
भारत ने अपने नागरिकों से यूक्रेन छोड़ने को कहा, गैर-जरूरी यात्रा से बचने की भी सलाह
क्या है खबर?
अन्य देशों के नक्शेकदम पर चलते हुए अब भारत ने भी अपने नागरिकों से अस्थायी तौर पर यूक्रेन छोड़ने को कहा है। यूक्रेन स्थित भारतीय दूतावास ने इस संबंध में एडवाइजरी जारी की है।
एडवाइजरी में भारतीय नागरिकों, खासकर ऐसे छात्र जिनका रुकना जरूरी नहीं है, उन्हें मौजूदा स्थिति को देखते हुए यूक्रेन छोड़ने की सलाह दी गई है।
इसके अलावा भारतीय नागरिकों को यूक्रेन की गैर-जरूरी यात्रा के खिलाफ भी सलाह दी गई है।
एडवाइजरी
एडवाइजरी में क्या कहा गया है?
एडवाइजरी में भारतीय दूतावास ने कहा है, "यूक्रेन में वर्तमान स्थिति की अनिश्चितता को देखते हुए यूक्रेन में रह रहे भारतीय नागरिक, खासकर छात्र जिनका रहना जरूरी नहीं है, अस्थायी तौर पर देश छोड़ने पर विचार कर सकते हैं। नागरिकों को यूक्रेन की और (यूक्रेन) में गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह भी दी जाती है।"
नागरिकों से अपने स्टेटस के बारे में दूतावास को बताते रहने को कहा गया है ताकि जरूरत के समय उन तक पहुंचा जा सके।
जानकारी
दूतावास नहीं होगा बंद, सामान्य तौर पर करता रहेगा काम
एडवाइजरी में यह भी कहा गया है कि दूतावास सामान्य तौर पर काम करता रहेगा और यूक्रेन में रह रहे भारतीय नागरिकों को सभी सुविधाएं प्रदान करना जारी रखेगा। बता दें कि यूक्रेन पर रूस के हमले का खतरा मंडरा रहा है।
अन्य देश
अन्य देश भी अपने नागरिकों को दे चुके हैं यूक्रेन छोड़ने की सलाह
गौरतलब है कि भारत से पहले भी कई देश अपने नागरिकों को यूक्रेन छोड़ने की सलाह दे चुके हैं। इन देशों में अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम (UK), न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया और जर्मनी जैसे देश भी शामिल हैं। फ्रांस ने भी अपने नागरिकों से यूक्रेन जाने से बचने को कहा है।
इसके अलावा अमेरिका ने यूक्रेन स्थित अपने दूतावास को खाली करने का ऐलान भी किया है। ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी और फ्रांस ने भी अपने दूतावासों के स्टाफ को कम किया है।
पृष्ठभूमि
यूक्रेन को लेकर क्यों बना हुआ है विवाद?
यूक्रेन को लेकर तनाव के काई छोटे-छोटे कारण हैं, लेकिन इसकी मुख्य वजह यूक्रेन की पश्चिमी यूरोप और नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन (NATO) से बढ़ती नजदीकियां हैं।
दरअसल, यूक्रेन पश्चिमी यूरोप के करीब जा रहा है और NATO में शामिल होना चाहता है, जो शीत युद्ध के समय रूस के खिलाफ बना एक सैन्य गठबंधन है।
रूस की चिंता है कि अगर यूक्रेन NATO में शामिल होता है तो NATO के सैन्य ठिकाने बिल्कुल उसकी सीमा के पास आ जाएंगे।
मांगें
रूस क्या चाहता है?
रूस ने यूक्रेन की सीमा पर एक लाख सैनिक तैनात कर रखे हैं और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अमेरिका और पश्चिमी देशों से 'कानूनी गारंटी' मांगी है कि यूक्रेन को NATO में शामिल नहीं कराया जाएगा। उन्होंने पूर्वी यूरोप में NATO की सैन्य गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग भी की है।
अमेरिका ने रूस को कई बार चेताया है कि अगर उसने आक्रमण किया तो उस पर गंभीर प्रतिबंध लगाए जाएंगे और NATO में भी बदलाव हो सकता है।