
इंग्लैंड और अमेरिका की नेताओं से ज्यादा होती है भारतीय महिला नेताओं की ट्रोलिंग
क्या है खबर?
भारत में महिला नेताओं को सोशल मीडिया पर अमेरिका और इंग्लैंड की नेताओं से ज्यादा ट्रोलिंग का सामना करना पड़ता है।
पिछले साल आम चुनावों के मौके पर ट्विटर पर की गई अपनी तरह की पहली रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है।
अमनेस्टी इंडिया इंटरनेशनल-इंटरनेशनल सेक्रेटेरियेट ने पिछले साल मार्च-मई के बीच के 1,14,716 ट्वीट का विश्लेषण किया। इनमें 95 महिला नेताओं को मेंशन किया गया था। विश्लेषण में पाया गया कि इनमें लगभग 13.8 प्रतिशत गाली भरे ट्वीट थे।
रिपोर्ट
इंग्लैंड और अमेरिका का है यह हाल
2019 के विश्लेषण की तुलना में एमनेस्टी इंटरनेशनल ने 2017 में एक सॉफ्टवेयर कंपनी एलीमेंट AI के साथ मिलकर अमेरिका और इंग्लैंड की 778 महिला नेताओं और पत्रकारों के मेंशन वाले लाखों ट्वीट का अध्ययन किया था।
ये सभी पत्रकार और नेता अलग-अलग राजनीतिक रूझान वाली थीं। इनमें से 7.1 प्रतिशत ट्वीट गाली भरे और परेशानी पैदा करने वाले थे।
इस लिहाज से भारत में यह संख्या दोगुना से थोड़ी कम है।
जानकारी
महिला नेताओं के नाम का नहीं किया गया खुलासा
अमनेस्टी इंटरनेशनल ने यह रिपोर्ट 'ट्रोल पेट्रोल इंडिया: एक्सपोजिंग ऑनलाइन अब्यूज फेस्ड बाय वूमेन पोलिटिशियंस इन इंडिया' नाम से तैयार की है। इसमें ट्विटर की प्रतिक्रिया और अमनेस्टी की सिफारिशें भी शामिल की गई हैं। हालांकि, इसमें महिलाओं के नाम उजागर नहीं किया गया है।
रिपोर्ट
इन पार्टियों की नेताओं का किया गया अध्ययन
अमनेस्टी ने बताया कि जिन 95 महिला नेताओं के ट्वीटर का विश्लेषण किया गया, उनमें से 44 भाजपा, 28 कांग्रेस और बाकी 23 नेता आम आदमी पार्टी, अपना दल, ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्रा कझगम (AIADMK), तृणमूल कांग्रेस, बसपा और वामपंथी पार्टियों से जुड़ी हैं।
जिन ट्वीट का विश्लेषण किया गया था, उनमें से अधिकतर अंग्रेजी में थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि कमजोर समुदायों से आने वाली नेताओं को ज्यादा ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा था।
डाटा
पिछड़ी जातियों से आने वाली महिलाओं की सबसे ज्यादा ट्रोलिंग
बतौर रिपोर्ट, 95 महिलाओं में शामिल सात मुस्लिम नेताओं को बाकी नेताओं के मुकाबले 55.5 प्रतिशत ज्यादा गालियों का सामना करना पड़ा। उनके अलावा हाशिये पर पड़ी जातियों की महिला नेताओं को बाकी नेताओं के मुकाबले 59 प्रतिशत जातिगत टिप्पणियों का सामना करना पड़ा।
प्रतिक्रिया
रिपोर्ट पर क्या कहती हैं महिला नेता?
हिंदुस्तान टाइम्स ने इसे लेकर भाजपा प्रवक्ता शाजिया इल्मी से बात की।
उन्होंने बताया, "हर कोई ट्रोल्स का सामना करता है, लेकिन महिलाओं के लिए यह अलग दर्जे की बात है। उनसे ऐसी-ऐसी बातें कही जाती हैं जो एक पुरुष को कभी नहीं कही जाती।"
वहीं कांग्रेस की कार्यकर्ता हसीबा अमीन ने बताया, "मुझे कहा गया कि मुस्लिम महिला होने के मैं बोल नहीं सकती। रेप की धमकी मिलना आम बात थी। मेरा चरित्रहनन किया जाता था।"
ट्विटर का पक्ष
अमनेस्टी की रिपोर्ट पर यह रही ट्विटर की प्रतिक्रिया
ट्विटर ने लोकसभा चुनाव के दौरान ट्रोलिंग और भद्दी टिप्पणियों को नियंत्रित करने के लिए लिए उठाए गए कदमों का ब्यौरा दिया।
ट्विटर ने बताया कि भद्दी टिप्पणियों और गाली भरे 50 प्रतिशत से ज्यादा ट्वीट को टेक्नोलॉजी का सहारा लेते हुए यूजर्स द्वारा रिपोर्ट किए जाने का इंतजार करने से पहले ही हटा दिया गया था।
कंपनी ने बताया कि चुनावों के दौरान नफरत भरी टिप्पणियों के कारण रिपोर्ट होने वाले ट्वीट की संख्या 48 प्रतिशत बढ़ी थी।
जानकारी
बहुत कुछ करने की जरूरत- अमनेस्टी
अमनेस्टी की तरफ से कहा गया है कि काफी कुछ करने की जरूरत है। चूंकि अधिकतर भद्दी टिप्पणियां और गाली-गलौज वाले ट्वीट क्षेत्रीय भाषाओं, हिंदी और इंग्लिश में लिखे होते हैं, इसलिए ये ट्विटर की ऑटो लैंग्वेज डिटेक्शन तकनीक से बच जाते हैं।