
नागरिकता संशोधन बिल: लोकसभा में अमित शाह का कांग्रेस पर तीखा हमला, जानें क्या कुछ कहा
क्या है खबर?
विवादित नागरिकता (संशोधन) बिल को लोकसभा में पेश करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर तीखा हमला किया।
शाह ने कहा कि इस बिल की जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि कांग्रेस ने धर्म के आधार पर देश का विभाजन किया था।
बिल के मुस्लिम विरोधी होने पर उन्होंने कहा कि ये बिल 0.001 प्रतिशत भी मुसलमानों के विरुद्ध नहीं है और इसमें कहीं भी मुसलमानों का ज़िक्र नहीं किया गया है।
हंगामा
शाह के बिल पेश करने से पहले विपक्ष ने किया हंगामा
इससे पहले अमित शाह ने जब बिल को पेश करने की अनुमति मांगी तो विपक्ष ने इस पर हंगामा शुरू कर दिया।
लोकसभा में कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने संविधान की प्रस्तावना का जिक्र करते हुए कहा कि ये बिल संविधान में दर्ज धर्मनिरपेक्षता, बराबरी और समाजवाद की भावना के खिलाफ है।
उन्होंने कहा कि ये कुछ नहीं बल्कि देश के अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने वाला एक कानून है।
प्रतिक्रिया
शाह बोले, मुस्लिमों के 0.001 प्रतिशत खिलाफ भी नहीं है बिल
अधीर रंजन के इस आरोप का जवाब देते हुए अमित शाह ने कहा कि ये बिल 0.001 प्रतिशत भी देश के मुस्लिमों के खिलाफ नहीं है।
इस बिल को लाने की जरूरत क्यों पड़ी इसकी वजह बताते हुए शाह ने कहा, "इस बिल की जरूरत पड़ी क्योंकि कांग्रेस ने धर्म के आधार पर इस देश का बंटवारा किया। ये इतिहास है। धर्म के आधार पर कांग्रेस देश का बंटवारा नहीं करती तो इस बिल की जरूरत नहीं पड़ती।"
नेहरू-लियाकत समझौता
नेहरू-लियाकत समझौते का किया जिक्र
1950 में भारत के प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री लियाकत अली के बीच हुए समझौते का जिक्र करते हुए शाह ने कहा, "इसमें अल्पसंख्यकों की हिफाजत की बात की गई थी। भारत में तो ये वादा पूरी तरह निभाया गया, लेकिन पाकिस्तान और बांग्लादेश में ऐसा नहीं हुआ।"
उन्होंने कहा कि इन दोनों देशों और अफगानिस्तान में पारसी, हिंदू, सिख और दूसरे समुदायों पर धार्मिक अत्याचार हुआ।
समानता का अधिकार
शाह बोले, अनुच्छेद 14 के खिलाफ नहीं है बिल
बिल के समानता का अधिकार देने वाले संविधान के अनुच्छेद 14 के उल्लंघन करने के सवाल का जवाब देते हुए शाह ने कहा कि ये बिल किसी भी दृषिटकोण से संविधान को ठेस नहीं पहुंचाता है।
उन्होंने विपक्ष से सवाल करते हुए पूछा, "अगर ये बिल अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करता है तो इस देश में अल्पसंख्यकों को विशेषाधिकार क्यों दिए जाते हैं?"
उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 14 संसद को उचित कारण से कानून बनाने से नहीं रोक सकता।
बयान
"किसी ने मुस्लिमों को नागरिकता का आवेदन करने से नहीं रोका"
इस बीच शाह ने साफ किया कि अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के मुस्लिमों को नागरिकता का आवेदन करने से किसी ने नहीं रोका है और नियमों के आधार पर देश की नागरिकता आगे भी दी जाएगी।
लोकसभा कार्यवाही
बिल के आज ही लोकसभा से पारित होने की उम्मीद
इस सारी बहस के बाद लोकसभा में वोटिंग हुई जिसमें बिल को पेश किए जाने के समर्थन में 293 सांसदों ने वोट किया जबकि 82 ने इसके खिलाफ वोट दिया। अब इस बिल पर आज शाम को बहस होगी।
कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, CPI(M), समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी समेत तमाम विपक्षी पार्टियां बिल का विरोध कर रही हैं।
हालांकि लोकसभा में भाजपा के भारी बहुमत को देखते हुए बिल के आसानी से पारित होने की उम्मीद है।
नागरिकता संशोधन बिल
क्या है नागरिकता संशोधन बिल?
नागरिकता (संशोधन) बिल के जरिए नागरिकता कानून, 1955 में संशोधन किया जाएगा।
प्रस्तावित संशोधन से पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक अत्याचार का सामना कर रहे हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्म के लोगों को आसानी से भारत की नागरिकता देने का रास्ता साफ होगा।
इन धार्मिक शरणार्थियों को छह साल भारत में रहने के बाद ही भारतीय नागरिकता दे दी जाएगी।
अभी भारत की नागरिकता हासिल करने से पहले 11 साल भारत में रहना अनिवार्य है।