
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने फिर की समलैंगिक वकील को जज बनाने की सिफारिश, आपत्तियां सार्वजनिक कीं
क्या है खबर?
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने एक बार फिर समलैंगिंक वकील सौरभ कृपाल को दिल्ली हाई कोर्ट का जज बनाए जाने की सिफारिश की है और इस नियुक्ति को लेकर रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) की आपत्तियों को खारिज कर दिया है।
कॉलेजियम ने कहा कि जज के रूप में कृपाल की नियुक्ति का प्रस्ताव पांच साल से अधिक समय से लंबित है और यह प्रोसेस जल्द पूरी होनी चाहिए।
कॉलेजियम ने पहली बार आपत्ति रिपोर्ट्स को भी सावर्जनिक कर दिया।
घटनाक्रम
RAW ने क्या कहा था?
RAW ने स्विस नागरिक निकोलस जर्मेन बाचमैन के साथ कृपाल के समलैंगिक संबंधों पर आशंका व्यक्त की थी, वहीं कानून मंत्रालय ने कृपाल की समलैंगिक अधिकारों के क्रम में उत्साही भागीदारी और भावुक लगाव पर आपत्ति जताई थी।
इसके साथ ही मंत्रालय ने कहा था कि भारत में समलैंगिक विवाह को कानूनी दर्जा प्राप्त नहीं है।, ऐसे में कृपाल के समलैंगिक पार्टनर की वजह से उनके निर्णयों में पूर्वाग्रह और पक्षपात की स्थिति बन सकती है।
बयान
विदेशी पार्टनर होने पर कोई आपत्ति नहीं: कॉलेजियम
CJI डीवाई चंद्रचूड़ के नेतृत्व वाले कॉलेजियम ने कहा कि RAW ने जो कुछ भी बताया, उससे यह बिल्कुल नहीं लगता कि कृपाल के आचरण से राष्ट्रीय सुरक्षा पर कोई असर पड़ सकता है।
कॉलेजियम ने कहा कि पहले से यह मान लेना कि उनके पार्टनर भारत के प्रति दुश्मनी का भाव रखते होंगे, गलत है।
उसने कहा कि पहले भी संवैधानिक पदों में बैठे लोगों के पार्टनर विदेशी रहे हैं और इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई गई।
दिल्ली हाई कोर्ट
चार बार सौरभ कृपाल के नाम पर किया गया विचार
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम कृपाल के नाम पर चार बार विचार कर चुका है। 11 नवंबर, 2021 को तत्कालीन CJI एनवी रमन्ना की अगुवाई वाले कॉलेजियम ने पहली बार उनका नाम सरकार को भेजा था और 25 नवंबर, 2022 को सरकार ने नाम वापस कर दिया।
अब 18 जनवरी को कॉलेजियम ने फिर कृपाल के नाम की सिफारिश की है और कहा कि हर व्यक्ति को सेक्सुअल ओरिएंटेशन के आधार पर अपनी गरिमा और व्यक्तित्व बनाए रखने का अधिकार है।
रिपोर्ट सार्वजनिक
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने उठाया ऐतिहासिक कदम
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने पहली बार ऐतिहासिक कदम उठाते हुए हाई कोर्ट में जजों की नियुक्तियों पर अपना रुख साफ किया है।
कॉलेजियम ने इन नियुक्तियों को लेकर केंद्र और जांच एजेंसियों की आपत्ति रिपोर्ट भी सार्वजनिक की है। CJI चंद्रचूड़ के कॉलेजियम ने चार दिनों के विचार-विमर्श के बाद यह फैसला लिया।
जजों की नियुक्ति को लेकर केंद्र और न्यायपालिका के टकराव के बीच सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने ये बड़ा और सख्त कदम उठाया है।