
पंजाब में इस साल 46 प्रतिशत बढ़ी पराली जलाने की घटनाएं, हरियाणा में कम हुईं
क्या है खबर?
पंजाब में इस साल पराली जलाने की घटनाओं में पिछले साल की तुलना में 46 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की तरफ से जारी रिपोर्ट से यह जानकारी मिली है।
'एक्टिव फायर इवेंट्स' (AFE) पर जारी रिपोर्ट में मंत्रालय ने बताया कि पंजाब में इस साल 21 सितंबर से 22 नवंबर के बीच पराली जलाने की 76,537 घटनाएं हुईं, जो पिछले साल इसी समय की ऐसी 52,225 की घटनाओं से ज्यादा हैं।
डाटा
हरियाणा में पिछले साल की तुलना में कम जली पराली
पंजाब में जहां पराली जलाने की घटनाएं बढ़ी हैं, तो हरियाणा में इनमें कमी देखी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा में इस बार पराली जलाने की 4,675 घटनाएं हुईं, जो पिछले साल की 6,551 से 28.6 प्रतिशत कम है।
कारण
पंजाब में किन वजहों से बढ़ी घटनाएं?
पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं बढ़ने के संभावित कारण बताते हुए कृषि विशेषज्ञ और पंजाब के पूर्व कृषि निदेशक स्वतंत्र कुमार ऐरी ने बताया कि इस साल सर्दी पहले आने से कटाई जल्दी शुरू हो गई थी।
इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए ऐरी ने कहा कि पिछले साल सितंबर में बारिश हुई थी, जो इस साल नहीं हुई। इससे किसानों को जल्दी कटाई और बिजाई का समय मिल गया।
बयान
"पराली प्रबंधन के इंतजामों का इंतजार नहीं किया"
उन्होंने आगे कहा कि जल्दी कटाई होने के कारण किसानों ने पराली के प्रबंधन के लिए आने वाले इंतजामों का इंतजार नहीं किया। उन्होंने चावल की कटाई के बाद तुरंत गेहूं की बिजाई शुरू कर दी और पराली को आग लगा दी।
कारण
कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन भी एक वजह- ऐरी
ऐरी ने इसका दूसरा संभावित कारण पंजाब में केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों को बताया है।
उन्होंने कहा, "कुछ जिलों में, जहां किसान संगठन मजबूत हैं, उन्होंने विरोध के तौर पर किसानों को पराली जलाने के लिए उकसाया। इस वजह से जो किसान पहले तक पराली नहीं जला रहे थे, उन्होंने भी इस बार पराली जलाना शुरू कर दिया।"
गौरतलब है कि पंजाब में नए कृषि कानूनों का सबसे कड़ा विरोध हो रहा है।
पराली जलाने की घटना
पर्याप्त संसाधनों के बावजूद नहीं हो पाया प्रबंधन
विशेषज्ञों का मानना है कि पंजाब में इस बार के पराली जलाने के आंकड़े चौंकाने वाले हैं क्योंकि राज्य में इस साल पिछले साल की तुलना में 15 प्रतिशत कम पराली हुई है। इसके प्रबंधन के लिए राज्य में पर्याप्त संसाधन (74,000 मशीनें) उपलब्ध थीं।
मंत्रालय के अनुसार, संगरूर, फिरोजपुर और भठिंडा जैसे जिलों में पराली जलाने की सबसे ज्यादा घटनाएं हुईं।
यहां पिछले साल की तुलना में क्रमश: 45.7 प्रतिशत, 40.5 प्रतिशत और 35 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।
आरोप
केंद्र का आरोप- केंद्रीय योजनाओं का लागू नहीं किया जा रहा
इस साल पंजाब में 26 दिन ऐसे थे, जब हवा में प्रदूषक तत्व PM 2.5 के स्तर में पराली जलाने से होने वाले धुएं का योगदान 10 प्रतिशत से ज्यादा था। पिछले साल ऐसे 21 दिन थे।
केंद्र सरकार ने पराली जलाने की घटनाओं में वृद्धि के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया है।
केंद्र का कहना है कि राज्य में केंद्र सरकार की समर्थित योजनाओं को जमीनी स्तर पर ठीक ढंग से लागू नहीं किया जा रहा है।