
नामीबिया से 8 चीतों को भारत क्यों लाया जा रहा, क्या है खास? जानिए जरुरी बातें
क्या है खबर?
भारत में विलुप्त हो चुके चीतों को फिर से बसाने की सरकार की योजना के तहत अफ्रीका के नामीबिया से लाए जा रहे आठ चीते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन (17 सितंबर) को मध्य प्रदेश के कूनो-पालपुर राष्ट्रीय उद्यान पहुंचेंगे।
उसी दिन प्रधानमंत्री मोदी इन चीतों को एक विशेष बाड़े में पिंजरों से आजाद करेंगे। ऐसे में भारत में 74 साल बाद फिर से चीतों की दहाड़ सुनने को मिलेगी।
आइये जानते हैं कि इन चीतों से जुड़ी अहम बातें।
विलुप्त
भारत में 1952 में चीतों को घोषित किया गया था विलुप्त
भारत में साल 1948 में आखिरी बार चीते देखने को मिले थे, लेकिन उसके बाद चीते नजर नहीं आए और फिर 1952 में चीतों को विलुप्त घोषित कर दिया गया था।
चीतों को दुनिया में सबसे तेज दौड़ने वाला जानवर माना जाता है और जंगली बिल्ली की श्रेणी में आता है।
सरकार ने 1970 के दशक में ऐतिहासिक श्रेणियों में शामिल जानवरों की प्रजातियों को फिर से देश में स्थापित करने की योजना बनाकर नामीबिया से एक करार किया था।
चीते
भारत आ रहे चीतों में पांच मादा और तीन नर शामिल
नामीबिया से किए करार में चीता पुनरुत्पादन कार्यक्रम शामिल था। ऐसे में अब सरकार ने वहां से आठ चीते लाने का निर्णय किया है।
पहले अंतरमहाद्वीपीय मिशन के हिस्से के रूप में लाए जा रहे इन आठ चीतों में पांच मादा और तीन नर चीते शामिल हैं।
इन चीतों को 16 सितंबर को नामीबिया की राजधानी विंडहोक से बोइंग 747-400 विमान में राजस्थान की राजधानी जयपुर लाया जाएगा। इसके बाद वहां से हेलीकॉप्टर के जरिए कूनो-पालपुर राष्ट्रीय उद्यान भेजा जाएगा।
योजना
चीतों को विमान में कैसे लाया जाएगा?
रेडियो कॉलर लगे सभी आठ चीतों को 114 सेमी X 118 सेमी X 84 सेमी माप वाले पिंजरों में रखा जाएगा। यात्रा से पहले दो-तीन दिन तक उन्हें भरपूर खाना दिया जाएगा, लेकिन उड़ान के दौरान उन्हें खाना-पानी नहीं दिया जाएगा।
उड़ान में उनके साथ तीन पशु चिकित्सक भी होंगे, जो उन पर नजर रखेंगे।
इसी तरह उड़ान को बीच में कहीं भी नहीं रोका जाएगा और पूरी रात सफर के बाद सीधे जयपुर हवाई अड्डे पर लाया जाएगा।
जानकारी
कितनी है भारत लाए जा रहे चीतों की उम्र?
नामीबिया स्थित एक अंतरराष्ट्रीय गैर-लाभकारी संगठन चीता संरक्षण कोष (CCF) के अनुसार, भारत लाए जा रहे आठ चीतों में से तीन नर चीतों की उम्र 4.5 से 5.5 साल के बीच है और पांच मादा चीतों की उम्र दो से पांच साल के बीच है।
खोज
कहां से लाए गए हैं नर चीते?
नर चीतों में दो भाई शामिल हैं जो जुलाई 2021 से नामीबिया के ओटजीवारोंगो के पास 58,000 हेक्टेयर निजी CCF रिजर्व में रह रहे हैं।CCF के कर्मचारियों ने उन्हें केंद्र के पास ट्रेकिंग में देखा था।
तीसरे नर चीते का जन्म 2018 में एरिंडी प्राइवेट गेम रिजर्व में हुआ था।
इसी तरह मादा चीतों में से एक दक्षिणपूर्वी नामीबिया में गोबाबिस के पास जलकुंड में कुपोषित हालत में पाई गई थी। उसके बाद से उसे रिजर्व में रखा गया है।
अन्य
मादा चीतों की खोज कैसे हुई?
दूसरी मादा चीता सितंबर 2020 से CCF केंद्र में रह रही है। जुलाई 2022 में एक और मादा चीता को CCF के नजदीकी फार्म पर पिंजरे में पकड़ा गया था।
तीसरी मादा चीता का जन्म अप्रैल 2020 में एरिंडी गेम रिजर्व में हुआ था।
चौथी मादा चीता को 2017 के अंत में नामीबिया के गोबाबिस के पास एक खेत में किसानों द्वारा पकड़ा गया था।
इसी तरह पांचवी मादा चीता को फरवरी 2019 में कामंजब के पास पकड़ा गया था।
जानकारी
बेहद करीबी दोस्त हैं चौथी और पांचवीं मादा चीता
CCF कर्मचारियों के अनुसार, सभी मादा चीता को रिजर्व के एक ही केंद्र में रखा गया था। इस दौरान चौथी और पांचवीं मादा चीता में काफी गहरी दोस्ती हो गई। उसके बाद से वह दोनों हर जगह एकसाथ ही नजर आने लगी थी।
योजना
सरकार ने बनाई है भारत में 50 चीतों को बसाने की योजना
आठ चीतों के कूनो राष्ट्रीय उद्यान पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें एक छोटे क्वारंटाइन बाडे में छोड़ेंगे। इन चीतों को उस बाड़े में अगले 30 दिनों तक रखा जाएगा और खाने में भैंसे का मीट दिया जाएगा।
उसके बाद उन्हें 6 वर्ग किमी वाले प्रीडेटर-प्रूफ सुविधा क्षेत्र में खुले में शिकार करने के लिए छोड़ दिया जाएगा।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार की अगले पांच सालों में भारत में 50 चीतों को फिर से बसाने की योजना है।