
भीमा कोरेगांव मामला: सुप्रीम कोर्ट ने प्रोफेसर शोमा कांति सेन को शर्तों के साथ जमानत दी
क्या है खबर?
महाराष्ट्र के भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को आरोपी प्रोफेसर शोमा कांति सेन को शर्तों के साथ जमानत दे दी।
कोर्ट ने सेन को महाराष्ट्र न छोड़ने को कहा है। उन्हें अपना पासपोर्ट जमा करना होगा और अपने निवास के बारे में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को बताना होगा।
इसके अलावा सेन को अपना ऐसा मोबाइल नंबर एजेंसी को देना होगा, जो कभी बंद नहीं होना चाहिए। उन्हें अपनी मोबाइल लोकेशन हमेशा सक्रिय रखनी होगी।
जमानत
सुप्रीम कोर्ट ने किस आधार पर दी जमानत?
लाइव लॉ के मुताबिक, न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की खंडपीठ ने कहा कि गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) की धारा 43D(5) के तहत जमानत देने पर प्रतिबंध सेन के मामले में लागू नहीं होगा।
पीठ ने कहा कि सेन कई बीमारियों से जूझ रही हैं और उनकी उम्र भी ज्यादा है। इसके अलावा कोर्ट ने उनके लंबे समय तक जेल में बिताए समय, मुकदमे में देरी और आरोपों की प्रकृति को भी ध्यान में रखा।
विवाद
कौन हैं शोमा कांति सेन और क्या है मामला?
सेन नागपुर यूनिवर्सिटी में अंग्रेजी की प्रोफेसर हैं और उनको पुणे के भीमा कोरेगांव में भड़की हिंसा के बाद 6 जून, 2018 को NIA ने गिरफ्तार किया था।
एजेंसी ने सेन को कथित माओवादियों से संबंधों के लिए UAPA के तहत गिरफ्तार किया था। वह 5 साल से जेल में थीं।
62 वर्षीय सेन मामले में 16 आरोपियों में से जमानत पाने वाली छठवीं आरोपी हैं। NIA ने 15 मार्च को कोर्ट को हिरासत की आवश्यकता नहीं बताई थी।
जानकारी
अब तक किन्हें मिली जमानत?
सुधा भारद्वाज को 2021 में,आनंद तेलतुंबडे को 2022 में, वर्नोन गोंसाल्वेस और अरुण फरेरा को 2023 में और वरवरा राव को 2022 में जमानत मिली। गौतम नवलखा को नजरबंद किया गया है। फादर स्टेन स्वामी की 2021 में हिरासत में मौत हो गई थी।