
कोरोना वायरस: क्या रूस में बनी वैक्सीन भारत में उपलब्ध होगी और उसमें कितना समय लगेगा?
क्या है खबर?
रूस ने कोरोना वायरस (COVID-19) का इलाज ढूंढने में लगी तमाम कंपनियों और वैज्ञानिकों को पछाड़ते हुए मंगलवार को इसकी वैक्सीन तैयार करने का दावा किया है।
यह पहली वैक्सीन है, जिसे लोगों पर इस्तेमाल के लिए मंजूरी मिली है। रेस में शामिल दूसरी संभावित वैक्सीन के बाजार में आने में अभी काफी समय बाकी है।
इस बीच सवाल उठता है कि क्या भारत में यह वैक्सीन उपलब्ध हो पाएगी और अगर हां तो इसमें कितना समय लगेगा?
वैक्सीन
रूस के दावे पर उठ रहे सवाल
मॉस्को के गामालेया इंस्टीट्यूट और रक्षा मंत्रालय ने मिलकर इस वैक्सीन को तैयार किया है।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इसे सुरक्षित बताते हुए कहा कि यह शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करती है।
हालांकि, विशेषज्ञ उनके दावे से सहमत नहीं है। उनका कहना है कि इंसानी ट्रायल के तीनों चरण पूरे किए बिना इस वैक्सीन को उतारा गया है।
रूस ने अभी तक सिर्फ इसके पहले चरण के ट्रायल के नतीजे जारी किए हैं।
वैक्सीन
उत्पादन और उपलब्धता कब तक?
गामालेया इंस्टीट्यूट के अलावा रूस के बड़े व्यापारिक समूहों में से एक सिस्तेमा (Sistema) भी इस वैक्सीन की खुराकों का उत्पादन करेगा।
रूस की उप प्रधानमंत्री तातयाना गोलिकोवा ने कहा है कि सितंबर तक इस वैक्सीन का औद्योगिक उत्पादन शुरू हो जाएगा।
वहीं रूस के उद्योग और व्यापार मंत्री डेनिस मेंतरूव ने कहा था कि इस साल हर महीने कई हजार खुराक का उत्पादन किया जाएगा। अगले साल हर महीने कई लाख खुराकों का उत्पादन होगा।
दावा
रूस ने कहा- दूसरे देशों से मिली 100 करोड़ खुराक की मांग
रूस के वैक्सीन के दावे को हर कोई संशय की निगाह से देख रहा है। ऐसी खबरें है कि इंग्लैंड इस वैक्सीन को अपने नागरिकों के लिए इस्तेमाल नहीं करेगा।
दूसरी तरफ रूस के अधिकारियों ने दावा किया है कि उन्हें दूसरे देशों से 100 करोड़ खुराक की मांग मिली है और हर साल 50 करोड़ वैक्सीन के उत्पादन को लेकर अंतरराष्ट्रीय समझौते हो चुके हैं।
हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि किन देशों ने वैक्सीन में रूचि दिखाई है।
सवाल
क्या यह वैक्सीन भारत आएगी?
इंडियन एक्स्प्रेस के मुताबिक, ऐसे दो तरीके हैं, जिनसे यह वैक्सीन भारत आ सकती है।
पहला यह है कि सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) रूस को भारत में दूसरे और तीसरे चरण के इंसानी ट्रायल करने को कह सकता है।
विदेश में बनी किसी भी वैक्सीन के भारत में इस्तेमाल के लिए यह प्रक्रिया जरूरी होती है।
इंसानी ट्रायल के दूसरे और तीसरे चरण इसलिए जरूरी होते हैं कि उनसे अलग-अलग समूहों पर वैक्सीन का असर देखा जाता है।
वैक्सीन
आपातकालीन मंजूरी भी एक विकल्प
दूसरा तरीका यह है कि मौजूदा हालातों को देखते हुए CDSCO को यह अधिकार है कि वह बिना इंसानी ट्रायल के अंतिम चरणों को पूरा किए हुए आपातकालीन मंजूरी दे सकता है।
यह कह सकता है कि वह रूस में हुए ट्रायल के नतीजों से संतुष्ट है और असाधारण हालातों को देखते हुए वैक्सीन के आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी दे रहा है।
कुछ समय पहले रेमडेसिवीर दवा को भी ऐसे ही मंजूरी दी गई थी।
कोरोना वायरस
वैक्सीन को आपातकालीन मंजूरी मिलना मुश्किल
हालांकि, रूस की वैक्सीन को ऐसे मंजूरी मिलना काफी मुश्किल लग रहा है।
इसकी वजह यह है कि रेमडेसिवीर पहले से कई दूसरी बीमारियों के लिए इस्तेमाल हो रही थी। साथ ही इसे केवल कोरोना संक्रमितों को दिया जाना था।
वहीं वैक्सीन के मामले में स्थितियां अलग हो जाती हैं। पहली बात तो यह कि वैक्सीन बिल्कुल नई है और दूसरी यह कि इसे आबादी के बड़े हिस्से पर प्रयोग किया जाना है।
वैक्सीन
उत्पादन को लेकर भी भारत के साथ कोई समझौता नहीं
भारत में रूसी वैक्सीन की उपलब्धता को लेकर दूसरा मामला उत्पादन को लेकर भी है।
किसी भी बीमारी की 50 प्रतिशत से ज्यादा वैक्सीन का निर्माण भारत में होता है।
माना जा रहा है कि दुनिया में कोरोना वायरस की वैक्सीन कहीं भी विकसित हो, लेकिन उनका उत्पादन भारत में होगा।
सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ऐसे कई समझौता कर चुका है, लेकिन रूस में विकसित हुई वैक्सीन का भारत में उत्पादन को लेकर ऐसा कोई समझौता नहीं हुआ है।