
कंपनी का दावा- दो साल तक कोरोना वायरस से सुरक्षा प्रदान करेगी वैक्सीन स्पूतनिक-V
क्या है खबर?
कोरोना वायरस महामारी से जूझ रही दुनिया के लिए राहत की बड़ी खबर सामने आई है।
रूस की कोरोना वायरस वैक्सीन स्पूतनिक-V बनाने वाली कंपनी गामालेया नेशनल रिसर्च सेंटर फॉर एपिडीमियॉलजी ऐंड माइक्रोबायॉलजी ने दावा किया है कि इस वैक्सीन के उपयोग के बाद दो साल तक कारोना वायरस से सुरक्षा मिलने की संभावना है। कंपनी के इस दावे ने महामारी से जूझ रहे लोगों में नए जोश का संचार कर दिया है।
आइए जानें विस्तृत खबर।
लॉन्च
रूस के सरकार ने अगस्त में किया था वैक्सीन को लॉन्च
मॉस्को के गामालेया रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा तैयार वैक्सीन स्पूतनिक-V का पहले ट्रायल 18 जून को शुरू हुआ था।
इसमें 38 लोगों को डोज दी गई थी। 20 जुलाई को आए ट्रायल के नतीजों में इसमे हिस्सा लेने वाले सभी लोगों में कोरोना वायरस के खिलाफ इम्युनिटी देखने को मिली थी।
इसके बाद रूस ने अगस्त में वैक्सीन लॉन्च करने का ऐलान कर दिया था। इसका नाम सोवियत संघ द्वारा लॉन्च किए गए पहले उपग्रह के सम्मान में रखा गया था।
प्रभावी
92 प्रतिशत प्रभावी पाई गई है वैक्सीन
बता दें कि गामालेया रिसर्च इंस्टिट्यूट और रूसी प्रत्यक्ष निवेश कोष (RDIF) ने पिछले महिलने संयुक्त बयान जारी कर कहा था कि वैक्सीन के तीसरे चरण के क्लिनिकल ट्रायल के दूसरे अंतरिम विश्लेषण ने चौंकाने वाले परिणाम दिए हैं।
वैक्सीन वॉलेंटियरों को पहली खुराक दिए जाने के 28 दिन 91.4 प्रतिशत प्रभावी मिली थी, लेकिन पहली खुराक के 42 दिन बार के विश्लेषण में यह 95 प्रतिशत तक प्रभावी मिली है। ऐसे में सकल रूप से 92 प्रतिशत प्रभावी है।
दावा
वैक्सीन के दो साल तक सुरक्षा प्रदान करने की संभावना- गेन्सबर्ग
गामालेया रिसर्च इंस्टीट्यूट के प्रमुख अलेक्जेंडर गेन्सबर्ग ने दावा किया है कि स्पूतनिक-V के अब तक किए गए अध्ययनों में सामने आया है कि यह वैक्सीन करीब दो साल तक कोरोना महामारी से सुरक्षा प्रदान करेगी।
उन्होंने आगे कहा कि यह कहना मुश्किल है कि फाइजर की वैक्सीन कितने समय तक सुरक्षा प्रदान करेगी, लेकिन सामान्य निष्कर्षों के आधार पर यह अवधि चार-पांच महीने से अधिक नहीं होगा। हालांकि, उन्होंने इसके आंकलन के लिए प्रयोगात्मक डेटा की आवश्यकता जताई है।
जानकारी
45 सेंटारों में 40,000 लोगों पर किया जा रहा है ट्रायल
बता दें कि वर्तमान में स्पूतनिक-V वैक्सीन का 45 से अधिक मेडिकल सेंटर्स में 40,000 से अधिक लोगों पर तीसरे चरण का क्लिनिकल ट्रायल किया जा रहा है। इसके पूरा होने में समय लगेगा, लेकिन निर्माताओं ने इसकी प्रभावितका और बढ़ने की उम्मीद जताई है।
ट्रायल
भारत में शुरु हुआ वैक्सीन के तीसरे चरण का ट्रायल
RDIF ने इस वैक्सीन के भारत में ट्रायल और वितरण के लिए हैदराबाद की डॉ रेड्डीज लैबोरेट्रीज से करार किया है।
कंपनी ने अनुमति मिलने के बाद गत 2 दिसंबर को इसका ट्रायल शुरू कर दिया है। इसके तहत महाराष्ट्र में पुणे के नोबल अस्पताल में 17 वॉलंटियर्स को इस वैक्सीन की खुराक दी गई है।
पहले 100 लोगों पर ट्रायल करके वैक्सीन की सुरक्षा की जांच की जाएगी और इसके बाद 1,400 लोगों पर ट्रायल किया जाएगा।
उत्पादन
हरी झंडी मिलने पर भारत को मिलेगी 10 करोड़ खुराकें
अगर सबकुछ ठीक रहता है और ट्रायल में स्पूतनिक-V को प्रभावी पाया जाता है तो भारत को इसकी 10 करोड़ खुराकें मिलेंगी जो पांच करोड़ लोगों को इम्युनिटी प्रदान करने लिए काफी है।
इसके अलावा भारत में होने वाले 'स्पूतनिक-V' के उत्पादन से ब्राजील, चीन, दक्षिण कोरिया के साथ करीब 50 देशों को सप्लाई की जाएगी।
इन देशों ने रूस को 1.2 अरब यानी 1,200 करोड़ खुराकों का ऑर्डर दिया है। ऐसे में वैक्सीन का उत्पादन बढ़ाया जा रहा है।
फाइजर
फाइजर को सात देशों में मिल चुकी है आपात उपयोग की मंजूरी
स्पूतनिक-V को लेकर भले ही बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन फिलहाल इसे आपात उपयोग की मंजूरी नहीं मिली है।
इसके उलट अमेरिकी फार्मा कंपनी फाइजर के वैक्सीन के 95 प्रतिशत प्रभावी होने का दावा करने के बाद उसे यूनाइटेड किंगडम, बहरीन, कनाड़ा, सऊदी अरब, अमेरिका, मेक्सिको और सिंगापुर में आपात उपयोग की मंजूरी मिल चुकी है।
इसके अलावा यूनाटेड किंगडम, अमेरिका और कनाड़ा में इसका उपयोग भी शुरू हो गया है।