
गणतंत्र दिवस: जानिए क्या है इस दिन को मनाने का कारण, महत्व और कुछ रोचक तथ्य
क्या है खबर?
आज पूरा देश 74वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। इसी दिन साल 1950 को भारत का संविधान लागू किया गया था, जो दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान है।
भारत का संविधान हमारे देश का सर्वोच्च कानून है। यह अधिकारों, सिद्धांतों और कर्तवर्यों का ऐसा ढांचा है, जिसका हर नागरिक और सरकारी संस्थान पालन करते हैं।
आइए आज इस मौके पर जानते हैं कि गणतंत्र दिवस मनाने की शुरुआत कैसे हुई और इसके क्या रोचक तथ्य हैं।
इतिहास
क्या है गणतंत्र दिवस का इतिहास?
15 अगस्त, 1947 को अंग्रेजों से आजादी मिलने के बाद 26 नवंबर, 1949 को संविधान सभा द्वारा भारत के संविधान को स्वीकार किया गया था।
इसके बाद दिल्ली में 26 जनवरी, 1950 को इसे लागू करके पहला गणतंत्र दिवस मनाया गया था।
इस दौरान देश के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने 21 तोपों की सलामी के साथ ध्वजारोहण किया था।
इस अवसर पर इर्विन स्टेडियम में गणतंत्र दिवस की पहली परेड भी आयोजित की गई थी।
तारीख
26 जनवरी का दिन ही क्यों चुना गया?
भारत का संविधान 26 नवंबर, 1949 को ही बनकर तैयार हो गया था और इसे संविधान सभा की मंजूरी भी मिल गई थी।
हालांकि, इसे लागू करने के लिए 26 जनवरी की तारीख चुनी गई थी, क्योंकि इसी दिन साल 1930 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने अंग्रेजों की गुलामी और शासन के खिलाफ 'पूर्ण स्वराज' का नारा दिया था।
इसी की याद में संविधान लागू करने के लिए 26 जनवरी, 1950 तक इंतजार किया गया था।
थीम
इस बार गणतंत्र दिवस कैसे मनाया जाएगा और इसकी थीम क्या है?
सरकार ने इस बार गणतंत्र दिवस समारोह को देश के शहीदों को समर्पित करते हुए उसकी थीम 'शहीदों को शत शत नमन' रखी है।
इसके खास मौके पर 5,000 शहीदों को परिजनों को 'शौर्य स्मृति' चिन्ह सौंपने की योजना भी बनाई है। इसकी जिम्मेदारी NCC कैडेट को सौंपी गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब नेशनल वॉर मेमोरियल पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे, उसी दौरान NCC कैडेट देश के अलग-अलग हिस्सों में शहीदों के घर 'शौर्य स्मृति चिन्ह' सौंपेंगे।
मुख्य अतिथि
पहले गणतंत्र दिवस समारोह में कौन थे मुख्य अतिथि?
गणतंत्र दिवस परेड के लिए हर साल एक विशेष राष्ट्र के नेता को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित भी किया जाता है।
1950 में भारत के पहले गणतंत्र दिवस समारोह में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्णो बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए थे।
इस बार गणतंत्र दिवस पर पहली बार मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे। इस दौरान मिस्र की सेना की एक सैन्य टुकड़ी भी गणतंत्र दिवस परेड में हिस्सा लेगी।