
कॉलेजियम विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट से बोली केंद्र सरकार- सिफारिशों को जल्द मंजूरी देंगे
क्या है खबर?
केंद्र सरकार ने शुक्रवार को कहा कि कॉलेजियम द्वारा विभिन्न हाई कोर्ट में जजों की नियुक्ति के लिए की गई सिफारिशों को मंजूरी देने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित की गई समय सीमा का पालन किया जाएगा।
केंद्र ने कहा कि 104 नामों में से 44 नामों को हफ्ते के अंत तक मंजूर कर दिया जाएगा।
गौरतलब है कि जजों की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार पिछले कुछ समय से आमने-सामने हैं।
बयान
सुप्रीम कोर्ट के लिए भेजे गए पांच नामों पर हो रहा विचार- केंद्र
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एसके कौल और जस्टिस एएस ओका ने शुक्रवार को जजों की नियुक्ति में हो रही देरी पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार से सवाल किया था।
इस पर अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने कहा कि कॉलेजियम द्वारा भेजे गए नाम जल्द ही मंजूर कर दिए जाएंगे।
उन्होंने आगे बताया कि सुप्रीम कोर्ट के लिए सुझाए गए पांच जजों के नामों पर भी विचार किया जा रहा है।
विवाद
आखिर क्या है जजों की नियुक्ति को लेकर छिड़ा विवाद?
सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार के बीच पिछले कुछ समय से जजों की नियुक्ति को लेकर खींचतान चल रही है।
एक तरफ जहां केंद्र सरकार ने कॉलेजियम सिस्टम पर यह कहते हुए सवाल उठाया है कि इस तरीके में कई खामियां हैं और यह पारदर्शी नहीं है।
वहीं दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि जब तक कॉलेजियम सिस्टम देश का कानून है, तब तक इसका पालन किया जाना चाहिए।
टिप्पणी
सिफारिशों को रोकने के लिए केंद्र को फटकार लगा चुकी है सुप्रीम कोर्ट
इससे पहले केंद्र को फटकार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि कॉलेजियम कोई निर्णय लेता है तो वरिष्ठता सहित विभिन्न कारणों को ध्यान में रखा जाता है और केंद्र अपनी आपत्तियों को बताए बिना सिफारिश किए गए नामों को रोक नहीं सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू के बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि अगर केंद्र सरकार जजों की नियुक्ति लंबित करती रहेगी तो सिस्टम किस तरह काम कर पाएगा।
प्रक्रिया
क्या होता है कॉलेजियम सिस्टम ?
सुप्रीम कोर्ट के पांच सबसे वरिष्ठ जजों के समूह को कॉलेजियम कहा जाता है। यह जजों की नियुक्ति और ट्रांसफर पर फैसला लेता है।
तय नामों को केंद्र सरकार के पास भेजा जाता है और राष्ट्रपति इन पर अंतिम मुहर लगाते हैं। 2014 में सरकार ने कॉलेजियम सिस्टम को खत्म करने के लिए राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) अधिनियम बनाया था।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने 16 अक्टूबर, 2015 को इसे खारिज करते हुए कॉलेजियम सिस्टम को बहाल कर दिया था।