
मुख्यमंत्री पद को लेकर भाजपा-शिवसेना में लड़ाई की संभावना, उद्धव ठाकरे बोले- केवल शिवसैनिक होगा मुख्यमंत्री
क्या है खबर?
भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे को लेकर हुआ मतभेद अभी सुलझा नहीं था कि अब मुख्यमंत्री पद को लेकर दोनों पार्टियां आमने-सामने आ गई हैं।
जहां भाजपा मुख्यमंत्री पद छोड़ना नहीं चाहती, वहीं शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे अपने बेटे आदित्य ठाकरे को मुख्यमंत्री के तौर पर देखना चाहते हैं।
अपना रवैया सख्त करते हुए उद्धव ने कहा है कि राज्य का मुख्यमंत्री एक शिवसैनिक (शिवसेना का नेता) ही होगा।
मुख्यमंत्री पद पर दावेदारी
काफी समय से उछल रहा है मुख्यमंत्री के लिए आदित्य का नाम
बता दें कि मुख्यमंत्री के तौर पर आदित्य ठाकरे का नाम पिछले काफी समय से उछल रहा है।
उद्धव ठाकरे की बहुत इच्छा है कि आदित्य अपनी राजनीतिक पारी की शुरूआत मुख्यमंत्री के तौर पर करें।
लेकिन अब तक वह सीधे तौर पर इस तौर पर कुछ कहने से बचते रहे हैं।
पिछले दिनों जब उनसे आदित्य के मुख्यमंत्री पद का दावेदार होने के बारे में सवाल किया गया था, तब उन्होंने इस पर कुछ ठोस जवाब नहीं दिया था।
बयान
उद्धव बोले, पिता बाल ठाकरे को किया था वादा
लेकिन अब शिवसेना के मुखपत्र 'सामना' को दिए अपने एक इंटरव्यू में उद्धव ने बिना आदित्य का नाम लिए स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वह उन्हें मुख्यमंत्री के पद पर देखना चाहते हैं।
उन्होंने कहा, "राज्य का मुख्यमंत्री एक शिवसैनिक ही होगा। ये वादा मैंने अपने पिता और गुरू स्वर्गीय बाल ठाकरे से किया था। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई इससे सहमत होता है या नहीं, मैं और पार्टी इस तरफ काम कर रहे हैं।"
मुख्यमंत्री की रेस में
गोलमोल जवाब देते रहे हैं उद्धव
इससे पहले जब भाजपा और शिवसेना में सीटों के बंटवारे को लेकर सहमति बनी थी, तब भी आदित्य के मुख्यमंत्री पद के दावेदार होने का सवाल उठा था।
इस पर मौजूदा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे उद्धव ने कहा था कि उनके बेटे के लिए ये अभी राजनीतिक सफर की शुरूआत है और राजनीति में आने का मतलब मुख्यमंत्री बनना नहीं है।
बता दें कि आदित्य चुनाव लड़ने वाले ठाकरे परिवार के पहले सदस्य हैं।
राजनीतिक मजबूरी
भाजपा से "डील" करने की स्थिति मेें नहीं है शिवसेना
उद्धव के बयानों में इस अंतर्विरोध को राज्य में शिवसेना की स्थिति से समझा जा सकता है।
कभी राज्य में 'बड़े भाई' की भूमिका में रही शिवसेना के लिए अब परिस्थितियां उलट गई हैं और अब भाजपा 'बड़े भाई' की भूमिका में है।
मौजूदा चुनाव सीटों के बंटवारे से भी ये साफ होता है, जिसमें भाजपा के हिस्से में 162 सीटें आई हैं, जबकि शिवसेना 126 सीटों से संतोष करना पड़ा है।
कारण
ये है उद्धव के विरोधाभासी बयानों का कारण
शीर्ष नेतृत्व के 'छोटे भाई' की भूमिका स्वीकार करने के कारण शिवसेना के कार्यकर्ता निराश हैं और उनमें उत्साह की कमी है।
ऐसे में चुनाव से पहले उनमें ऊर्जा फूंकने के लिए भी उद्धव आदित्य को मुख्यमंत्री बनाए जाने का शिगूफा फूंक रहे हैं।
हालांकि वह जानते हैं कि भाजपा इसके लिए कभी भी तैयार नहीं होगी, इसलिए खुलकर कुछ कहने से बच रहे हैं। यही उनके बयानों में अंतर्विरोध का कारण है।
जानकारी
शिवसेना के लिए मुख्यमंत्री पद नहीं छोड़गी भाजपा
हर तरफ से फायदे की स्थिति में होने के बाद भाजपा शिवसेना के लिए मुख्यमंत्री पद छोड़ेगी, इसके आसार न के बराबर हैं। खासकर ये देखते हुए कि उसके प्रति शिवसेना का रवैया विरोधियों से कम आलोचनात्मक नहीं रहता।