अच्छा वक्ता न होने जैसे कई कारण हैं।
हालांकि अगर वे पूर्वोत्तर समेत अन्य कुछ राज्यों में कांग्रेस की जगह ले लेती है तो वे राष्ट्रीय पटल पर मजबूत विकल्प के तौर पर उभर सकती हैं और गठबंधन की सरकार की सूरत में विपक्ष का चेहरा भी बन सकती हैं।
फिलहाल यही उनका लक्ष्य प्रतीत होता है।
असर
इसका राष्ट्रीय राजनीति पर क्या असर पड़ेगा?
अगर ममता अपने मंसूबों में कामयाब होती हैं तो वह भाजपा विरोधी गठबंधन के केंद्र के तौर पर उभर सकती हैं और विपक्ष की नई धुरी बन सकती हैं। इससे राष्ट्रीय राजनीति का स्वरूप पूरी तरह बदल जाएगा और कांग्रेस अलग-थलग पड़ जाएगी।
वैसे भी 2014 में नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय पटल पर उभार के बाद से कांग्रेस विपक्ष की सबसे कमजोर कड़ी साबित हुई है और सीधी लड़ाई में वह भाजपा को चुनौती नहीं दे पाई है।