
शिवसेना मामला: सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के फैसले पर रोक लगाने से इनकार किया
क्या है खबर?
सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने एकनाथ शिंदे गुट को शिवसेना का नाम और चुनाव चिन्ह देने के चुनाव आयोग के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।
ठाकरे की याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा, "वे (शिंदे गुट) चुनाव आयोग के सामने पहले ही अपने दावे में सफल हो चुके हैं। हम अब आदेश पर रोक नहीं लगा सकते।"
कोर्ट
कोर्ट ने क्या कहा?
CJI डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने कहा, "चुनाव आयोग का आदेश पार्टी के चुनाव चिन्ह तक सीमित है और हम इस आदेश पर रोक लगाने का आदेश पारित नहीं कर सकते हैं। इस मामले में यथास्थिति बनी रहेगी और कोर्ट विशेष याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार है।"
सुनवाई में ठाकरे के वकील कपिल सिब्बल ने कहा, "हम नहीं चाहते कि पार्टी के बैंक अकाउंट और अन्य संपत्तियों पर कब्जा हो जाए और हम सुरक्षा चाहते हैं।"
याचिका
ठाकरे ने अपनी याचिका में क्या कहा है?
उद्धव ठाकरे ने अपनी याचिका में कहा गया है कि चुनाव आयोग दोनों गुटों के बीच एक तटस्थ मध्यस्थ के रूप में कार्य करने में विफल रहा है।
उनकी दलील है कि शिंदे गुट के विधायकों की सदस्यता रद्द होने का मामला सु्प्रीम कोर्ट में लंबित है और इस पर फैसला हुए बिना चुनाव आयोग उन्हें शिवसेना पर हक कैसे दे सकता है।
अपने एक बयान में वह चुनाव आयोग को भंग करने की मांग भी कर चुके हैं।
विपक्ष
कोर्ट में एकनाथ शिंदे गुट ने क्या तर्क दिया?
कोर्ट की बेंच के समक्ष याचिका पर सुनवाई के दौरान एकनाथ शिंदे गुट के वकील ने तर्क दिया कि चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ पहले दिल्ली हाई कोर्ट में अपील की जानी चाहिए थी, जो पहले ही इससे संबंधित याचिका को खारिज कर चुका है।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले में चुनाव आयोग और शिंदे गुट दोनों को नोटिस जारी किया है और दो हफ्ते बाद वह मामले पर फिर से सुनवाई करेगा।
मामला
क्या है पूरा मामला?
पिछले दिनों चुनाव आयोग ने शिंदे गुट के पक्ष में फैसला सुनाते हुए शिवसेना का नाम और चुनाव चिन्ह 'तीर-कमान' उन्हें सौंप दिया था। चुनाव आयोग के इसी फैसले को ठाकरे ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
दरअसल, जून, 2022 में शिंदे की बगावत के बाद शिवसेना उनके और उद्धव ठाकरे के दो गुटों में बंट गई थी। दोनों ही गुटों ने शिवसेना पर अपनी-अपनी दावेदारी पेश की थी और मामला चुनाव आयोग के पास पहुंच गया था।