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बंगाल में लाशों पर राजनीति? मृतक शिक्षक का परिवार बोला, भाजपा से नहीं था कोई संबंध

बंगाल में लाशों पर राजनीति? मृतक शिक्षक का परिवार बोला, भाजपा से नहीं था कोई संबंध

Oct 12, 2019
02:26 pm

क्या है खबर?

राजनीतिक दल और नेता किस तरीके से लाशों पर भी राजनीति करने से बाज नहीं आते, इसकी एक बानगी हमें मुर्शिदाबाद हत्याकांड में मारे गए बंधु प्रकाश पाल के परिवार के बयान से मिलती है। जहां भारतीय जनता पार्टी पाल को अपना और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का कार्यकर्ता बता रही है और राज्य की तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार पर हमलावर है, वहीं उसकी मां ने कहा है कि पाल का भाजपा या RSS से कोई संबंध नहीं था।

हत्याकांड

मंगलवार को घर पर मिले थे शिक्षक, उसकी पत्नी और बेटे के शव

मंगलवार को पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद के जियागंज में शिक्षक बंधु प्रकाश पाल (40 वर्ष), उसकी गर्भवती पत्नी ब्यूटी (30 वर्ष) और बेटे अंगन (छह वर्ष) के शव उनके घर से बरामद किए गए थे। तीनों की चाकुओं से गोदकर हत्या की गई थी। इसके तुरंत बाद भाजपा ने पाल को अपना और RSS का कार्यकर्ता बताते हुए उनकी राजनीतिक हत्या का दावा किया था। पार्टी नेताओं ने तीनों शवों की तस्वीरों को सोशल मीडिया पर जमकर शेयर किया था।

जानकारी

नाडिया में पुजारी की हत्या के बाद भाजपा ने तेज किए हमले

शुक्रवार को कई दिन से लापता नाडिया जिले के पुजारी सुप्रियो बनर्जी का शव मिलने के बाद भाजपा ने अपने हमलों को और तेज कर दिया। बनर्जी को अपना कार्यकर्ता बताते हुए भाजपा ने चार दिन में अपने आठ कार्यकर्ताओं की हत्या का दावा किया।

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बयान

पाल की मां बोलीं, भाजपा या RSS से कोई संबंध नहीं था

इस बीच बंधु पाल की मां ने जो कहा है, उससे भाजपा के दावों पर गंभीर सवाल उठते हैं। बरला गांव स्थित अपने घर पर 68 वर्षीय माया पाल ने बयान देते हुए कहा, "वह एक सफेद कागज की तरह था। आपको किसने कहा कि वह भाजपा का सदस्य था? वह कभी भी भाजपा या तृणमूल कांग्रेस से जुड़ा हुआ नहीं था। वह कभी भी RSS के साथ नहीं था। झूठ फैलाया जा रहा है।"

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बयान

ममेरे भाई बोले, राजनीति में नहीं थी पाल की दिलचस्पी

वहीं पाल के ममेरे भाई कृष्ण घोष ने कहा, "दिलीप घोष ने कहा कि मेरा भाई 'भाजपा परिवार' से था। वह झूठ बोल रहे हैं। मैंने उसे बचपन से देखा है और मेरा भाई होने के अलावा वह मेरा सबसे अच्छा दोस्त था।" उन्होंने आगे कहा, "जब भी हम राजनीति की बात करते, वह अलग चला जाता था। TMC नेता भी कह रहे हैं कि वह भाजपा की आंतरिक लड़ाई का शिकार हुआ। किसी को इसका राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए।"

राजनीतिक संबंध

चाचा और पड़ोसियों ने भी राजनीतिक संबंध की बात से किया इनकार

पाल के चाचा दुलाल घोष और उनके पड़ोसियों ने भी उनकी किसी भी राजनीतिक संबंध की बात से इनकार किया है। वहीं बंगाल के बड़े RSS पदाधिकारी बिद्युत रॉय ने 'इंडियन एक्सप्रेस' के साथ बातचीत में कहा, "पाल चार महीने से हमारे संपर्क में था और उसने हमारे कुछ कार्यक्रमों में हिस्सा लिया था। वह नौसिखिया था। मुझे नहीं लगता कि उसकी हत्या इसलिए की गई क्योंकि वह हमारे संपर्क में था।"

जानकारी

पुजारी के परिवार ने भी दिया था भाजपा के विपरीत बयान

बता दें कि इससे पहले नाडिया के पुजारी सुप्रियो बनर्जी के परिवार ने भी पैसे के लिए उनकी हत्या का अंदेशा जताया था, जबकि भाजपा ने उन्हें अपना कार्यकर्ता बताते हुए उनकी राजनीतिक हत्या का आरोप लगाया था।

राजनीति

क्या है भाजपा का मकसद?

पश्चिम बंगाल में 2021 में विधानसभा चुनाव होने हैं। लोकसभा चुनाव में अपने शानदार प्रदर्शन से उत्साहित और राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी बन चुकी भाजपा इन चुनाव में पहली बार राज्य की सत्ता पर काबिज होने का लक्ष्य लेकर चल रही है। उसका मुख्य मुकाबला ममता बनर्जी की TMC से है। भाजपा को लगता है कि पाल की हत्या को एक बड़ा मुद्दा बना चुनाव से पहले अपने लिए माहौल तैयार कर सकती है।

राजनीतिक हिंसा

हिंसा, बंगाल की राजनीति की एक कड़वी सच्चाई

इस बीच ये भी ध्यान रखने योग्य बात है कि हिंसा पश्चिम बंगाल की राजनीतिक की एक कड़वी सच्चाई है और इसमें सभी पार्टियां बराबर की भागीदार नजर आती हैं। लगभग चार दशक बंगाल पर राज करने वाले वामपंथी दलों ने इसकी शुरूआत की थी। उन्हें उखाड़ फेंक सत्ता में आने वाली TMC ने अपने विरोधी के इस "गुण" को अपनाने से परहेज नहीं किया और राजनीतिक हिंसा लगातार जारी रही। भाजपा भी इस मामले में पीछे नहीं है।

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